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उर्दू साहित्य
अहमद फ़राज़ की ग़ज़लें
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आप बन्दा नवाज़ क्या जानें
मेरे दिल को किया बेख़ुद तेरी अंखयाँ ने आख़िर कूँ के जूँ बेहोश करती है शराब आहिस्ता आहिस्ता ----------
चमकते कपड़े, महकता ख़ुलूस, पुख़्ता मकाँ
चमकते कपड़े, महकता ख़ुलूस, पुख़्ता मकाँ, हरएक बज़्म में इज़्ज़त हिफ़ाज़तें माँगे।
जोर से बाज़ आए पर बाज़ आएँ क्या
तुम जानो तुमको ग़ैर से जो रस्मो-राह हो
नज़्म : 'सियासत में'
मोमिन की ग़ज़लें
फ़ाज़िल अंसारी के अशआर
मुज़्महिल हो गए क़ुवा ग़ालिब
मुज़्महिल हो गए क़ुवा ग़ालिब अब अनासिर में एतदाल कहंआ
'घर जब बना लिया तेरे दर पर कहे बग़ैर'
ग़ालिब न कर हुज़ूर में तू बार-बार अर्ज़ ज़ाहिर है तेरा हाल सब उन पर कहे बग़ैर
नज़्म : नग़मा-ए-शौक़
ऐ ज़ौके नज़ारा तेरा अल्लाह निगहबां
ऐ ज़ौके नज़ारा तेरा अल्लाह निगहबां आज उनको संवरने में बड़ी देर लगी है
कौसर सिद्दीक़ी की ग़ज़लें
साक़ी मुझे गज़क के एवज
साक़ी मुझे गज़क के एवज भी शराब दे महशर में कौन लाख तरह का हिसाब दे
रास्तो क्या हुए वो लोग जो आते-जाते
रास्तो क्या हुए वो लोग जो आते-जाते मेरे आदाब पे कहते थे कि जीते रहिए - अज़हर इनायती
ग़ज़ल : अकबर इलाहाबादी
किस किस अदा से तूने जलवा दिखा के मारा आज़ाद हो चुके थे, बन्दा बना के मारा
मुफ़लिसी सब बहार खोती है
ज़िन्दगी है या कोई तूफ़ान है, हम तो इस जीने के हाथों मर चले।------
अब्दुल अहद साज़ की ग़ज़लें
मज़ाहिया क़तआत
बस तीन दिन हुए हैं बड़ीबी की मौत को सठया गए हैं दोस्तो कल्लू बड़े मियाँ चर्चा ये हो रहा है के सब भूल-
ये तो नहीं के ग़म नहीं
ये तो नहीं कि ग़म नहीं हाँ! मेरी आँख नम नहीं
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