Hanuman Chalisa

क्यों बोलते हैं लोग कठोर वचन, जानें ज्योतिषीय कारण

पं. हेमन्त रिछारिया
अक्सर आपने सुना होगा कि अमुक व्यक्ति बहुत कड़वा बोलता है या अमुक व्यक्ति मुंहफट है। इसके पीछे अधिकांश उस व्यक्ति के स्वभाव को उत्तरदायी मान लिया जाता है। लेकिन कठोर सम्भाषण करने के पीछे जन्मपत्रिका के कुछ ग्रहयोग उत्तरदायी होते हैं। आईए जानते हैं उन ग्रहयोगों के बारे में जो जातक को कटु भाषी या कुतर्की बनाते हैं।
 
किसी भी जातक की वाणी कैसी होगी, यह जानने के लिए जन्मपत्रिका के द्वितीय भाव, द्वितीयेश एवं बुध-गुरू का विचार किया जाना आवश्यक है। बुध वाणी का नैसर्गिक कारक होता है वहीं गुरू द्वितीय भाव का स्थिर कारक होता है। यदि जन्मपत्रिका के द्वितीय भाव, द्वितीयेश एवं बुध-गुरू पर राहु, शनि व मंगल का प्रभाव हो तो ऐसे व्यक्ति की वाणी कठोर होती है। वह कुतर्की होता है।
 
यदि द्वितीय भाव, द्वितीयेश व बुध-गुरू पर मंगल का प्रभाव हो एवं मंगल अशुभ भावों का स्वामी हो तो यह जातक को मुंहफट अर्थात् उत्तेजनात्मक सम्भाषण करने वाला बनाता है। यदि बुध के साथ राहु की युति हो व इस युति पर गुरू की पूर्ण दृष्टि हो व द्वितीय भाव पर शुभ ग्रहों का प्रभाव हो तो ऐसा जातक अत्यंत तार्किक होता है। उसे वाद-विवाद में पराजित करना बेहद कठिन होता है। यदि द्वितीय भाव, द्वितीयेश एवं बुध-गुरू पर अधिक पाप प्रभाव हों तो जातक वाणीहीन अर्थात गूंगा हो सकता है।
ज्योतिर्विद् पं. हेमन्त रिछारिया
astropoint_hbd@yahoo.com

Show comments

ज़रूर पढ़ें

वृषभ संक्रांति 2026: सूर्य के राशि परिवर्तन से 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, मिलेगा बड़ा फायदा

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश से बदलेंगे वैश्विक हालात? जानें भविष्यफल

सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें मेष से मीन तक किसे मिलेगा लाभ, राशिफल

अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें

सभी देखें

नवीनतम

16 May Birthday: आपको 16 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 16 मई 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

Guru Pushya Yoga 2026: 21 मई 2026 को बनेगा गुरु-पुष्य योग का शुभ संयोग, जानें क्यों हैं खास

Adhika Maas 2026: 17 मई से पुरुषोत्तम मास, ज्येष्ठ अधिकमास में पुण्य लाभ कैसे पाएं और क्या टालें?

Jyeshtha Amavasya Vrat 2026: ज्येष्ठ अमावस्या व्रत और पूजा विधि

अगला लेख