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यदि आप डरते हैं काल सर्प दोष से तो इसे जरूर पढ़ें

हमें फॉलो करें यदि आप डरते हैं काल सर्प दोष से तो इसे जरूर पढ़ें

अनिरुद्ध जोशी

, शनिवार, 9 दिसंबर 2017 (13:13 IST)
काल सर्प दोष होता है या नहीं यह सवाल सबसे महत्वपूर्ण है। काल सर्प दोष की शांति हेतु उज्जैन और त्रयंबकेश्वर में अनुष्ठान और पूजा पाठ किया जाता है। अधिकतर मानते हैं कि यदि यह नहीं होता तो उक्त तीर्थों में इतना बड़ा पूजा अनुष्ठान नहीं होता। आओ जानते हैं कि सच क्या है? पहले हम बताएंगे कि क्या कहता और करता है आज का ज्योतिष और इस संबंध में लाल किताब क्या कहती है।
 
शास्त्रों में क्या लिखा है?
'कालसर्प' दोष भी 'कर्तरी' दोष के समान ही है। वराहमिहिर ने अपनी संहिता 'जानक नभ संयोग' में इसका 'सर्पयोग' के नाम से उल्लेख किया है, काल सर्पदोष नहीं। वहीं, 'सारावली' में भी 'सर्पयोग' का ही वर्णन मिलता है। यहां भी काल और दोष शब्द नहीं मिलता। पुराने मूल या वैदिक ज्योतिष शास्त्रों में कालसर्प दोष का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं मिलता है।

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हालांकि आधुनिक ज्योतिष में काल सर्प दोष को पर्याप्त स्थान मिला हुआ है। फिर भी विद्वानों की राय इस बारे में एक जैसी नहीं है। आधुनिक ज्योतिष मानता है कि मूलत: सूर्य, चंद्र और गुरु के साथ राहू के होने को कालसर्प दोष बनता है। राहू का अधिदेवता 'काल' है तथा केतु का अधिदेवता 'सर्प' है। इन दोनों ग्रहों के बीच कुंडली में एक तरफ सभी ग्रह हों तो 'कालसर्प' दोष कहते हैं। राहू-केतु हमेशा वक्री चलते हैं तथा सूर्य चंद्रमार्गी। मानसागरी ग्रंथ के चौथे अध्याय के 10वें श्लोक में कहा गया है कि शनि, सूर्य व राहु लग्न में सप्तम स्थान पर होने पर सर्पदंश होता है। 

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कैसे बनता है काल सर्प दोष :  जन्म के समय ग्रहों की दशा में जब राहु-केतु आमने-सामने होते हैं और सारे ग्रह एक तरफ रहते हैं, तो उस काल को सर्प योग कहा जाता है। जब कुंडली के भावों में सारे ग्रह दाहिनी ओर इकट्ठा हों तो यह कालसर्प योग नुकसानदायक नहीं होता। जब सारे ग्रह बाईं ओर इकट्ठा रहें तो वह नुकसानदायक होता है। इस आधार पर उन्होंने काल सर्प के 12 प्रकार भी बता दिए हैं। कुछ ने तो ढाई सौ के लगभग प्रकार बताए हैं। 

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ज्योतिषियों ने काल सर्प दोष के 12 मुख्य प्रकार बताएं हैं:- 1. अनंत, 2. कुलिक, 3. वासुकि, 4. शंखपाल, 5. पद्म, 6. महापद्म, 7. तक्षक, 8. कर्कोटक, 9. शंखनाद, 10. घातक, 11. विषाक्त और 12. शेषनाग।...अब ज्योतिषियों अनुसार कुंडली में 12 तरह के कालसर्प दोष होने के साथ ही राहू की दशा, अंतरदशा में अस्त-नीच या शत्रु राशि में बैठे ग्रह मारकेश या वे ग्रह जो वक्री हों, उनके चलते भी जातक को कष्टों का सामना करना पड़ता है।
 
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काल सर्प दोष के लक्षण : आधुनिक ज्योतिष काल सर्प के लक्षण भी बताते हैं जैसे कि बाल्यकाल घटना-दुर्घटना, चोट लगना, बीमारी आदि, विद्या में रुकावट, विवाह में विलंब, वैवाहिक जीवन में तनाव, तलाक, संतान का न होना, धोखा खाना, लंबी बीमारी, आए दिन घटना-दुर्घटनाएं, रोजगार में दिक्कत, घर की महिलाओं पर संकट, गृहकलह, मांगलिक कार्यों में बाधा, गर्भपात, अकाल मृत्यु, प्रेतबाधा, दिमाग में चिड़चिड़ापन आदि।
 
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इसके ज्योतिष उपाय : उपरोक्त लक्षण बताने के बाद आधुनिक ज्योतिषियों द्वारा इसके उपाय भी बताए जाते हैं। जैसे कि सबसे उत्तम उपाय है त्र्यम्बकेश्वर में जाकर शांतिकर्म करवाना। इसके अलावा राहू तथा केतु के मंत्रों का जाप करें या करवाएं।

उज्जैन में नाग सर्प बली अनुष्ठान करवाएं। सर्प मंत्र या नाग गायत्री के जाप करें या करवाएं।  भैरव उपासना करें या श्री महामत्युंजय मंत्र का जाप करने से राहू-केतु का असर खत्म होता है। नागपंचमी को सपेरे से नाग लेकर जंगल में छुड़वाएं। पितृ शांति का उपाय करें। इस तरह के अनेक उपाय बताए जाते हैं।
 
 
काल सर्प दोष के बारे में लाल किताब क्या कहती है?
 
राहु की मार: लाल किताब अनुसार काल सर्प दोष कुछ नहीं यह राहू का दोष है। सोचीए काल सर्प दोष होता किस कारण है? दरअसल, इस योग या दोष के लिए राहु जिम्मेदार होता है। लाल किताब अनुसार राहु बद और राहु नेक होता है। यदि राहु बद है और वह किसी भी खाने में बैठा है तो उसका बुरा असर होगा। राहु की परेशानी हमेशा अचानक खड़ी होने वाली परेशानी होती है।
 
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यदि आपकी जिंगदी में अचानक से कोई परेशानी खड़ी हो गई है, मुसीबत आ गई है। ऐसी मुसीबत जिसके बारे में आप सोच भी नहीं सकते। आपकी जिंदगी में उथल-पुथल मच जाती है। राहू की परेशानी अचानक बिजली की तरह आती है और उसी तरह चली भी जाती है। मात्र एक क्षण में बिजली चमकती है और नीचे गिर जाती है। उतनी देर में जो नुकसान होना था हो गया। आप कहते हैं कि यह हमारी किस्मत का चक्कर है या कि हमारी किस्मत ही खराब है। तो यह कि राहू की परेशानी अचानक से खड़ी होने वाली परेशानी होती है जो कि भयानक पीड़ादायी होती है।
 

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किस्मत का चक्कर : राहु की सबसे बड़ी जो रुकावट बृहस्पति के लिए होती है और बृहस्पति हमारी किस्मत है। कई बार हमारी किस्मत में जो परमात्मा ने लिखकर भेजा है लेकिन उसमें राहु की रुकावट आ जाती है या राहु का ग्रहण लग जाता है। यह ग्रहण कई बार हम अपने कर्मों से लगा लेते हैं और कई दफे यह हमारे ग्रहों के फेर से भी हो जाता है।

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राहु का नकारात्क प्रभाव : काला जादू, तंत्र, टोना, आदि राहु ग्रह अपने प्रभाव से करवाता है। अचानक घटनाओं के घटने के योग राहु के कारण ही होते हैं। राहु हमारे उस ज्ञान का कारक है, जो बुद्धि के बावजूद पैदा होता है, जैसे अचानक कोई घटना देखकर कोई आइडिया आ जाना या अचानक उत्तेजित हो जाता। स्वप्न का कारक भी राहु है। भयभीत करने वाले स्वप्न आना या चमक कर उठ जाना भी राहु के बुरे प्रभाव के लक्षण माने गए हैं।

 
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यदि अचानक शरीर अकड़ने लगे या दिमाग अनावश्यक तनाव से घिर जाए और चारों तरफ अशांति ही नजर आने लगे, घबराहट जैसा होने लगे तो इन सभी का कारण भी राहु है। वैराग्य भाव या मानसिक विक्षिप्तता भी राहु के कारण ही जन्म लेते हैं। बेकार के दुश्मन पैदा होना, बेईमान या धोखेबाज बन जाना, मद्यपान करना, अति संभोग करना या सिर में चोट लग जाना यह सभी राहु के अशुभ होने की निशानी है। ऐसे व्यक्ति की तरक्की की शर्त नहीं।
 
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सकारात्मक प्रभाव : व्यक्ति दौलतमंद होगा। कल्पना शक्ति तेज होगी। राहु के अच्छा होने से व्यक्ति में श्रेष्ठ साहित्यकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक या फिर रहस्यमय विद्याओं के गुणों का विकास होता है। इसका दूसरा पक्ष यह कि इसके अच्छा होने से राजयोग भी फलित हो सकता है। आमतौर पर पुलिस या प्रशासन में इसके लोग ज्यादा होते हैं।
 
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कैसे हो जाता है राहु खराब?
राहू के खराब होने का कई कारण है उनमें से मुख्‍य तो है आपका कर्म। कर्म खराब है तो भाग्य भी खराब होगा। कर्म कई प्रकार के होते हैं। जरूरी नहीं कि आप बुरे ही कर्म कर रहे हों। हो सकता है कि आप पुण्य कर्म कर रहे हों फिर भी आपके जीवन में मुसीबत से छूटकारा नहीं मिल रहा है तो आपको देखना होगा कि आप ऐसे और कौन से कर्म कर रहे हैं जिसके चलते यह मुसीबत खड़ी होती जा रही है या बनते काम बिगड़ रहे हैं। तो आओ जानते हैं ऐसे ही कुछ कर्म।
 
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राहु इन कारणों से भी अशुभ होता है:-
*घर की जो दहलीज का दब जाना, खराब हो जाता।
*रात को नींद न आना। रात को सपने ही सपने ही आना।
*अतीत का रोना रोते रहना और भविष्य की कल्पना कर खियाली पुलाव पकाना।
*पेट के बल सोने की आदत।
*दिमाग में विचार या निर्णयों का बार-बार बदलते रहना। 
*पानी, आग और ऊंचाई से ज्यादा डरना।
*अनावश्यक आशंका, कुशंका, डर और बैचेनी का बना रहना।
*किसी पर भी विश्वास नहीं करना आदि।
*शौचालय या स्नानघर का गंदा रहना।
*सीढ़ियों का टूटा फूटा या गंदा रहना।
 
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लाल किताब के सामान्य उपाय : जो जिनको राहु की महादशा चल रही है। या राहु खाना नंबर 4, 8 या 9 में है। ऐसे लोगों के लिए कुछ खास उपाय।
*रोटी रसोई में बैठकर खाएं।
*दीवारों को साफ रखें। 
*टॉयलेट, बाथरूम की सफाई रखें।
*ससुराल से संबंध अच्छे रखें।
*पागलों को खाने को दें।
*धर्म स्थान की सीढि़यों पर 10 दिन तक पौछा लगाएं। 
*माथे पर चंदन का तिलक लगाएं।
*घर में ठोस चांदी का हाथी रख सकते हैं। 
*सरस्वती की आराधना करें। 
*लाल किताब के विशेषज्ञ से पूछकर मंगल या गुरु का उपाय करें।

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खानों के अनुसार उपाय:-
1.खाना नम्बर एक: यदि आपकी कुंडली के पहले भाव में राहु और सातवें भाव में केतु हो तो चांदी की ठोस गोली अपने पास रखें।
 
2.खाना नम्बर दो: यदि आपकी कुंडली के दूसरे भाव में राहु और आठवें में केतु हो तो दो रंग या ज्यादा रंगों वाला कम्बल दान करें।
 
 
3.खाना नम्बर तीन: यदि आपकी कुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु हो तो सोना धारण करें। बाएं हाथ की कनिष्ठा में सोने का छल्ला पहने या चने की दाल बहते पानी में बहाएँ।
 
4.खान नम्बर चार: यदि आपकी कुंडली के चौथे भाव में राहु और दसम भाव में केतु हो तो चाँदी की डिब्बी में शहद भरकर घर के बाहर जमीन में दबाए।
 
5.खान नम्बर पांच: यदि आपकी कुंडली के पांचवे भाव में राहु और ग्यारहवें भाव में केतु हो तो घर में चांदी का ठोस हाथी रखें।
 
 
6.खान नम्बर छह: यदि आपकी कुंडली के छटे भाव में राहु और बारहवें भाव में केतु हो तो बहन की सेवा करना, ताजे फुल को अपने पास रखना। कुत्ता पालना।
 
7.खाना नम्बर सात: यदि आपकी कुंडली के सातवें भाव में राहु और पहले भाव में केतु हो तो लोहे की गोली को लाल रंग से अपने पास रखना। चांदी की डिब्बी में बहते पानी का जल भरकर उसमें चांदी का एक चौकोर टुकड़ा डालकर तथा डिब्बी को बंद करके घर में रखने की सलाह दी जाती है। ध्यान रखते रहें कि डिब्बी का जल सूखे नहीं।
 
 
8.खाना नम्बर आठ: यदि आपकी कुंडली के अष्टम भाव में राहु और दूसरे भाव में केतु हो तो आठ सौ ग्राम सिक्के के आठ टुकड़े करके एक साथ बहते पानी में प्रवाहित करना अच्छा होगा।
 
9.खाना नम्बर नौ: यदि आपकी कुंडली के नवम भाव में राहु और तीसरे भाव में केतु हो तो चने की दाल पानी में प्रवाहित करें। चाँदी की ईंट बनवाकर घर में रखें।
 
10.खाना नम्बर दस: यदि आपकी कुंडली के दसम भाव में राहु और चौथे भाव में केतु हो तो पीतल के बर्तन में बहती नदी या नहर का पानी भरकर घर में रखना चाहिए। उस पर चांदी का ढक्कन हो तो अति उत्तम।
 
 
11.खाना नम्बर ग्यारह: यदि आपकी कुंडली के ग्यारहवें भाव में राहु और पांचवें भाव में केतु होने पर 400 ग्राम सिक्के के 10 टुकड़े करा कर एक साथ बहते जल में प्रवाहित करना चाहिए। इसके अलावा 43 दिनों तक गाजर या मूली लेकर सोते समय सिरहाने रखकर सुबह मंदिर आदि पर दान कर दें।
 
12.खाना नम्बर बारह: यदि आपकी कुंडली के बारहवें भाव में राहु और छटे भाव में केतु हो तो लाल रंग की बोरी के आकार की थैली बनाकर उसमें सौंफ या खांड भर कर सोने वाले कमरे में रखना चाहिए। कपड़ा चमकीला न हों। केतु के लिए सोने के जेवर पहनना उत्तम होगा।
 
 
सावधानी : उपरोक्त बताए गए उपायों को लाल किताब के किसी योग्य ज्योतिष से सलाह लेकर ही अमल में लाएं, क्योंकि कुंडली के अन्य ग्रहों का विश्लेषण भी करना होता है।

कॉपीराइट : वेबदुनिया

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