आर्द्रा नक्षत्र में जैसे ही आए सूर्यदेव तो खुल कर मुस्कुराए इंद्रदेव

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आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर शनिवार को सूर्य ने आर्द्रा नक्षत्र तथा वृश्चिक लग्न में प्रवेश कर लिया है। शाम 5:18 बजे सूर्यदेव ने आर्द्रा नक्षत्र में हाथी पर सवार होकर प्रवेश किया है। इसके साथ ही वर्षा का योग प्रारंभ हो गया है। जुलाई में मंगल, बुध व शुक्र ग्रह अस्त होने व खंडग्रास चंद्रग्रहण आने से भी इस बार वर्षा का श्रेष्ठ योग बन रहा है। इस वर्ष वर्षा का योग 17 बिस्वा रहेगा। समय का वास धोबी के घर व वाहन भैंसा होने व पुष्कर नाम का मेघ रहने से इस बार वर्षा का योग श्रेष्ठ है। 
 
खुलकर बरसेंगे इंद्रदेव : जानकारों का कहना है कि जुलाई में मंगल-बुध-शुक्र के अस्त व खंडग्रास चंद्रग्रहण होने से राजस्थान, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड में समयानुकुल व कहीं-कहीं व्यापक वर्षा होगी। अगस्त में जल तत्व कर्क राशि में चार ग्रहों का योग कुछ स्थानों पर बाढ़, तूफान व बिजली से जनजीवन अस्त व्यस्त कराएगा। 
 
गुरु-शुक्र का समसप्तम योग  
 
वृश्चिक लग्न का स्वामी मंगल अष्टम भाव में वायु तत्व की राशि वृष में सूर्य व राहु के साथ त्रिग्रही योग बना रहा है। इससे यह वर्ष वायु प्रकोप व गर्मी बढ़ाने वाला रहेगा, लेकिन सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश, कुंडली में गुरु-शुक्र का समसप्तम योग होने से इस बार वर्षा श्रेष्ठ होगी। कहीं-कहीं भारी वर्षा, बाढ़ से हानि होने के योग बनेंगे। 
 
हिंदू संवत्सर 2076 का राजा शनि और मंत्री सूर्य है। ये दोनों ग्रह प्रकृति से जुड़े हैं। सूर्य जब विभिन्न नक्षत्रों में प्रवेश करता है, तब प्रकृति में आश्चर्यजनक बदलाव होता है। रोहिणी नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में सूर्य के विद्यमान होने से तेज गर्मी पड़ती है।

जैसे ही इन नक्षत्रों से होकर सूर्य आर्द्रा नक्षत्र में प्रवेश करता है, तब सूर्य की तपन कम होती है और आकाश मंडल में बादल छाने लगते हैं। बारिश होती है और धरती जलमग्न होकर आमजनों को शीतलता प्रदान करती है। खास बात यह है कि इस बार सूर्य का आर्द्रा नक्षत्र में शनिवार को प्रवेश हुआ और इससे पहले शनिवार को रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश हुआ था। 

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