घाटी में दम तोड़ रहे हैं बीमार आतंकी

Webdunia
शुक्रवार, 4 दिसंबर 2009 (18:36 IST)
जम्मू-कश्मीर में आत्मसमर्पण करने वाले एक उग्रवादी ने दावा किया है कि कश्मीर घाटी में आतंकवादियों को चिकित्सा सुविधा मिलने में बढ़ती मुश्किलों के कारण कई आतंकवादी गोलियों से घायल होकर तो कई अन्य विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त होकर दम तोड़ रहे हैं।

24 वर्षीय एक पूर्व उग्रवादी अब्दुल कय्यूम वानी ने कहा कि अधिकांश निचले स्तर के आतंकवादी विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त हो रहे हैं और जवानों की गोलियों से घायल हो रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि वानी पहले डोडा के चेनाब स्कूल में शिक्षक था लेकिन 2007 में वह हिज्बुल मुजाहिद्दीन में शामिल हो गया था।

वानी ने बताया कि अधिकांश आतंकवादियों का जीवन काल दो से तीन साल का होता है। इसी दौरान वे सुरक्षा बलों द्वारा मार गिराए जाते हैं या किसी बीमारी से संक्रमित होकर चिकित्सीय सुविधा के अभाव में दम तोड़ देते हैं।

सैन्य अधिकारियों के मुताबिक इन आतंकवादियों को उचित इलाज के लिए आत्मसमर्पण करना चाहिए।

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने कहा कि इन उग्रवादियों को आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होना चाहिए। इनका उपचार कर इन्हें स्वस्थ बनाया जाएगा ताकि वे घुट घुटकर जीने की बजाय फिर से नई जिंदगी जी सकें।

उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में चेनाब घाटी में 300 से अधिक आतंकवादी सक्रिय है और इनमें से अधिकांश हिज्बुल मुजाहिद्दीन के हैं। (भाषा)

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