rashifal-2026

21 june yoga day: जानिए जीवन बदलने वाले 5 योग सूत्र

अनिरुद्ध जोशी
योग को अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है। योग सिर्फ सेहत ही नहीं बल्कि मानसिक दृढ़ता भी देता है। दोनों ही बातों से ही जीवन में सफलता के रास्ते खुल जाते हैं। आओ जानते हैं योग के ऐसे 5 सूत्र जिन्हें अपनाने से आपका जीवन बदल सकता है।
 
 
योग के यह 8 अंग हैं- 1. यम, 2. नियम, 3. आसन, 4. प्राणायाम, 5. प्रत्याहार, 6. धारणा, 7. ध्यान, 8. समाधि। उक्त आठ अंगों के अपने-अपने उप-अंग भी हैं। वर्तमान में योग के तीन ही अंग प्रचलन में हैं- आसन, प्राणायाम और ध्यान।
ALSO READ: 21 june yoga day: जानिए जीवन बदलने वाले 5 योग सूत्र
1. सत्य : योग के यम के अंतर्गत आता है सत्य। सत्य बोलना और सत्य की राह पर चलना बहुत आसान है परंतु लोग यह करना नहीं चाहते हैं। यही एकमात्र सूत्र सबसे शक्तिशाली है। सत्य से बढ़कर कुछ भी नहीं। सत्य के साथ रहने से मन हल्का और प्रसन्न चित्त रहता है। मन के हल्का और प्रसंन्न चित्त रहने से शरीर स्वस्थ और निरोगी रहता है। सत्य की उपयोगिता और क्षमता को बहुत कम ही लोग समझ पाते हैं। सत्य बोलने से व्यक्ति को सद्गति मिलती है। गति का अर्थ सभी जानते हैं।
 
 
2. शौच : योग के नियम के अंतर्गत शौच आता है। मूलत: शौच का तात्पर्य है पाक और पवित्र हो जाओ, तो आधा संकट यूं ही कटा समझो। शौच अर्थात शुचिता, शुद्धता, शुद्धि, विशुद्धता, पवित्रता और निर्मलता। पवित्रता दो प्रकार की होती है- बाहरी और भीतरी। बाहरी या शारीरिक शुद्धता भी दो प्रकार की होती है। पहली में शरीर को बाहर से शुद्ध किया जाता है। इसमें मिट्टी, उबटन, त्रिफला, नीम आदि लगाकर निर्मल जल से स्नान करने से त्वचा एवं अंगों की शुद्धि होती है। दूसरी शरीर के अंतरिक अंगों को शुद्ध करने के लिए योग में कई उपाय बताए गए है- जैसे शंख प्रक्षालन, नेती, नौलि, धौती, गजकरणी, गणेश क्रिया, अंग संचालन आदि।
 
 
भीतरी या मानसिक शुद्धता प्राप्त करने के लिए दो तरीके हैं। पहला मन के भाव व विचारों को समझते रहने से। जैसे- काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार को त्यागने से मन की शुद्धि होती है। इससे सत्य आचरण का जन्म होता है।
 
3. आसन : योग के कई आसन है परंतु सिर्फ सूर्य नमस्कार को ही अपना कर आप सेहतमंद और फीट बने रह सकते हैं। सूर्य नमस्कार में लगभग सभी आसनों का समावेश है।
 
4. प्राणायाम : प्राणायाम भी कई प्रकार के होते हैं परंतु आपको बस अनुलोम विलोम और नाड़ी शोधन प्राणायाम ही करते रहना है। यह आपके शरीर को भीतर से सेहतमंद बनाए रखेगा।
 
 
5. प्रत्याहार : योग में प्रत्याहार की कम ही चर्चा की जाती है। वासनाओं की ओर जो इंद्रियां निरंतर गमन करती रहती हैं, उनकी इस गति को अपने अंदर ही लौटाकर आत्मा की ओर लगाना या स्थिर रखने का प्रयास करना प्रत्याहार है। अर्थात आपको अपनी पांचों इंद्रियों के पीछे नहीं भागना चाहिए। जिस प्रकार कछुआ अपने अंगों को समेट लेता है उसी प्रकार इंद्रियों को इन घातक वासनाओं से विमुख कर अपनी आंतरिकता की ओर मोड़ देने का प्रयास करना ही प्रत्याहार है। यदि आप उपरोक्त 4 कार्य नियमित रूप से करते हैं तो इस पांचवें कार्य को करने में कठिनाई नहीं होगी।
 
 
उपरोक्त 5 सूत्र को यदि अपने जीवन का अंग बनालिया तो धारणा, ध्यान और समाधि आपके लिए दूर नहीं है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

सर्दियों में सेहत और स्वाद का खजाना है मक्के की राब, पीने से मिलते हैं ये फायदे, जानें रेसिपी

सर्दियों में रोजाना पिएं ये इम्यूनिटी बूस्टर चाय, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

रूम हीटर के साथ कमरे में पानी की बाल्टी रखना क्यों है जरूरी? जानें क्या है इसके पीछे का साइंस

Winter Superfood: सर्दी का सुपरफूड: सरसों का साग और मक्के की रोटी, जानें 7 सेहत के फायदे

Kids Winter Care: सर्दी में कैसे रखें छोटे बच्चों का खयाल, जानें विंटर हेल्थ टिप्स

सभी देखें

नवीनतम

पैसे की असली कीमत

Guru Gokuldas: गुरु गोकुलदास जयंती: जीवन परिचय, 6 अनसुने तथ्य, महत्व और प्रमुख शिक्षाएं

स्वामी विवेकानंद की जयंती पर इस बार बंगाल में क्या खास है?

Typhoid In Hindi: टाइफाइड क्यों होता है, जानें कारण, लक्षण, उपचार और बचाव के उपाय

Paramahansa Yogananda: परमहंस योगानंद कौन थे?

अगला लेख