Dharma Sangrah

आपके बच्चे का नाम किसने रखा है, उससे तय होगा उसका भाग्य

आचार्य राजेश कुमार
बच्चे या आपके नाम से जुड़ा होता है भाग्य या दुर्भाग्य। यह तथ्य आश्चर्यजनक है कि परिवार के किसी विशेष रिश्तेदार के द्वारा रखा गया नाम संघर्षपूर्ण हो सकता है और किसी दूसरे रिश्तेदार  द्वारा रखा गया नाम सफलतादायक .... इसीलिए है ज्योतिष शास्त्र में 'नामकरण संस्कार' का इतना महत्व.... पढ़ें विस्तार से.... 
 
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाम से सिर्फ आपकी पहचान ही नहीं बल्कि आपका भाग्य और दुर्भाग्य भी जुड़ा होता है। किसी भी बच्चे का नामकरण करते समय हम नाम के कई पहलुओं पर ध्यान देते हैं जैसे नवजात शिशु के जन्म की तिथि, समय, ग्रह, नक्षत्र,  नाम के अर्थ और उच्चारण की ध्वनि को ध्यान में रखते हुए उसका नाम रखा जाता है।
 
कुछ महान व्यक्तियों के इस दुनिया से जाने के बाद भी उनके काम और नाम सदैव याद किए जाते हैं। नाम की इसी महत्ता के कारण नामकरण प्रक्रिया में यह जरुर ध्यान रखना चाहिए कि नाम किसके द्वारा रखा जा रहा है।
 
ज्यादातर आजकल माता-पिता ही अपनी पसंद से बच्चे का नाम रखते हैं, लेकिन कई बार नाना-नानी, बुआ, मामा, दादा-दादी या करीबी रिश्तेदार भी बच्चे का नाम रखते हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि इससे क्या फर्क पड़ता है, लेकिन आपका यह सोचना गलत है। जबकि नामकरण आपके बच्चे के भविष्य और उससे भाग्य पर बहुत गहरा प्रभाव डालता है। आप बच्चे की जन्मपत्री से उसके भविष्य का कितना भी हिसाब लगा लें लेकिन यह एक वजह आपके उस हिसाब में उलट-फेर कर सकता है
 
जब कोई रिश्तेदार बच्चे का नाम रखता है तो उस व्यक्ति के ग्रह बच्चे के ग्रह से जुड़ जाते हैं और उसके जीवन के कुछ प्रतिशत हिस्से का प्रभाव बच्चे के जीवन पर भी पड़ता है। अगर वह व्यक्ति किसी परेशानी या तनाव से गुजर रहा है तो उसका गहरा प्रभाव बच्चे के जीवन पर भी पड़ेगा। इतना ही नहीं, कुछ विशेष रिश्तों से जुड़े परिजन द्वारा रखा गया नाम आपके जीवन को संघर्षमय बना सकता है। 
 
जब ननिहाल या बुआ पक्ष से कोई परिजन आपका नाम रखता है, तो यह कई परेशानियां और संघर्ष लेकर आता है। इसका मुख्य कारण यह है कि बुआ का नैसर्गिक कारक ग्रह राहु होता है, इसी प्रकार मामा का नैसर्गिक भाव छठा और कारक ग्रह बुध होता है।
         
अगर इन दोनों पक्षों के ग्रह किसी कारणवश पीड़ित हों या इनके जीवन में कोई परेशानी रही, तो समझें बच्चे के लिए भी उसका जीवन संघर्षपूर्ण होगा। 
 
भविष्य की बेहतरी के लिए आवश्यक है कि बच्चे का नाम उसके माता-पिता ही रखें। ज्योतिष के अनुसार मां का भाव चतुर्थ और पिता का भाव दशम होता है।
 
माता-पिता के द्वारा दिए नाम से कुंडली के चतुर्थ और दशम भाव यानि सूर्य और चन्द्रमा संतुलित रहते हैं। अगर ऐसा संभव नहीं है तो नाम दादा पक्ष के ही किसी व्यक्ति को रखना चाहिए। इससे भविष्य में लाभ अवश्य मिलेगा।
 
नामकरण में इसका भी रखें ध्यान:-
 
नाम रखते समय अन्य कुछ बातों पर भी ध्यान दिया जाना आवश्यक है ताकि आपके बच्चे से कोई दुर्भाग्य ना जुड़े। 
         
-नाम हमेशा नवम और पंचम राशियों के आधार पर ही रखें। 
         
-कभी भी किसी देवी-देवता के नाम के आधार पर कोई नाम ना रखें। 
         
-इसके अलावा यह भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि नाम बहुत सरल होना चाहिए और इसमें कभी भी किसी आधे अक्षर का प्रयोग नहीं होना चाहिए।
   
आचार्य राजेश कुमार 
दिव्यांश ज्योतिष केंद्र  
rajpra.infocom@gmail.com
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

शनि की साढ़ेसाती का 3 राशियों पर कैसा रहेगा प्रभाव, 2 राशियों पर ढैय्या का क्या होगा असर?

Next PM after Modi:नरेंद्र मोदी के बाद पीएम कुर्सी की जंग अब सिर्फ 2 लोगों के बीच

February 2026 Festivals: फरवरी माह के प्रमुख व्रत एवं त्योहार

बृहस्पति का इस वर्ष 2026 में 3 राशियों में होगा गोचर, किस राशि को क्या मिलेगा, कौन होगा परेशान

महाशिवरात्रि का त्योहार कब मनाया जाएगा, 15 या 16 फरवरी 2026?

सभी देखें

नवीनतम

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (08 फरवरी, 2026)

08 February Birthday: आपको 8 फरवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 8 फरवरी 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

Weekly Rashifal 2026: इस सप्ताह क्या कहता है 12 राशियों का भाग्य, पढ़ें (साप्ताहिक राशिफल 09 से 15 फरवरी तक)

कुंभ राशि में सूर्य-राहु की युति: 13 फरवरी से 'ग्रहण योग', इन 4 राशियों के लिए सावधानी का समय

अगला लेख