पीएम मोदी ने कहा कि ये बजट सत्र है। 21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। ये दूसरे चौथाई का प्रारंभ हो रहा है और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण 25 वर्ष का दौर आरंभ हो रहा है। और ये इस शताब्दी के दूसरे क्वाटर का ये पहला बजट आ रहा है।
उन्होंने कहा कि देश का ध्यान बजट की तरफ होना बहुत स्वाभाविक है। लेकिन इस सरकार की पहचान रही है रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म। अब तो हम रिफॉर्म एक्सप्रेस पर बहुत तेजी से चल पड़े हैं। मैं संसद के भी सभी साथियों का आभार व्यक्त करता हूं कि इस रिफॉर्म एक्सप्रेस को गति देने में वे भी अपनी सकारात्मक शक्ति लगा रहे हैं। इस कारण रिफॉर्म एक्सप्रेस को लगातार गति मिल रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आत्मविश्वास भरा भारत आज विश्व के लिए आशा की किरण भी बना है और आकर्षण का केंद्र भी बना है। इस क्वार्टर के प्रारंभ में ही भारत और यूरोपीय संघ का मुक्त व्यापार समझौता दिखाता है कि आने वाले वक्त में भारत के युवाओं का भविष्य कितना उज्जवल है। मुझे पूरा विश्वास है कि भारत के उत्पादक इस अवसर का इस्तेमाल अपनी क्षमताएं बढ़ाने के लिए करेंगे। हमें गुणवत्ता पर बल देना है।
उन्होंने कहा कि आज बाजार खुल गया है तो हमें उत्तम से उत्तम गुणवत्ता वाला सामान लेकर बाजार में जाना है। 27 देशों के साथ हुआ यह समझौता हमारे देश के मछुआरे, किसान, युवाओं और जो लोग सर्विस सेक्टर में जाने के लिए उत्सुक हैं, उनके लिए बड़े अवसर लेकर आ रहा है।
वित्तमंत्री निर्मला जी देश की पहली ऐसी महिला वित्तमंत्री हैं, जो लगातर 9वीं बार देश के संसद में बजट प्रस्तुत करने जा रही हैं। ये अपने आप में एक गौरव के पल के रूप में भारत के संसदीय इतिहास में दर्ज हो रहा है।
ALSO READ: पहली बार रविवार को पेश होगा बजट, शेयर बाजार भी खुलेंगे
उन्होंने कहा कि कल राष्ट्रपति जी का उद्बोधन 140 करोड़ देशवासियों के आत्मविश्वास की अभिव्यक्ति था, 140 करोड़ देशवासियों के पुरुषार्थ का लेखा-जोखा था। 140 करोड़ देशवासी और उसमें भी ज्यादातर युवाओं के aspirations को रेखांकित करने का बहुत ही सटीक उद्बोधन था।
उन्होंने कहा कि सत्र के प्रारंभ में ही और 2026 के प्रारंभ में ही आदरणीय राष्ट्रपति जी ने सांसदों से जो अपेक्षाएं व्यक्त की हैं, उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में राष्ट्र के मुखिया के रुप में जो भावनाएं व्यक्त की हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि सभी माननीय सांसदों ने उसको गंभीरता से लिया ही होगा।
edited by : Nrapendra Gupta