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भारत-पाक रिश्तों के लिए उथल-पुथल वाला रहा यह साल

Webdunia
सोमवार, 29 दिसंबर 2014 (16:02 IST)
इस्लामाबाद। साल 2014 में भारत-पाक के बीच सीमा पर जानलेवा संघर्षों, वार्ताएं रद्द होने और आरोप-प्रत्यारोप के चलते शांति की दिशा में कोई प्रगति नहीं हो सकी। दूसरी तरफ पाकिस्तान में अनेक आतंकवादी हमले हुए और इसी महीने पेशावर के एक सैनिक स्कूल में नरसंहार की घटना ने सभी को हिला दिया।
दोनों पक्षों के बीच सीमापार गोलीबारी की घटनाओं में दोनों तरफ से कम से कम 20 लोगों की जान चली गई। दोनों पक्षों ने संघर्ष शुरू करने के लिए एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहराया और इस तरह दोनों के बीच संबंध में दरार बढ़ गई।
 
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने जून 2013 में सत्ता संभाली, तब भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कार्यकाल 1 साल से कम समय का बचा था और इसके चलते पाकिस्तान ने शांति प्रयासों को भारत में इस साल होने वाले आम चुनावों तक टाल दिया। लोकसभा चुनाव में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने शानदार जीत हासिल की और सरकार बनाई।
 
सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सद्भावनापूर्ण कदम के तौर पर इस साल मई में अपने शपथ ग्रहण समारोह में दक्षेस देशों के नेताओं को आमंत्रित किया जिनमें शरीफ का नाम भी शामिल था। मोदी के इस कदम से कई लोगों को हैरानी हुई।
 
शरीफ नई दिल्ली में मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए और यहां दोनों की मुलाकात इस साल द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से सबसे अहम बिंदु थी, जब उन्होंने अपने अधिकारियों से शांति के लिए जमीन तैयार करने को कहा।
 
दोनों प्रधानमंत्रियों की इस मुलाकात के बाद अगस्त महीने में इस्लामाबाद में दोनों देशों के विदेश सचिवों की मुलाकात तय थी, लेकिन इस मुलाकात से ऐन पहले भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित की कश्मीरी अलगाववादी नेताओं से मुलाकात के चलते भारत ने विदेश सचिव स्तर की वार्ता को रद्द कर दिया।
 
न्यूयॉर्क में हर साल होने वाला संयुक्त राष्ट्र महासभा का सम्मेलन दोनों देशों के नेताओं को अकसर मुलाकात के लिए उचित तटस्थ स्थान उपलब्ध कराता है, लेकिन विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द होने से पैदा हुई कड़वाहट ने यहां निकट आने की उम्मीदों को कमजोर किया।
 
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण में शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र से कश्मीर मुद्दे के समाधान में भूमिका निभाने की बात कही तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने संबोधन में पाकिस्तान से आतंकवाद रोकने को कहा।
 
बातचीत फिर से शुरू होने का एक अवसर नवंबर में आया, जब मोदी और शरीफ दोनों दक्षेस शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए नेपाल गए लेकिन इस दिशा में कुछ खास हो नहीं सका और सम्मेलन के पहले दिन दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी की कमी साफ दिखाई दी।
 
बहरहाल, सम्मेलन के आखिरी दौर में दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ हाथ मिलाया और एक- दूसरे का मुस्कराते हुए अभिवादन किया जिस पर सभी की नजरें टिक गईं।
 
यह अभिवादन भी दोनों देशों के बीच बातचीत को लेकर बना गतिरोध तोड़ नहीं सका। दोनों ही देशों की तरफ से प्रतिक्रिया आई कि वे सार्थक संवाद चाहते हैं बशर्ते पहल दूसरी तरफ से हो।
 
दिसंबर की शुरुआत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकवादी घोषित और मुंबई आतंकवादी हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद तथा उसके संगठन जमात-उद-दावा को पाकिस्तान की ओर से समर्थन मिलने की निंदा की और कहा कि यह आतंकवाद को मुख्यधारा में लाने के समान है।
 
पाकिस्तान सरकार ने जमात द्वारा लाहौर में आयोजित 2 दिन के जमावड़े के लिए साजो-सामान का बंदोबस्त किया जिस पर भारत ने उक्त प्रतिक्रिया दी। पाकिस्तान ने कहा कि सईद के खिलाफ कोई मामला नहीं है और वह पाकिस्तानी नागरिक के तौर पर देश में कहीं भी आने-जाने के लिए आजाद है।
 
इसी महीने कश्मीर घाटी 4 आतंकी हमलों से दहल गई। आतंकवादी उरी में एक सैन्य शिविर में घुस गए और हमले में 1 लेफ्टिनेंट कर्नल समेत 11 सुरक्षाकर्मी मारे गए। त्राल में 2 नागरिक भी हमले का शिकार हुए। भारत ने कहा कि आतंकवादी सीमापार से आए थे लेकिन पाकिस्तान ने इस दावे को खारिज कर दिया।
 
साल के आखिर में पाकिस्तान के पेशावर में सेना के एक स्कूल पर तालिबान के हमले से दहल गया जिसमें करीब 150 लोग मारे गए। इनमें अधिकतर बेगुनाह बच्चे थे। दुनियाभर में इस हमले की तीखी निंदा हुई और सभी ओर से पीड़ितों के परिजनों के प्रति सहानुभूति संदेश आए।
 
हमले के बाद मोदी ने भी शरीफ से फोन कर बात की और घटना की निंदा करते हुए आतंकवाद से लड़ने में मदद की पेशकश की, लेकिन यह सकारात्मक माहौल 24 घंटे भी नहीं रह सका और पाकिस्तान की एक अदालत ने 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के एक प्रमुख साजिशकर्ता जकी उर रहमान लखवी को जमानत दे दी।
 
इस फैसले से भारत ही नहीं, बल्कि कई पाकिस्तानी भी स्तब्ध रह गए। उन्होंने लखवी को जमानत दिए जाने के वक्त पर हैरानी जताई। हालात को काबू में करने के लिए हरकत में आते हुए पाकिस्तान ने लखवी को लोक व्यवस्था बनाए रखने से जुड़े कानून के तहत हिरासत में रखा।
 
पाक सरकार ने सैद्धांतिक तौर पर लखवी की जमानत को उच्च न्यायालय में चुनौती देने का फैसला किया लेकिन 2 सप्ताह की सर्दी की छुट्टियों के चलते अदालतें बंद होने से सरकार ऐसा नहीं कर सकी।
 
आर्थिक मोर्चे पर भी दोनों पक्ष व्यापार को पूरी तरह सामान्य करने की दिशा में कोई प्रगति नहीं कर सके।
 
खेल के मैदान में भी संबंधों की खटास नजर आई, जब पिछले दिनों पाकिस्तान के हॉकी खिलाड़ियों ने भुवनेश्वर में चैंपियंस ट्रॉफी के सेमीफाइनल में भारत को हराने के बाद मैदान में भीड़ के सामने अभद्र प्रदर्शन किया।
 
उधर पाकिस्तान की कबड्डी टीम ने शिकायत दर्ज कराई थी कि पिछले हफ्ते 5वें कबड्डी विश्व कप के फाइनल में भारतीय टीम से उनकी हार की वजहों में मैच रैफरी का पक्षपातपूर्ण रवैया भी था। (भाषा) 
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