Gyanvapi Mosque Case : सर्वे का आदेश देने वाले जज रवि दिवाकर को मिली धमकी

Webdunia
मंगलवार, 7 जून 2022 (21:47 IST)
वाराणसी। ज्ञानवापी परिसर के वीडियोग्राफी का आदेश देने वाले दीवानी न्यायाधीश (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर को मंगलवार को एक धमकी भरा पत्र मिला है। वाराणसी के पुलिस आयुक्त ने बताया कि न्यायाधीश की सुरक्षा में नौ पुलिसकर्मी लगाए गए हैं और इस मामले की जांच की जा रही है।
 
वाराणसी के दीवानी न्यायाधीश दिवाकर ने इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक और पुलिस आयुक्त वाराणसी को पत्र लिखकर धमकी मिलने की जानकारी दी है। अधिकारियों को भेजे गये पत्र में दिवाकर ने लिखा है कि उन्हें यह पत्र ‘इस्लामिक आगाज़ मूवमेंट’ की ओर से काशिफ अहमद सिद्दीकी द्वारा भेजा गया है।
 
इस संदर्भ में वाराणसी के पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि न्यायाधीश दिवाकर को रजिस्टर्ड डाक द्वारा एक पत्र मिला है, जिसमें कुछ और कागज संलग्न है, इसकी जानकारी उनके द्वारा अभी दी गयी है। उन्होंने कहा कि वाराणसी के पुलिस उपायुक्त वरुणा को इस प्रकरण की जांच सौंपी गई है। गणेश ने बताया कि न्यायाधीश कुमार की सुरक्षा में कुल नौ पुलिसकर्मी लगाए गए हैं और समय समय पर उनके सुरक्षा की समीक्षा की जा रही है।
 
न्यायाधीश को भेजा गया पत्र सोशल मीडिया पर भी वायरल हो गया है। पत्र में लिखा गया है, 'अब न्यायाधीश भी भगवा रंग में सराबोर हो चुके हैं। फैसला उग्रवादी हिंदुओं और उनके तमाम संगठनों को प्रसन्न करने के लिए सुनाते हैं। इसके बाद ठीकरा विभाजित भारत के मुसलमानों पर फोड़ते हैं। आप न्यायिक कार्य कर रहे हैं, आपको सरकारी मशीनरी का संरक्षण प्राप्त है। फिर आपकी पत्नी और माता श्री को डर कैसा है...?”
 
उसमें लिखा है, “आजकल न्यायिक अधिकारी हवा का रुख देख कर चालबाजी दिखा रहे हैं। आपने वक्तव्य दिया था कि ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का निरीक्षण एक सामान्य प्रक्रिया है। आप भी तो बुतपरस्त (मूर्तिपूजक) हैं। आप मस्जिद को मंदिर घोषित कर देंगे।”
 
न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने 26 अप्रैल को ज्ञानवापी परिसर की वीडियोग्राफी सर्वेक्षण कराने के आदेश दिए थे। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट 19 मई को अदालत में पेश की गई थी। सर्वेक्षण के दौरान हिंदू पक्ष ने ज्ञानवापी मस्जिद के वजू खाने में ‘शिवलिंग’ मिलने का दावा किया था जिसे मुस्लिम पक्ष ने खारिज करते हुए कहा था कि वह”शिवलिंग’ नहीं, बल्कि ‘फव्वारा’ है। इसी बीच उच्चतम न्यायालय ने मुस्लिम पक्ष की एक याचिका पर मामले को जिला न्यायाधीश की अदालत में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। मुस्लिम पक्ष ने जिला अदालत में अर्जी दायर कर कहा था कि यह मामला उपासना स्थल कानून के प्रावधानों के खिलाफ है लिहाजा यह सुनवाई किए जाने योग्य ही नहीं है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

कब-कब हुई भगदड़ की बड़ी घटनाएं, डराने वाले इन आंकड़ों को देखिए

बंगाल की धरती से मोहन भागवत ने बताया RSS का अगला प्लान, हिन्दुओं को लेकर कही बड़ी बात

दिल्ली के CM पर कल खत्म हो सकता है सस्पेंस, शपथ ग्रहण समारोह को लेकर बड़ा अपडेट

अघाड़ी में पड़ी दरार, फडणवीस से मिले उद्धव, शिंदे की शरद पवार ने की तारीफ, महाराष्ट्र में नए सियासी समीकरण

फालतू है कुंभ, लालू यादव ने बताया किसकी गलती से मची नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़

सभी देखें

नवीनतम

Supreme Court ने पूजा स्थल अधिनियम से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई अप्रैल तक के लिए टाली

GIS 2025: मध्यप्रदेश लॉजिस्टिक्स पॉलिसी-2025 लिखेगी प्रदेश की समृद्धि का नया अध्याय

यूपी, बिहार से लेकर मध्‍यप्रदेश तक, प्रयागराज जाने वाली ट्रेनों में भयावह भीड़, बेकाबू हो रहे हालात

बागेश्वर धाम पहली बार आएंगे पीएम नरेंद्र मोदी, कैंसर अस्पताल की रखेंगे आधारशिला, भव्य हो रही तैयारी

SGPC प्रमुख हरजिंदर सिंह धामी ने नैतिक आधार पर अपने पद से दिया इस्तीफा, जानें कारण

अगला लेख