Hanuman Chalisa

Shukra Pradosh Vrat 2025: शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व और पूजा विधि

WD Feature Desk
शुक्रवार, 5 सितम्बर 2025 (14:42 IST)
2025 Shukra Pradosh puja vidhi: प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित होता है। जब यह व्रत शुक्रवार के दिन पड़ता है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहते हैं। इस व्रत को करने से जीवन में सुख-समृद्धि, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है। आज 05 सितंबर को भाद्रपद मास का शुक्र प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है।ALSO READ: Onam wishes 2025: खुशियों और समृद्धि का त्योहार ओणम, अपनों को भेजें ये 10 सबसे खास और सुंदर शुभकामनाएं
 
शुक्र प्रदोष व्रत का महत्व: शुक्र प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है, खासकर उन लोगों के लिए जो जीवन में सुख-शांति, धन और दांपत्य सुख चाहते हैं। यह व्रत धन-धान्य और ऐश्वर्य की वृद्धि के लिए बहुत फलदायी माना जाता है। शुक्र ग्रह को सौंदर्य, प्रेम और भौतिक सुख-सुविधाओं का कारक माना जाता है। इसलिए इस दिन व्रत करने से शुक्र ग्रह मजबूत होता है।

जिन लोगों के विवाह में देरी हो रही हो या वैवाहिक जीवन में समस्याएं हों, उन्हें शुक्र प्रदोष का व्रत करने से लाभ मिलता है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम और सामंजस्य बढ़ाता है। सच्चे मन से यह व्रत करने और पूजा करने से भगवान शिव और माता पार्वती सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।ALSO READ: Onam festival: ओणम के दिन क्या करते हैं, कैसे मनाते हैं यह त्योहार, पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
 
5 सितंबर 2025, शुक्रवार : शुक्र प्रदोष व्रत का समय-
भाद्रपद, शुक्ल त्रयोदशी प्रारम्भ- 05 सितंबर को 04:08 ए एम पर।
समाप्त- 06 सितंबर को 03:12 ए एम पर। 
 
त्रयोदशी प्रदोष पूजन समय- 06:50 पी एम से 09:09 पी एम।
कुल अवधि- 02 घण्टे 19 मिनट्स।
 
पूजा विधि: प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा प्रदोष काल में की जाती है। प्रदोष काल सूर्यास्त से 45 मिनट पहले शुरू होता है और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक रहता है।
1. तैयारी:
- व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और सफेद या हल्के रंग के साफ कपड़े पहनें।
- पूरे दिन उपवास रखें। अगर संभव न हो तो फलाहार ले सकते हैं।
- पूजा के लिए बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, गंगाजल, कच्चा दूध, चावल, चंदन, धूप, दीपक और मिठाई (खीर, हलवा) जैसी सामग्री एकत्रित करें।
 
2. पूजा का स्थान:
- पूजा के लिए एक साफ जगह चुनें।
- भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें।
- शिवलिंग हो तो बेहतर है।
 
3. पूजा की प्रक्रिया:
- सबसे पहले, शिवलिंग पर गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
- अब उन्हें चंदन का लेप लगाएं और बेलपत्र, धतूरा, और फूल अर्पित करें।
- भगवान को भोग लगाएं और घी का दीपक जलाएं।
- इस दौरान "ॐ नमः शिवाय" मंत्र का जाप करें।
- प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें।
- पूजा के अंत में भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।
 
4. व्रत का पारण:
- पूजा पूरी होने के बाद, आप जल ग्रहण करके व्रत का पारण कर सकते हैं।
- अगले दिन सुबह स्नान करके ही अन्न ग्रहण करें।

अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: Shradh 2025: क्या लड़कियां कर सकती हैं पितरों का तर्पण? जानिए शस्त्रों में क्या लिखा है

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

कौन था मायावी कालनेमि? योगी आदित्यनाथ के बयान के बाद क्यों छिड़ी है सनातन पर नई बहस?

Video: यमुना नदी में कालिया नाग का अवतार? सोशल मीडिया पर वायरल दावे का जानिए पूरा सच

Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

मकर राशि में बना दुर्लभ पंचग्रही योग, इन 5 राशियों की किस्मत में होगा बड़ा बदलाव

Gupt Navratri: गुप्त नवरात्रि में मां कालिका की यह साधना क्यों मानी जाती है खास? जानिए रहस्य

सभी देखें

नवीनतम

Numerology Horoscope: साप्ताहिक अंक राशिफल: 26 जनवरी से 1 फरवरी, 2026, नए अवसरों और सफलता का समय

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (24 जनवरी, 2026)

24 January Birthday: आपको 24 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 24 जनवरी 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

श्रवण नक्षत्र में बुधादित्य योग, किन 5 राशियों के लिए है फायदेमंद

अगला लेख