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क्यों नहीं होता विवाह सिंहस्थ गुरु दोष में... पढ़ें लेख

आचार्य डॉ. संजय
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सिंह राशि में गुरु के संचरण के समय जब तक गुरुदेव सिंह राशि के नवांश में जितने समय तक रहते हैं, उतने समय तक विवाहादि संस्कार नहीं करना चाहिए।

गंगा से दक्षिण, गोदावरी से उत्तर में स्थित राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र का थोड़ा उत्तरी भाग, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश और बिहार के कुछ दक्षिणी हिस्से गंगा और गोदावरी के बीच पड़ने वाले जितने प्रदेश हैं, उन देशों में सिंह के बृहस्पति में विवाहादि कार्य त्याज्य हैं। हालांकि गंगा और गोदावरी के बीच के क्षेत्रों के अतिरिक्त अन्य देशों में सिंहस्थ गुरु का विवाहादि कार्यों में निषेध नहीं है।


 

 
यह बात ध्यान रखने योग्य है कि मघा नक्षत्र के चारों चरण और पूर्वाफाल्गुनी के प्रथम चरण में जब तक गुरुदेव रहते हैं, उसे मघादि पंचपाद कहा जाता है अर्थात 04-00-00-00 से 04-13-20-00 के भोग काल तक गुरु जितने दिन रहें, उतने समय तक सब देशों में विवाहादि कार्य त्याज्य हैं। 
 
इस वर्ष यह समय ता. 15 जुलाई 2015 को घं. 05 मि. 31 से ता. 30 सितंबर 2015 को घं. 18 मि. 12 तक गुरुदेव का संचरण मघादि पंचपाद में रहेगा। इसके अतिरिक्त शेष भाग में (04-13-20-00 से 04-29-59-59) तक अर्थात पूर्वाफाल्गुनी के तीन और उत्तराफाल्गुनी के 1 चरण- इन 4 चरणों में गंगा से गोदावरी के बीच के देशों को छोड़कर अन्य देशों में विवाहादि कार्य करने में कोई दोष नहीं है।




 

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