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कहीं आपकी कुंडली में तो नहीं हैं 3 शनि, बचने के 5 उपाय आजमाएं

WD Feature Desk
मंगलवार, 27 मई 2025 (10:04 IST)
How to reduce Shani dosh effects: ज्योतिष में 'तीन शनि' का कुंडली में होना एक विशेष और गंभीर स्थिति मानी जाती है, जिसके कई नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं। यह आमतौर पर तब होता है जब शनि ग्रह कुंडली में कुछ विशेष भावों में बैठता है या उन पर दृष्टि डालता है, जिससे उसके प्रभाव कई गुना बढ़ जाते हैं। इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि शनि आपकी कुंडली में तीन महत्वपूर्ण स्थानों पर विराजमान है, या शनि की दृष्टि (तीसरी, सातवीं, दसवीं) एक से अधिक महत्वपूर्ण भावों पर पड़ रही है, जिससे जीवन के विभिन्न पहलुओं पर उसका प्रभाव गहरा हो जाता है।ALSO READ: शनिदेव 138 दिनों तक मीन में चलेंगे वक्री चाल, 4 राशियों को होगा बड़ा लाभ
 
कुंडली में 'तीन शनि' होने का संभावित अर्थ:
• शनि की त्रि-दृष्टि: ज्योतिष के अनुसार, शनि अपनी स्थिति के अलावा, अपने से तीसरे, सातवें और दसवें भाव पर भी दृष्टि डालता है। यदि शनि किसी ऐसे भाव में बैठा हो जहां से उसकी दृष्टियां कुंडली के अन्य महत्वपूर्ण भावों (जैसे लग्न, पंचम, नवम, दशम भाव) पर पड़ रही हों, तो इसे 'तीन शनि' का प्रभाव कहा जा सकता है, जो कई क्षेत्रों में संघर्ष और विलंब पैदा कर सकता है।
 
• शनि का तीन भावों में गोचर/उपस्थिति: यदि किसी की कुंडली में शनि तीन अलग-अलग महत्वपूर्ण भावों में स्थित हो (उदाहरण के लिए, जन्म कुंडली, नवमांश कुंडली और गोचर में शनि की स्थिति), तो इसे 'तीन शनि' का प्रभाव माना जा सकता है।
 
• शनि की अत्यधिक नकारात्मक ऊर्जा: इसका तात्पर्य यह भी हो सकता है कि शनि की ऊर्जा कुंडली में इतनी प्रबल और नकारात्मक है कि वह जीवन के तीन प्रमुख क्षेत्रों (जैसे स्वास्थ्य, करियर, संबंध) को प्रभावित कर रही है।
 
यदि आपकी कुंडली में ऐसी स्थिति है या आप शनि के अशुभ प्रभावों से परेशान हैं, तो यहां 5 अचूक उपाय दिए गए हैं जिनसे आपको राहत मिल सकती है:ALSO READ: शनि महाराज के बारे में 3 रोचक जानकारियां, शर्तिया यहां जाने से होगा शनि दोष दूर
 
1 उपाय: शनिदेव की नियमित पूजा और दान: हर शनिवार को शनि मंदिर जाएं। शनिदेव को सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल (जैसे अपराजिता या काले आक), और शमी के पत्ते अर्पित करें। शनि चालीसा, दशरथ कृत शनि स्तोत्र, या शनि मंत्र 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' का कम से कम 108 बार जाप करें। गरीबों और जरूरतमंदों को काले वस्त्र, जूते-चप्पल, कंबल, तिल, उड़द दाल, या लोहे की वस्तुएं दान करें। यह सबसे प्रभावी उपाय है। शनिदेव न्याय के देवता हैं और दान व भक्ति से प्रसन्न होते हैं। यह आपके कर्मों के नकारात्मक प्रभाव को कम करता है और शनि की पीड़ा से मुक्ति दिलाता है।

2 उपाय: छाया दान और कौवों को भोजन: शनिवार को एक कटोरी में सरसों का तेल लें, उसमें अपना चेहरा देखें और फिर उस तेल को किसी शनि मंदिर में दान कर दें या किसी जरूरतमंद को दे दें। नियमित रूप से कौवों को काले तिल मिले चावल या रोटी खिलाएं। छाया दान से शनि के अशुभ प्रभाव कम होते हैं और शारीरिक कष्टों में कमी आती है। कौवों को भोजन कराना शनिदेव को प्रसन्न करता है क्योंकि उन्हें शनि का वाहन माना जाता है।
 
3 उपाय: पीपल वृक्ष की सेवा: हर शनिवार की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। पीपल की 7 या 11 बार परिक्रमा करें। पीपल के पेड़ को जल अर्पित करें। पीपल के पेड़ में शनिदेव सहित कई देवी-देवताओं का वास माना जाता है। यह उपाय शनि के अशुभ प्रभावों को शांत करता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाता है।
 
4 उपाय: महामृत्युंजय मंत्र का जाप: प्रतिदिन महामृत्युंजय मंत्र 'ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्' का 108 बार जाप करें। यह मंत्र भगवान शिव को समर्पित है, जो शनिदेव के गुरु भी हैं। इस मंत्र के जाप से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है, गंभीर रोगों से मुक्ति मिलती है और शनि के नकारात्मक प्रभावों से भी बचाव होता है।
 
5 उपाय: हनुमान जी की उपासना: मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा करें। हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, या सुंदरकांड का पाठ करें। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें। मान्यता है कि जो भक्त हनुमान जी की पूजा करते हैं, शनिदेव उन्हें कष्ट नहीं देते। हनुमान जी की कृपा से भय, रोग और बाधाएं दूर होती हैं, और जीवन में साहस व आत्मविश्वास आता है।ALSO READ: शनिवार की रात क्यों बेकाबू हो जाती हैं महिलाएं, जानिए क्या है राज!

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