Dharma Sangrah

अटल जी से जुड़ी कुछ खास यादें, बच्चों के साथ खेलते थे, सबका नाम याद रखते थे

आचार्य राजेश कुमार
देशवासियों के सभी के दिलों पर राज करने वाला हरदिल अज़ीज़ सितारा आखिर इस मतलबी दुनिया को अलविदा कह ही गया-मैं हार नहीं मानूंगा, मैं रार नही ठानूंगा को रचने वाला यह राजनेता कवि आखिर 16 अगस्त 2018 को शाम 5 बजे एम्स नई दिल्ली में काल से लड़ते-लड़ते देश के तिरंगे झंडे का सम्मान करते हुए 15 अगस्त को पार कर कर ही गया। 
 
हम बात कर रहे हैं देश के पूर्व प्रधान मंत्री भारत रत्न एवं महान कवि माननीय अटल बिहारी बाजपेयी जी की।
 
अटल जी ने भले ही मध्यप्रदेश के ग्वालियर में जन्म लिया लेकिन वह उत्तरप्रदेश के लखनऊवासियों के हर दिल में वास करते थे। लखनऊ की हर गलियां हर मोहल्ले के बाशिंदों की आंखें आज नम हो गई हैं। आज लखनऊ ही नहीं बल्कि पूरे देश का हर शख्स उन्हें याद कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दे रहा है।
 
अटल जी अच्छे वक्ता के साथ अच्छे श्रोता भी थे
 
जब वह सदन में भाषण देते थे तो सदन में उपस्थित हर पार्टी का सदस्य उन्हें बड़े ध्यान से सुनता था। अटल जी का विरोध करने का अंदाज भी आकर्षक था। उनकी बात का बुरा शायद ही कोई मानता था।
 
अटल जी असाधारण व्यक्तित्व के धनी थे
 
आज से तकरीबन 25-26 वर्ष पूर्व मैं लखनऊ के लाप्लास में एक अपने मित्र श्री शैलेन्द्र शर्मा के यहां जाया करता था। उसी के सामने अटल जी का कमर नम्बर 302-303 था। वहां मेरी पहली मुलाक़ात अटल जी से जब हुई तो वह जेब वाली बनियान व धोती पहने हुए छोटे बच्चों से खेलते मिले थे। एक बार लुका-छिपी खेलते समय एक बच्ची कहीं ऐसी जगह छिप गई  अटल जी को नहीं मिल रही थी तब उनकी नज़र हम पर पड़ी। अटल जी ने हमसे मुस्कुराते हुए कहा देखो वह कहां छिप गई है। जब तक अटल जी अपनी आंखें बंद किये थे तो वह लड़की मेरे मित्र के घर में छिप गई थी।
 
इससे यह स्पष्ट होता था की अटल जी कितने खुशमिजाज इंसान थे। 
 
उनके अंदर कभी छोटे बड़े का भेदभाव कदापि नहीं था। वह छोटों को पहले तवज्जो देते थे। अटल जी जब दिल्ली से लखनऊ आते थे तो हम उनको वीवीआईपी गेस्ट हाउस या चौक स्थित लाल जी टंडन जी के घर पर ही होने की सूचना पाते थे।
 
उनकी याददाश्त बड़ी तेज़ थी
 
उनको छोटे छोटे कर्मचारियों एवं लोगों के नाम तक याद रहते थे। अटल जी कहा करते थे की इंसान धन से नहीं मन और दिल से बड़ा होता है।
 
जैसे इस धरती पर सभी कार्यप्रणाली का हिसाब-किताब रखा जाता है,ठीक उसी प्रकार ऊपर वाले का भी अपना लेख जोखा रखने की कोई कार्य प्रणाली होगी। 
 
तभी तो इसका साक्षात प्रमाण न्यूमरोलोजी के इस उदाहरण से मिलता है
 
अटल जी का जन्म दिन 25.12.1924 है जबकि उनका अंत दिनांक 16.08.2018 है। इन दोनों तिथियों के अंकों का योग 26 अर्थात 2+6=8 आएगा।
 
जन्म दिन का योग:-25.12.1924
 
2+5+1+2+1+9+2+4=26
 
उनकी मृत्यु के दिन का योग-16.08.2018
 
1+6+8+2+1+8=26

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