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वास्तु टिप्स : घर बनाने में ईशान कोण का महत्व क्या है

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पं. हेमन्त रिछारिया

भोजन,वस्त्र व आवास प्रत्येक मनुष्य की मूलभूत आवश्यकताएं हैं। इनके अभाव में संसार में मानव मात्र का जीवनयापन करना कठिन व दुष्कर हो जाता है। किन्तु कई बार ये वस्तुएं प्राप्त होते हुए भी हम इनके सुख का उपभोग नहीं कर पाते। इसके पीछे मूल कारण है हमारी जीवनशैली जो हमें पाश्चात्य जगत की ओर तो आकर्षित कर रही है किन्तु हमें हमारी मूल संस्कृति व परम्पराओं से विलग कर रही है। 
 
आज मुख्य रूप से हम भवन निर्माण में ईशान कोण के महत्त्व पर कुछ जानकारियां अपने पाठकों को देंगे। वर्तमान युग में भोजन व वस्त्र के उपरांत भवन प्रत्येक व्यक्ति का सपना होता है। आज हर व्यक्ति अपने स्वयं के मकान को प्राप्त करने के लिए अथक परिश्रम करता है किन्तु अक्सर यह देखने में आता है कि जब उसका यह स्वप्न मूर्तरूप लेता है तो वह इससे वह सुख प्राप्त नहीं कर पाता जिसकी उसने अपेक्षा की थी। ऐसे में वह गहन निराशा में घिर जाता है। इसके पीछे मुख्य कारण है वास्तु दोष। 
 
भवन निर्माण करने में वास्तु का ध्यान रखना अति-आवश्यक होता है। आज के फ़ैशनपरस्त युग में अधिकांश लोग इस तथ्य की उपेक्षा कर भवन निर्माण के पश्चात शारीरिक, मानसिक व आर्थिक क्षति उठाते हैं। वास्तु शास्त्र में अनेक बातों का ध्यान रखना आवश्यक होता है किन्तु सर्वाधिक महत्त्व ईशान कोण का होता है। 
 
ईशान कोण को ईश अर्थात् भगवान का प्रमुख क्षेत्र माना जाता है। भवन निर्माण करते समय ईशान कोण व ब्रह्म स्थान (मध्य क्षेत्र) की पवित्रता का समुचित ध्यान रखा जाना आवश्यक है ऐसा ना करने पर भवन स्वामी अनेकानेक परेशानियों से ग्रस्त हो जाता है। जनमानस में यह भ्रांति है कि ईशान कोण केवल उत्तर-पूर्व के कोने को कहा जाता है जबकि वास्तविकता में वास्तु कोणों का निर्धारण समूचे भूखण्ड को नौ खंडों में बराबर-बराबर विभक्त करने से होता है। 
 
ईशान कोण में मंदिर के अतिरिक्त कोई भी निर्माण नहीं होना चाहिए। ईशान कोण में टायलेट/बाथरूम का निर्माण सर्वथा निषिद्ध होता है। ईशान कोण में पानी का टंकी जैसे भारयुक्त निर्माण का भी निषेध है। ईशान कोण किसी भी तरह से भारयुक्त नहीं होना चाहिए। भवन का ईशान कोण व ब्रह्म स्थान जितना पवित्र व शुद्ध होगा भवन स्वामी उतना ही सुखी व समृद्धिशाली होगा। अत: भवन निर्माण करते समय वास्तु दोष व ईशान कोण के बारे में भलीभांति विचार कर ही भवन निर्माण करना श्रेयस्कर होता है।
 
-ज्योतिर्विद् पं हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केन्द्र
सम्पर्क: [email protected]

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