मातृत्व की तैयारी

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माँ बनना हर औरत का सपना होता है। लेकिन माँ बनते ही बच्चे की नैपी बदलना, रातों में जागना आदि समस्याएँ भी साथ आ जाती हैं। यानी सपना और हकीकत दो अलग-अलग चीजें हैं। खासकर आज की कामकाजी महिला के लिए। इसलिए सवाल यह है कि आज के युग में एक महिला के लिए बच्चे पैदा करने का सही समय कौन सा है?

एक दो वर्ष के बच्चे की माँ का कहना है- 'सही समय का किसको मालूम है। बच्चे के जन्म से आपका जीवन किस तरह प्रभावित होगा, इन मुद्दों पर विचार किया जाता है, लेकिन कुछ भी निश्चितता से नहीं कहा जा सकता। मैं नहीं समझती कि मैं बच्चे के लिए तैयार थी, मगर हो गया। हमारी शादी को तीन बरस हो गए थे, लेकिन हम यही सोचते रहे कि अभी बच्चे के लिए समय है। लेकिन मेरे जेहन में यह भी था कि मेरी जैविक घड़ी आगे बढ़ रही है। इसलिए हमने परिवार शुरू करने का फैसला किया। हमने इस बात पर विचार किया कि क्या हम माँ-बाप बनने के लिए मानसिक रूप से तैयार हैं। यह भी सवाल था कि सबकुछ छोड़कर क्या मैं हमारे बच्चे पर अगले दो-तीन साल तक ध्यान केंद्रित कर पाऊँगी?

आज की आधुनिक नारी बच्चे की तैयारी में क्या कुछ नहीं करती। प्रेगनेंसी क्लासेज ज्वाइन करती हैं, किताबें पढ़ती हैं, डिलीवरी के बारे में सहेलियों से बातें करती हैं। लेकिन ये सब बातें कुछ खास काम नहीं आतीं। हर अनुभव अपने आप में बिलकुल अलग होता है और उससे महिला आसानी से गुजर जाती है, क्योंकि मातृत्व प्राकृतिक रूप से आता है।

कुछ महिलाओं का कहना है कि 27-28 साल की उम्र परिवार शुरू करने के लिए सबसे अच्छी है। आाज अपना करियर बनाकर महिला शादी करती है। यानी वह 25 के आसपास विवाह के बंधन में बँधती है। एक-दो साल दोनों को एक-दूसरे को समझने के लिए चाहिए। मेरे पति और मैंने तो तय किया है कि पहले हम आर्थिक रूप से मजबूत हो जाएँ, फिर मानसिक रूप से परिवार की जिम्मेदारी उठाने के लायक हो सकेंगे। एक बार जब यह हो जाएगा तो मुझे कोई चीज नहीं रोक सकेगी, क्योंकि माँ बनने से बेहतर दुनिया में कोई अनुभव नहीं है।

लेकिन दीप्ति (24), इतने लंबे समय के लिए नहीं रुकना चाहती। वह कहती है- 'मेरे पति 30 के हो गए हैं। मैं चाहती हूँ कि वे हमारे बच्चे के साथ समय बिताने का आनंद उठाएँ। हम आर्थिक दृष्टि से ठीक हैं और यह बहुत महत्वपूर्ण है। यद्यपि परिवार का हम पर कुछ दबाव है, लेकिन मैं समझती हूँ बच्चे के लिए यह सही समय है। मुझे मालूम है कि बच्चा मेरे करियर को प्रभावित करेगा। मैं वह प्रोजेक्ट नहीं ले पाऊँगी जो दूसरे ले सकते हैं। अगर बच्चे की परवरिश में मेरा परिवार भी मेरा साथ देता तो मैं अपने बच्चे के साथ समय गुजारना चाहूँगी। मैं अपने करियर में उस समय तक सफल नहीं हो पाऊँगी, जब तक बच्चा स्कूल न जाने लगे, लेकिन जब फैसला किया है तो उसकी वास्तविकता का सामना तो करना ही होगा।

इसमें कोई दो राय नहीं है कि बच्चे के आने से पति-पत्नी में संबंध मजबूत हो जाते हैं। बच्चे की परवरिश और विकास एक ऐसा अनुभव है जिसका लुत्फ दोनों साथ उठाना चाहते हैं। बच्चे का पैदा होना बहुत महत्वपूर्ण फैसला होता है। इसलिए इस संदर्भ में पति-पत्नी के बीच आम सहमति हो तो अच्छा है। बच्चे होने का सही समय यह है कि दोनों साथी उसकी आमद चाहते हों, संबंध भी ठीक हों। अगर बच्चे का आगमन खुशहाल घरों में होगा तो बाकी बातें अपने आप ही सही रास्ते पर आ जाएँगी।

उस समय गर्भवती हो जाना, जब आप तैयार न हों, बहुत ही कठिन समय को दावत दे देता है। अगर पति से लड़ाई है तो यह काम अकेले आपके वश के बाहर है। बच्चे को दोनों के जिस्मानी और मानसिक ध्यान की जरूरत होती है। इसलिए सहारे के लिए कंधे का होना जरूरी होता है।

मातृत्व का सुख सारी दुनिया की खुशियों से बढ़कर होता है। यह सुख तब और बढ़ जाता है, जब आप स्वयं स्वस्थ रहकर एक स्वस्थ शिशु के सृजन की सहभागी बनती हैं। अतः जरूरी है कि माँ बनने की जिम्मेदारी आप तभी लें, जब हर तरह से 'फिट' हों और परिस्थितियाँ आपके अनुकूल हों। कुल मिलाकर तथ्य यह है कि बच्चे होने का कोई निश्चित टाइम फ्रेम नहीं है। आप अपने हालात और क्षमताओं को ध्यान में रखकर फैसला करें। अपने आपसे यह सवाल करें- 'क्या मैं एक नए मेहमान की जिम्मेदारी उठाने को तैयार हूँ?' अगर इसका जवाब सकारात्मक मिलता है तो आपका माँ बनने का सही वक्त आ गया है।

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