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हरियाली अमावस्या के 10 उपाय जो कोरोना काल में घर पर कर सकते हैं, पढ़ें मंत्र भी

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Hariyali Amavasya ke 10 Upay
 
20 जुलाई 2020 को श्रावण मास की पवित्र अमावस्या है। इस दिन सोमवार होने से इस अमावस्या का महत्व बढ़ गया है। इसी दिन हरियाली अमावस्या भी है। अत: आप इन 10 सरल उपायों से मनचाहा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। 
 
आइए जानें सरल उपाय- 
 
1. सावन और अमावस्या के योग में शिवजी की पूजा-अर्चना करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है। अगर आप भी कोरोना महामारी के चलते मंदिर में शिव पूजन के लिए नहीं जा पा रहे हैं तो घबराएं नहीं घर पर ही पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिवजी का पंचामृत से अभिषेक-पूजन करें।
 
2. इस दिन चीटियों को चीनी मिला हुआ आटा खिलाना शुभ माना जाता है।
 
3. इस दिन शिवजी को खीर और मालपूए का भोग लगाने का रिवाज है। इसीलिए घर में खीर, मालपूए बनाकर उसका भोग लगाएं। अगर यह भी न हो सकें तो शिवजी को शकर का प्रसाद अवश्य चढ़ाएं।
 
4. इस समयावधि में आपके पास घर पर ही जो भी सामग्री हैं उन्हें शिवजी को अर्पित करें। जैसे शकर, पुष्प, फल, जल, कच्चा दूध चढ़ाकर भी आप इस दिन कमा लाभ उठा सकते हैं।
 
5. इस दिन गेहूं और ज्वार की धानी खाने अथवा खिलाने के साथ झुला झूलने का विशेष महत्व है।
 
6. हरियाली अमावस्या की शाम को गाय के घी का 1 दीपक लगाएं तथा बत्ती में रुई की जगह लाल रंग के धागे का इस्तेमाल करें। लाल धागे की बत्ती के साथ ही दीये में थोड़ीसी केसर डालें और इसे घर के ईशान कोण में जलाएं। 
 
7. इस दिन दक्षिणाभिमुख होकर दिवंगत पितरों के लिए पितृ तर्पण करें तथा पितृ स्तोत्र या पितृ सूक्त का पाठ करना लाभदायी सिद्ध होता है। 
 
8. इस दिन अगर हो सके तो पीपल तथा बरगद के पेड़ अवश्य लगाएं।
 
9. हरियाली अमावस्या के दिन श्रीविष्णु के मंत्र, श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ तथा अधिक से अधिक मात्रा में शिव मंत्रों का जाप करें। 
 
मंत्र- ॐ नमः शिवाय या ऊँ नमो भगवते रुद्राय का जप करें तथा बेलपत्र पर चंदन या अष्टगंध से राम-राम लिख कर शिवजी पर चढ़ाएं। 
 
10. सायंकाल के समय में घर में ही दीपक जलाकर महामृत्युंजय मंत्र, रुद्र सूक्त या नवग्रह स्तोत्र का पाठ करें। इससे पितृ दोष की शांति होकर घर में सुख-समृद्धि आती है तथा महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। 
 
हरियाली अमावस्या के दिन उपरोक्त उपायों के साथ ही निम्न मंत्रों का जाप करना लाभदायक रहेगा। 
 
तांत्रिक बीजोक्त मंत्र-
 
ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ ॥
 
संजीवनी मंत्र अर्थात्‌ संजीवनी विद्या-
 
ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूर्भवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनांन्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ।
 
महामृत्युंजय का प्रभावशाली मंत्र-
 
ॐ ह्रौं जूं सः। ॐ भूः भुवः स्वः। ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌। स्वः भुवः भूः ॐ। सः जूं ह्रौं ॐ ॥
 
महामृत्युंजय का वेदोक्त मंत्र-
 
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्‌ ॥

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