Hanuman Chalisa

कैसी होगी आपकी यात्रा, जानें ज्योतिष के अनुसार, पढ़ें 7 उपाय

पं. हेमन्त रिछारिया
* यात्रा को सफल बनाना है तो दिन के अनुसार करें ये उपाय

 
प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवनकाल में अनेक बार यात्राएं करनी पड़ती हैं। कभी ये यात्राएं निजी कारणों से होती हैं, तो कभी आजीविका के चलते व्यावसायिक कारणों से व्यक्ति को यात्राएं करनी पड़ती हैं। कभी-कभी आपने महसूस किया होगा कि कई बार आपके द्वारा की गई यात्राएं एकदम व्यर्थ व असफल हो गईं। ऐसी यात्रा में कार्यसिद्ध न होकर केवल आवागमन ही शेष रहा। कई यात्राओं से तो लाभ होने के स्थान पर हानि हो जाया करती है। 
 
अधिकांश व्यक्ति इसे महज एक संयोग मानकर विस्मृत कर देते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यात्राओं के सफल या असफल होने के पीछे भी कई ज्योतिषीय कारण होते हैं। इनमें से एक कारण है 'दिशाशूल', जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है दिशाशूल का अर्थ है 'दिशा के कांटे'। यहां कांटों से आशय असफलता व कष्ट से है। शास्त्रों में दिन व नक्षत्र के अनुसार यात्रा करने अथवा न करने की दिशा का निर्धारण किया गया है। इस गणना को प्रचलित भाषा में 'दिशाशूल' कहा जाता है। यदि 'दिशाशूल' वाले दिन निषेधात्मक दिशा में यात्रा की जाती है तो उसके असफल होने की संभावना सर्वाधिक होती है।

 
यहां हम 'वेबदुनिया' के पाठकों के लिए 'दिशाशूल' की संपूर्ण जानकारी दे रहे हैं जिससे पाठकों को अपने यात्रा कार्यक्रम निर्धारित करने में सहायता प्राप्त हो सके।
 
दिनवार दिशाशूल-
 
दिन : 1. रविवार- पूर्व दिशा, 2. सोमवार- आग्नेय कोण, 3. मंगलवार- उत्तर दिशा, 4. बुधवार- ईशान व नैऋत्य कोण, 5. गुरुवार- दक्षिण दिशा, 6. शुक्रवार- वायव्य कोण, 7. शनिवार- पूर्व दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।

 
नक्षत्रवार दिशाशूल-
 
नक्षत्र : ज्येष्ठा- पूर्व दिशा, पूर्वाभाद्रपद- दक्षिण दिशा, रोहिणी- पश्चिम दिशा, उत्तराफाल्गुनी- उत्तर दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए।
 
योगिनीवास अनुसार दिशाशूल-
 
उभयपक्ष तिथि : 1/9- पूर्व दिशा, 3/11- आग्नेय कोण, 5/13- दक्षिण दिशा, 4/12- नैऋत्य कोण, 6/14- पश्चिम, 7/15- वायव्य, 2/10- उत्तर, 8/30- ईशान कोण में यात्रा नहीं करनी चाहिए।

 
समाधान सूत्र-
 
उपर्युक्त 'दिशाशूल' के माध्यम से आपने जाना कि किस दिन, किस नक्षत्र व किस तिथि में कौन-सी दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। किंतु किसी बहुत ही आवश्यक कार्य के चलते यदि 'दिशाशूल' वाली दिशाओं में यात्रा करनी पड़े तब उसके समाधान के लिए भी शास्त्रों ने समाधान-सूत्र का उल्लेख करते हुए बहुत ही सरल उपायों का वर्णन किया गया है। इन उपायों को करने के उपरांत अतिआवश्यक होने पर यात्रा की जा सकती है।
 
 
दिन के अनुसार किए जाने वाले उपाय-
 
1. रविवार- दही-शकर या पान-इलायची खाकर यात्रा के लिए निकलें।
 
2. सोमवार- खीर खाकर यात्रा हेतु प्रस्थान करें।
 
3. मंगलवार- गुड़ खाकर यात्रा करें।
 
4. बुधवार- दूध पीकर यात्रा प्रारंभ करें।
 
5. गुरुवार- दही व जीरा खाकर यात्रा पर जाएं।
 
6. शुक्रवार- मीठा दूध या लस्सी पीकर यात्रा करें।
 
7. शनिवार- उड़द दाल की खिचड़ी या इमरती खाकर यात्रा हेतु प्रस्थान करें।
 
-यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व भगवान का स्मरण कर 'श्रीकृष्णं शरणम् मम:' बोलकर अपनी यात्रा प्रारंभ करें।
 
-ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
प्रारब्ध ज्योतिष परामर्श केंद्र
संपर्क : astropoint_hbd@yahoo.com 
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

Vaishakh maas 2026: वैशाख मास प्रारंभ, जानें इस विशेष माह की 10 खास बातें

अक्षय तृतीया 2026 कब है- 19 या 20 अप्रैल? तिथि को लेकर कंफ्यूजन का जानिए सही जवाब

Akshaya tritiya 2026: अक्षय तृतीया कब है?

Kharmas 2026: खरमास में करें 5 उपाय, पितरों को मिलेगी शांति

April 2026 festivals: अप्रैल माह 2026 के प्रमुख व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट

सभी देखें

नवीनतम

12 April Birthday: आपको 12 अप्रैल, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

रोग पंचक शुरू: भूलकर भी न करें ये काम, वरना बढ़ सकती हैं परेशानियां

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 12 अप्रैल 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

Weekly Horoscope April 2026: इस सप्ताह का राशिफल (13 से 19 अप्रैल): किस राशि के लिए है भाग्यशाली समय?

Bhavishya malika: भविष्य मालिका युद्ध के बारे में क्या कहती है?

अगला लेख