देवताओं की रात्रि प्रारंभ, क्यों नहीं होते शुभ कार्य कर्क संक्रांति में...

Webdunia
कर्क संक्रांति समय काल में सूर्य को पितरों का अधिपति माना जाता है। इस काल में षोडश कर्म और अन्य मांगलिक कर्मों के अतिरिक्त अन्य कर्म ही मान्य होते हैं। श्रावण मास में विशेष रूप से भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना की जाती है। इस माह में भगवान भोलेनाथ की पूजा करने से पुण्य फलों में वृ्द्धि होती है।
 
'सावन संक्रांति' अर्थात् 'कर्क संक्रांति' से वर्षा ऋतु का आगमन हो जाता है। देवताओं की रात्रि प्रारंभ हो जाती है और 'चातुर्मास' या 'चौमासा' का भी आरंभ इसी समय से हो जाता है। यह समय व्यवहार की दृष्टि से अत्यधिक संयम का होता है, क्योंकि इसी समय तामसिक प्रवृतियां अधिक सक्रिय होती हैं। व्यक्ति का हृदय भी गलत मार्ग की ओर अधिक अग्रसर होता है। अत: संयम का पालन करके विचारों में शुद्धता का समावेश करके ही व्यक्ति अपने जीवन को शुद्ध मार्ग पर ले जा सकने में सक्षम हो पाता है।
 
कर्क संक्रांति के पुण्य समय उचित आहार-विहार पर विशेष बल दिया जाता है। इस समय में शहद का प्रयोग विशेष तौर पर करना लाभकारी माना जाता है। दक्षिण अयन की संक्रांति में व्रत, दान कर्म एवं स्नान करने मात्र से ही प्राणी संपूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है। 
 
कर्क संक्रांति को 'दक्षिणायन' भी कहा जाता है। इस संक्रांति में व्यक्ति को सूर्य स्मरण, आदित्य स्तोत्र एवं सूर्य मंत्र इत्यादि का पाठ व पूजन करना चाहिए, जिससे अभिष्ट फलों की प्राप्ति होती है। संक्रांति में की गई सूर्य उपासना से दोषों का शमन होता है। संक्रांति में भगवान विष्णु का चिंतन-मनन शुभ फल प्रदान करता है। 
 
इस समय में नकारात्मक शक्तियां प्रभावी होती हैं और अच्छी और शुभ शक्तियां क्षीण हो जाती हैं। यही वजह है कि शुभ कार्यों को करने से बचा जाता है क्योंकि शुभ कार्यों के लिए शुभ ऊर्जा जरूरी है और इस समय जब शुभ ऊर्जा और दैवीय शक्तियां कमजोर रहती हैं तो शुभ कार्यों पर भी गलत असर होता है। 
 
श्रावण मास में प्रतिदिन 'शिवमहापुराण' व 'शिव स्तोस्त्रों' का विधिपूर्वक पाठ करके दूध, गंगाजल, बिल्वपत्र, फल इत्यादि सहित शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। इसके साथ ही इस मास में ॐ नम: शिवाय: मंत्र का जाप करते हुए शिव पूजन करना लाभकारी रहता है। इस मास के प्रत्येक मंगलवार को मंगलागौरी का व्रत, पूजन इत्यादि विधिपूर्वक करने से स्त्रियों के विवाह, संतान व सौभाग्य में वृद्धि होती है।

ALSO READ: सूर्य कर्क संक्रांति आरंभ, क्या सच में सोने चले जाएंगे सारे देवता... पढ़ें पौराणिक महत्व और 11 खास बातें

ALSO READ: सूर्य आए कर्क राशि में, जानिए क्या उलटफेर होगा आपकी राशि में ...

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

गुड़ी पड़वा से शुरू हो रही है 8 दिन की चैत्र नवरात्रि, हाथी पर सवार होकर आएंगी माता रानी, जानिए फल

चैत्र नवरात्रि पर घट स्थापना और कलश स्थापना क्यों करते हैं?

सूर्य ग्रहण वाले दिन शनि ग्रह जाने वाले हैं मीन राशि में, 6 राशियों के जीवन में होगा कुछ बड़ा बदलाव

पर्स में रखी ये चीजें इंसान को बना देती हैं कंगाल, आज ही निकाल बाहर करें

चैत्र नवरात्रि पर IRCTC का वैष्‍णोदेवी स्पेशल टूर पैकेज, जानिए कम खर्च में कैसे जा सकते हैं माता रानी के दरबार में

सभी देखें

नवीनतम

वारुणि पर्व कब है और क्यों मनाया जाता है यह त्योहार?

शनि का मीन राशि में गोचर, 12 राशियों का राशिफल, किसे होगा फायदा और किसे नुकसान

कब मनाया जाएगा श्रीराम जन्मोत्सव, जानें पूजन के मुहूर्त, विधि और महत्व

Aaj Ka Rashifal: कैसा रहेगा 12 राशियों के लिए 24 मार्च का दिन, जानें क्या कहती है ग्रहों की चाल

24 मार्च 2025 : आपका जन्मदिन

अगला लेख