Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

वास्तु की 14 खास बातें जिससे हो जाता है मकान मालिक का नाश

हमें फॉलो करें lal kitab vastu 2022

अनिरुद्ध जोशी

गुरुवार, 30 दिसंबर 2021 (14:52 IST)
आपके जीवन में आपके ग्रहों से ज्यादा आपके घर और उसके वास्तु का प्रभाव पड़ता है। घर का सही जगह और वास्तु अनुसार बना होना जरूरी है अन्यथा वह संकटों वाला घर ही सिद्ध होता है। आओ जानते हैं कुछ सामान्य-सी बातें कि कैसे घर में गृह स्वामी का नाश हो जाता है या उसकी आकस्मिक मृत्यु हो जाती है। हालांकि विस्तार से जानने के लिए किसी ज्योतिष और वास्तुशास्त्री से मिलना चाहिए।
 
 
1. एक दीवार से मिले हुए दो मकान यमराज के समान होते हैं, जो गृहस्वामी का नाश कर देते हैं। लाल किताब में भी इस तरह के मकान को बुरा माना गया है। इसलिए भवन के चारों ओर एवं मुख्य द्वार के सामने तथा पीछे कुछ भूमि आंगन के लिए छोड़ देना चाहिए।
 
2. भवन यदि भूखंड के उत्तर या पूर्व में है तो अनिष्टकारी होता है। गृहस्वामी की संपत्ति का नाश होता है। यदि भवन भूखंड के मध्य हो तो शुभ होता है।
 
3. यदि भवन के मध्य में भोजन कक्ष है, तो गृहस्वामी को कई तरह की समस्याओं को झेलना होता है। उसका जीवन संघर्षमय हो जाता है। मध्य में लिफ्ट या शौचालय है तो घर का नाश हो जाएगा।
 
4. पूर्व दिशा निर्माण के कारण यदि पश्चिम से भारी हो जाए तो वाहन दुर्घटनाओं का भय रहता है। दक्षिण में जलाशय होने वाले भवनों में स्त्रियों पर अत्याचार होते देखे जा सकते हैं। यहां जलाशय से गृह स्वामिनी गंभीर बीमारी से भी पीड़ित हो सकती है। 
 
5. घर की आग्नेय दिशा में वट, पीपल, सेमल, पाकर तथा गूलर का वृक्ष होने से पीड़ा और मृत्यु होती है। 
 
6. मुख्य द्वार के सामने मार्ग या वृक्ष होने से गृहस्वामी को अनेक रोग होते हैं।
webdunia
vastu tips
7. ईंट, लोहा, पत्थर, मिट्टी और लकड़ी- ये नए मकान में नए ही लगाने चाहिए। एक मकान में उपयोग की गई लकड़ी दूसरे मकान में लगाने से गृहस्वामी का नाश होता है।
 
8. सूर्य जिस नक्षत्र में स्थित होता है, उससे 3 नक्षत्र वृषभ के सिर पर स्थित होते हैं। इसमें गृहारंभ करने से गृहपति या गृह को अग्नि का भय रहता है।
 
9. 3 नक्षत्रों से अगले 4 नक्षत्रों में शून्यफल, उससे अगले 4 में स्थिरता, फिर अगले 3 में धनलाभ और उसके अगले 4 में लाभ होता है। इसके बाद अगले 3 में गृहारंभ करने से गृहपति का नाश होता है। इसके बाद के नक्षत्र भी अशुभ फलदायी होते हैं।
 
10. नींव खुदाई के समय भी भूमि पर राहु के मुख की स्थिति देखकर ही खुदाई की जाती है। यदि राहु के मुख पर खुदाई की जाए तो गृहस्वामी पर विपत्ति आती है या उसका नाश हो जाता है। यदि सिंह से 3 राशि तक सूर्य हो तो ईशान में, वृश्चिक से 3 राशि हो तो वायव्य में, कुंभ से 3 राशि तक नैऋत्य में तथा वृषभ से 3 राशि तक सूर्य हो तो आग्नेय कोण में राहु का मुख होता है।
 
11. गृहवेध को भी ध्यान रखना जरूरी है। घर से दूना द्वार हो तो दृष्टिवेध में धन का नाश और निश्चय से गृहस्वामी का मरण होता है।
 
12. कोई गृह द्वार मार्ग से वेधित हो तो गृहस्वामी की मृत्यु होती है। गली, सड़क या मार्ग द्वारा द्वार-वेध होने पर पूरे कुल का क्षय हो जाता है। 
 
13. द्वार के ऊपर जो द्वार बनता है, वह यमराज का मुख कहा जाता है। मार्ग के बीच में बने हुए जिस गृह की चौड़ाई बहुत अधिक होती है, वह वज्र के समान शीघ्र ही गृहपति के विनाश का कारण होता है।
 
14. एक घर से दूसरे घर में वेध (छायावेध) पड़ने पर गृहपति का विनाश होता है। छायावेध कई प्रकार के होते हैं। यदि 10 से 3 बजे के बीच किसी मंदिर, नकारात्मक वृक्ष, ध्वज, अन्य ऊंचा भवन, पहाड़ आदि की छाया पड़े तो इसे छायावेध कहते हैं। अत: सभी प्रकार के वेध जानकर ही गृह का निर्माण करें।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi