Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

कौन हैं निकहत जरीन? जिन्होंने जीता महिला विश्व बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक

हमें फॉलो करें webdunia
प्रथमेश व्यास
25 साल की भारत की बेटी निकहत जरीन ने वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल कर इतिहास रच दिया है। मैरीकॉम के बाद वो बॉक्सिंग में विश्व विजेता बनने वाली 5वीं भारतीय महिला बन चुकी हैं। उन्होंने तुर्की में खेली गए वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के फाइनल में थाईलैंड की बॉक्सर के बॉक्‍सर जिटपोंग जुटामस को 5-0 के स्कोर से करारी शिकस्त देकर ये मुकाम हासिल किया है।
 
उनकी इस ऐतिहासिक जीत पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा अमिताभ बच्चन, सलमान खान और अनुष्का शर्मा जैसी सेलिब्रिटीज ने भी उन्हें बधाई दी है। आइए जानते हैं निकहत ज़रीन के जीवन से जुड़ीं कुछ खास बातों के बारे में...! 
 
पारिवारिक बंदिशों से लड़कर चैंपियन बनने तक का सफर
निकहत जरीन का जन्‍म 14 जून 1996 को तेलंगाना राज्‍य के शहर निजामाबाद में हुआ था। उनका ध्यान बचपन में केवल पढ़ाई में ही लगा रहता था। प्रारंभिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई करने के लिए निकहत अपने चाचा शम्सुद्दीन के पास गईं, जिन्होंने उन्हें बॉक्सिंग के बारे में बताया। निकहत के 2 चचेरे भाई थे। चाचा शम्सुद्दीन उन्हें रोज बॉक्सिंग की ट्रेनिंग दिया करते थे। अपने भाइयों की तरह निकहत भी बॉक्सिंग सीखना चाहती थीं लेकिन उनकी मां इसके सख्त खिलाफ थी। ऐसे में निकहत को अपने पिता का समर्थन मिला और उन्होंने 13 वर्ष की आयु में बॉक्सिंग सीखना शुरू कर दिया। निकहत को अपनी पढ़ाई और बॉक्सिंग को साथ-साथ में लेकर चलना पड़ता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उनके पिता उन्हें हमेशा समर्थन देते रहे। निकहत ने निजामाबाद में अपनी स्कूली शिक्षा करने के बाद हैदराबाद से बीए की डिग्री ली।
 
जब निकहत जरीन 14 वर्ष की थीं, तब उन्होंने साल 2010 में ईरोड (तमिलनाडु) में राष्‍ट्रीय स्‍तर पर सब जूनियर मीट में स्‍वर्ण पदक जीता था। अपना पहला स्‍वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने अपना पूरा ध्‍यान बॉक्सिंग में लगा दिया। इसके बाद तुर्की में 2011 में आयोजित में एआईबीए महिला जूनियर और यूथ वर्ल्‍ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दूसरा स्‍वर्ण पदक अपने नाम किया। समय बीतता गया और वर्ष 2014 में बुल्‍गारिया में आयोजित यूथ वर्ल्‍ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप में निकहत ने सिल्‍वर मेडल जीता।
 
इसके बाद निकहत ने 2014 में ही नोवी साद (साइबेरिया) में आयोजित नेशंस कप इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में 51 किलोग्राम वर्ग में रूसी पाल्‍टसेवा एकातेरिना को हराकर पुन: स्‍वर्ण पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया। निकहत ने अपनी पदक तालिका में 1 और स्‍वर्ण पदक जोड़ा, जो कि उन्होंने वर्ष 2015 में आयोजित सीनियर वुमन नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में जीता था। यह टूर्नामेंट असम में आयोजित किया गया था।
 
निकहत के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय मैच के दौरान कंधे में चोट लगी। इसके बाद कुछ सालों तक निकहत बॉक्सिंग से दूर रहीं। 2019 में उन्होंने वापसी की और स्‍ट्रैंड्जा मेमोरियल बॉक्सिंग टूर्नामेंट में अपना शानदार प्रदर्शन करते हुए 1 और स्‍वर्ण पदक अपने नाम किया।
 
इसके बाद निखत जरीन ने बैंकॉक में आयोजित वर्ष 2021 में एशियाई मुक्‍केबाजी चैंपियनशिप में कांस्‍य पदक जीता। ये सिलसिला यूं ही चलता रहा और वर्ष 2019 के जूनियर नेशन में फिर से से गोल्‍ड मेडल जीता जिसके बाद उन्हें टूर्नामेंट में 'सर्वश्रेष्‍ठ मुक्‍केबाज' के रूप में चुना गया।
 
19 मई 2022 को तुर्की के इस्‍तांबुल शहर में आयोजित महिला विश्‍व चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन के बूते निकहत जरीन 52 किलोग्राम वर्ग में खेलते हुए थाईलैंड की जिटपोंग जुटामस को 5-0 से हराकर गोल्‍ड मेडल जीतकर वर्ल्ड चैंपियन बन गईं।
 
'जो कल ताने मारते थे, वो आज सेल्फी मांगते हैं' : निकहत जरीन
निकहत ने कहा कि हमारे देश में यह धारणा है कि महिलाएं कमजोर होती हैं और अगर वे बॉक्सिंग को अपनाती हैं तो उन्हें शादी करने में कई समस्याओं का सामना करना पड़ेगा, इसी बात ने मेरे भीतर इस खेल को अपनाने का साहस विकसित किया।
 
मुझसे ये भी कहा गया कि एक मुस्लिम महिला को पर्दे में रहना चाहिए और छोटे कपड़े कभी नहीं पहनना चाहिए। शुक्र है कि मेरे पिता ने इन टिप्पणियों पर ध्यान नहीं दिया और न ही मुझ पर इसका कोई असर होने दिया। उन्होंने सिर्फ मुझे बॉक्सिंग पर ध्यान देने और कड़ी मेहनत करने को कहा। जब मैं मेडल जीतती थी तो वही लोग वापस आकर फोटो और सेल्फी मांगते थे।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

पुत्रदा एकादशी का पूजन मुहूर्त और महत्व क्या है