Hanuman Chalisa

बहुपयोगी है शीशम

Webdunia
मंगलवार, 28 अगस्त 2007 (12:14 IST)
- मणिशंकर उपाध्याय

शीशम बहुपयोगी वृक्ष है। इसकी लकड़ी, पत्तियाँ, जड़ें सभी काम में आती हैं। लकड़ियों से फर्नीचर बनता है। पत्तियाँ पशुओं के लिए प्रोटीनयुक्त चारा होती हैं। जड़ें भूमि को अधिक उपजाऊ बनाती हैं। पत्तियाँ व शाखाएँ वर्षा-जल की बूँदों को धीरे-धीरे जमीन पर गिराकर भू-जल भंडार बढ़ाती हैं।

शीशम के बीज दिसंबर-जनवरी माह में पेड़ों से प्राप्त होते हैं। एक पेड़ से एक से दो किलो बीज मिल जाते हैं। बीजों से नर्सरी में पौधे तैयार होते हैं। बीजों को दो तीन दिन पानी में भिगोने के बाद बोने से अंकुरण जल्दी होता है। इसलिए इन्हें 10 सेमी की दूरी पर कतार में 1-3 सेमी के अंतर से व 1 सेमी की गहराई में बोया जाता है। नर्सरी में बीज लगाने का उपयुक्त समय फरवरी-मार्च है। पौधों की लंबाई 10-15 सेमी होने पर इन्हें सिंचित क्षेत्र में अप्रैल-मई व असिंचित क्षेत्र में जून-जुलाई में रोपा जाता है। रोपों को प्रारंभिक दौर में पर्याप्त नमी मिलना जरूरी है।

कहाँ लगा सकते हैं
शीशम के पेड़ सड़क-रेल मार्ग के दोनों ओर, खेतों की मेड़, स्कूल व पंचायत भवन परिसर, कारखानों के मैदान तथा कॉलोनी के उद्यान में लगा सकते हैं। मालवा-निमाड़ के खंडवा-खरगोन जिलों तथा चंबल संभाग के श्योपुर क्षेत्र में इसे उगाया जा सकता है।

कैसे रोपे जाते हैं
पौधे रोपने के लिए पहले से ही 1 फीट गोलाई व 1 फुट गहरा गड्‌ढा खोदकर उसमें पौध मिश्रण भर दिया जाता है। पेड़ों के बीच कितनी दूरी रखी जाए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वहाँ की मिट्टी कैसी है व इन्हें किस स्थान पर लगाना है। हल्की मिट्टी में बढ़वार कम होती है। इसी प्रकार जहाँ सिर्फ शीशम की खेती करना हो, वहाँ ढाई से तीन मीटर की गहराई में लगाया जाता है। भारी मिट्टी वाले उपजाऊ खेतों की मेड़ पर इन्हें कम से कम पाँच मीटर की दूरी पर लगाया जाता है।

कीड़ों का उपचार जरूरी
शीशम की लकड़ी भारी, मजबूत व बादामी रंग की होती है। इसके अंतःकाष्ठ की अपेक्षा बाह्य काष्ठ का रंग हल्का बादामी या भूरा सफेद होता है। लकड़ी के इस भाग में कीड़े लगने की आशंका रहती है। इसलिए इसे नीला थोथा, जिंक क्लोराइड या अन्य कीटरक्षक रसायनों से उपचारित करना जरूरी है।

वजनी होती हैं लकड़ियाँ
शीशम के 10-12 वर्ष के पेड़ के तने की गोलाई 70-75 व 25-30 वर्ष के पेड़ के तने की गोलाई 135 सेमी तक हो जाती है। इसके एक घनफीट लकड़ी का वजन 22.5 से 24.5 किलोग्राम तक होता है। आसाम से प्राप्त लकड़ी कुछ हल्की 19-20 किलोग्राम प्रति घनफुट वजन की होती है।

Show comments

जरूर पढ़ें

Hero ने लॉन्च कीं Flex Fuel Splendor और HF Deluxe, E85 इथेनॉल पर चलेंगी ये बाइक्स, जानें कीमत और फीचर्स, कबसे होगी बिक्री

2 लाख के गद्दे बिछाकर बचाईं 8 जिंदगियां, इंसानियत की मिसाल की देशभर में चर्चा

BJP ने राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी की, कई बड़े चेहरों को मिला मौका, सतीश पूनिया राजस्थान से उम्मीदवार

बिखरे सभी बारी-बारी : शिवसेना की तरह कैसे टूटी ममता की TMC, जानिए अंदर की कहानी

'6 जून को क्या होने वाला है?' CJP के अभिजीत दीपके ने बढ़ाया सस्पेंस, दिल्ली प्लान पर अब भी कई सवाल

सभी देखें

नवीनतम

रूस से साझेदारी तोड़ने के लिए भारत पर प्रेशर बना रहा US, पुतिन का बड़ा बयान- जारी रहेगी दोस्ती

Rajya Sabha : कांग्रेस ने जारी की राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची, खरगे और पवन खेड़ा को कर्नाटक से, मध्यप्रदेश से मीनाक्षी नटराजन को उतारा

फरीदाबाद में बड़ा हादसा, जेवर फ्लाईओवर निर्माण के दौरान गिरी क्रेन, कई मजदूरों के फंसे होने की आशंका

शिक्षा में उत्कृष्टता को मिलेगा सम्मान, योगी सरकार ने शुरू की राज्य अध्यापक पुरस्कार-2025 की प्रक्रिया

PM सूर्यघर योजना में उत्तर प्रदेश ने गाड़ा झंडा, 4 राष्ट्रीय पुरस्कार जीतकर बना सौर ऊर्जा का नंबर-1 राज्य