अयोध्या मामला : बीजेपी को राम मंदिर आंदोलन से क्या हुआ हासिल

BBC Hindi
शनिवार, 9 नवंबर 2019 (08:31 IST)
ज़ुबैर अहमद (बीबीसी संवाददाता)
 
सुप्रीम कोर्ट में बाबरी मस्जिद-राम जन्मभूमि विवाद पर चले मुक़दमे का फ़ैसला कुछ ही घंटों में आने वाला है। अगर हिन्दू पक्ष के हक़ में फ़ैसला आया तो राम मंदिर के निर्माण का रास्ता साफ़ हो जाएगा। इस तरह भारतीय जनता पार्टी को इस बात की संतुष्टि होगी कि 1980 के दशक के आख़िरी सालों में शुरू किया गया राम मंदिर का उसका आंदोलन सफल रहा।
ALSO READ: अयोध्या विवाद पर देश की सर्वोच्च अदालत आज सुबह 10.30 बजे सुनाएगी फैसला
भाजपा का जन्म 1980 में हुआ। इसमें अधिकतर नेता जनसंघ से ही आए हुए थे। 1984 के आम चुनावों में इसे केवल 2 लोकसभा सीटें मिली थीं।
 
चुनाव से कुछ महीने पहले विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए एक मुहिम छेड़ी थी, लेकिन चुनाव पर इसका ख़ास असर नहीं हुआ। इस चुनाव में भाजपा के मायूस करने वाले प्रदर्शन की वजह थी, इंदिरा गांधी की हत्या से राजीव गांधी और कांग्रेस को मिली सहानुभूति।
 
2 बार बीजेपी सांसद रहे और अयोध्या निवासी रामविलास वेदांती ने बीबीसी को बताया कि इस आंदोलन से लोगों को पता चला कि 'राम मंदिर न बनने का कारण कांग्रेस पार्टी है।'
 
चुनाव में 400 से अधिक सीटें जीतने वाली राजीव गांधी सरकार कुछ महीने बाद ही मुसीबत में नज़र आने लगी थी। एक मुस्लिम महिला शाहबानो को अदालत ने गुज़ारा भत्ता देने का आदेश दिया, इस पर अमल रोकने के लिए राजीव गांधी सरकार ने एक नया क़ानून बना दिया जिसकी वजह से उन पर मुस्लिम तुष्टिकरण के आरोप लगे और सरकार दबाव में आ गई।
ALSO READ: Ayodhya Hearing : अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पूर्व देश का ताजा हाल
कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण की शिकायत करने वाले हिन्दुओं को ख़ुश करने एक तरीका ढूंढ निकाला। 1 फ़रवरी 1986 को फ़ैज़ाबाद के न्यायाधीश केएम पांडे ने हिन्दुओं को पूजा करने के लिए बाबरी मस्जिद के ताले को खोलने का आदेश दिया, यहां 1949 से रामलला की मूर्ति रखी थी लेकिन इससे पहले अंदर जाकर पूजा करने पर प्रतिबंध लगा था।
 
यूं तो ऐसा अदालत के ऑर्डर पर किया गया था लेकिन इसे खोलने में सरकार ने जो तेज़ी दिखाई, उससे उस समय लोगों को साफ़ लगा कि शाहबानो के मामले में हुए राजनीतिक नुक़सान की सरकार भरपाई कर रही है।
लेकिन कथित मुस्लिम तुष्टिकरण ने उस समय संघर्ष करती भारतीय जनता पार्टी और इसके सहयोगी हिन्दुत्व परिवार के दलों को बल दिया, जैसा कि बीबीसी उर्दू के वरिष्ठ पत्रकार शकील अख़्तर कहते हैं, 'शाहबानो और सलमान रुश्दी की किताब पर प्रतिबंध लगाने के राजीव गांधी सरकार के निर्णय ने भारत के लिबरल हिन्दुओं, ख़ासतौर पर उस समय की नई पीढ़ी को बुरी तरह से क्रोधित किया था।'
ALSO READ: अयोध्या पर फैसले से पहले सुरक्षा के कड़े इंतजाम, CJI को Z सुरक्षा
'हिन्दुओं में इन फ़ैसलों से सरकार से अधिक मुसलमानों से नफ़रत की भावना पैदा हुई थी, तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति के बारे में हिन्दुओं में एक स्पष्टता आई। बहुत से हिन्दुओं ने पहली बार नागरिक की तरह नहीं, बल्कि हिन्दू के तौर पर सोचना शुरू कर दिया।'
 
इसके बाद 1989 का आम चुनाव आया। कांग्रेस की उस चुनाव में भी ये कोशिश रही कि हिन्दुओं को मनाया जाए। राम मंदिर के आरएसएस-वीएचपी के इस आंदोलन को नकारने के लिए कांग्रेस सरकार ने हिन्दू समाज को रामराज्य का सपना दिखाया, ख़ुद राजीव गांधी फ़ैज़ाबाद गए और अपनी चुनावी मुहिम का आग़ाज़ रामराज्य लाने के वादे से किया। इतना ही नहीं, बाद में मंदिर की नींव रखने के लिए कराए गए शिलान्यास में इसकी अहम भूमिका रही।
 
लेकिन कांग्रेस पार्टी का हिन्दुत्व के प्रति झुकाव अस्थायी साबित हुआ। अयोध्या में 1980 के दशक से रिपोर्टिंग करने वाले वरिष्ठ पत्रकार वीएन दास कहते हैं, 'कांग्रेस ये तय नहीं कर सकी कि दोनों में से कौन-सी लाइन ली जाए। राजीव गांधी ने हिन्दुत्व का मुद्दा तो पकड़ा लेकिन आगे जाकर पता नहीं किस कारण इसे छोड़ दिया। इससे फ़ायदा बीजेपी ने उठाया।'
 
लखनऊ में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार वीरेंदर नाथ भट्ट कांग्रेस की इस अधूरे मन से की गई कोशिश पर कहते हैं, 'भारत में एक परंपरा है कि शरद पूर्णिमा की रात को लोग खीर बनाकर छत पर रखते हैं और इसे सुबह खाया जाता है। कांग्रेस ने शरद पूर्णिमा की खीर बनाई थी, लेकिन दुर्भाग्य से ये उसके हिस्से में नहीं आई। ये पूरी की पूरी बीजेपी ही चट कर गई।'
 
जिस काम को कांग्रेस ने शुरू करना चाहा उसे भाजपा ने उठाया, इसीलिए भट्ट भाजपा के उदय का श्रेय काफ़ी हद तक कांग्रेस को भी देते हैं। वो कहते हैं, 'मेरा ये स्पष्ट मानना है कि भारतीय जनता पार्टी को भारतीय राजनीति में इतनी विशाल ओपनिंग उपलब्ध कराने का सेहरा कांग्रेस पार्टी के सिर बंधता है।'
 
इस तरह 1989 में पार्टी ने अपने पालमपुर (हिमाचल प्रदेश) संकल्प में अयोध्या में राम जन्मभूमि पर मंदिर के निर्माण का वादा किया, उसी साल दिसंबर में हुए आम चुनाव में भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण की बात अपने चुनावी घोषणापत्र में पहली बार कही। नतीजा ये हुआ कि 1984 में 2 सीट जीतने वाली भाजपा ने 1989 के चुनाव में 85 सीटें जीत लीं।
शकील अख़्तर के अनुसार, ये उभरते हुए राष्ट्रवाद की शुरुआत थी। वो कहते हैं, '(लालकृष्ण) आडवाणी ने देश के बदलते हुए मूड को भांप लिया था। राम जन्मभूमि के आंदोलन ने बिखरे हुए राष्ट्रवाद को धर्म से जोड़कर इसे एक हिन्दू राष्ट्रवाद के राजनीतिक आंदोलन में बदल दिया। राम जन्मभूमि आंदोलन ने भारत में पहली बार हिन्दू राष्ट्रवाद को एक सामूहिक विवेक में तब्दील कर दिया।'
 
मंदिर मुद्दे पर पार्टी की बढ़ती हुई लोकप्रियता और इसके अध्यक्ष आडवाणी के ऊंचे होते हुए क़द से जनता दल की सरकार घबरा गई। प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने भाजपा के बढ़ते असर को कम करने के लिए 1990 में मंडल कमीशन के आरक्षण को लागू करने की घोषणा कर दी।
 
मंदिर बनाम मंडल की जंग में जीत भाजपा की हुई। आडवाणी ने सितंबर 1990 में रथयात्रा निकाली ताकि कारसेवक 20 अक्टूबर को राम मंदिर के निर्माण में हिस्सा ले सकें। रथयात्रा के दौरान मुंबई में आडवाणी ने कहा था, 'लोग कहते हैं मैं अदालत के फ़ैसले (राम मंदिर-बाबरी मस्जिद के मुक़दमे में) को नहीं मानता, क्या अदालत ये तय करेगी कि राम का जन्म कहां हुआ?'
 
पत्रकार वीरेंदर नाथ भट्ट के मुताबिक़, आडवाणी की रथयात्रा ने भारतीय मतदाता को वो सब कुछ दिया, जो उसके मन में था कि उसे नहीं मिला। 'आडवाणी की रथयात्रा ने भाजपा को एक ऐसा प्लेटफॉर्म दिया कि भाजपा के लिए ऑल इंडिया पार्टी बनने का रास्ता खुल गया।'
 
जब 1991 में संसद के लिए मध्यावधि चुनाव हुआ तो भाजपा ने 120 सीटें हासिल कीं, जो पिछले चुनाव की तुलना में 35 सीटें ज़्यादा थीं। उसी साल उत्तरप्रदेश में पार्टी पहली बार सत्ता में आई और कल्याण सिंह पार्टी के प्रदेश में पहले मुख्यमंत्री बने। लेकिन 6 दिसंबर 1992 को मस्जिद के तोड़े जाने के बाद कल्याण सिंह की सरकार तो गिरी ही, भाजपा को भी इसका काफ़ी नुक़सान हुआ। ऐसा लगने लगा कि राम मंदिर के मुद्दे से अब पार्टी को जितना सियासी लाभ होना था, हो चुका।
 
लखनऊ की वरिष्ठ पत्रकार सुनीता एरोन ने भाजपा के उदय को क़रीब से देखा है। वो कहती हैं, 'मस्जिद के गिराए जाने के बाद पार्टी का ग्राफ़ धीरे-धीरे नीचे जाने लगा। वाजपेयी के नेतृत्व में मंदिर का मुद्दा पार्टी ने थोड़ा पीछे रखा।
 
इसके दौरान पार्टी की केंद्र में सरकार बनी जिससे पार्टी का मनोबल बढ़ा और अब उसे मंदिर मुद्दे की ज़रूरत महसूस नहीं हुई। शायद इसीलिए 2004 के चुनाव में पार्टी ने 'इंडिया शाइनिंग' का नारा दिया और विकास की बात की। पार्टी चुनाव हार गई। 2009 में पार्टी ने राम मंदिर का मुद्दा सामने रखा लेकिन पूरी ताक़त से नहीं। इसके बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पार्टी ने राम मंदिर की जगह विकास को पहल दी और आज भाजपा भारत की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है।
 
सुनीता कहती हैं, 'अगर आप उनका मैनिफेस्टो देखें तो वे 2 लाइनों में निपटा देते हैं। अब उन्हें हिन्दू कार्ड या मंदिर मुद्दे की ज़रूरत नहीं थी। नरेन्द्र मोदी को देखकर लोगों को लगा ये एक बहुत अच्छा मिक्स है कि वे एक हिन्दू नेता हैं, जो विकास की बात करते हैं।'
 
सुनीता एरोन के अनुसार भाजपा के उदय में केवल मंदिर मुद्दे का हाथ नहीं है। वे कहती हैं, 'मंदिर से पार्टी को ताक़त मिली। कांग्रेस की नाकामियों ने, राजीव गांधी के बाद कांग्रेस में लीडरशिप का संकट और दूसरी विपक्षीय पार्टियों में आपसी फूट... इन सब फ़ैक्टर्स ने भाजपा के उदय में मदद की।'
 
भाजपा आज भारत की सबसे बड़ी पार्टी ज़रूर है, लेकिन आज भी विपक्ष उसके ख़िलाफ़ इल्ज़ाम लगाता है कि यह समाज को सांप्रदायिक तौर पर विभाजित करके और मंदिर मुद्दे का राजनीतिकरण करके आगे बढ़ी और सत्ता हासिल की है। पार्टी इस इल्ज़ाम को खारिज करती है। उसका कहना है कि समाज को हिन्दू-मुस्लिम के बीच नफ़रत फैलाने का असली काम कांग्रेस ने किया है। कांग्रेस ने मुसलमानों को वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया और हिन्दू समाज में जातिवाद की सियासत की।
 
अब जबकि राम मंदिर के निर्माण की संभावना बनी है तो क्या भाजपा को इसकी ज़रूरत है, ख़ासतौर से जब पार्टी की संसद में 300 से अधिक सीटें हैं और विपक्ष कमज़ोर और विभाजित है? रामविलास वेदांती कहते हैं कि 'पार्टी और मोदी के नेतृत्व में अब भारत में हिन्दू-मुस्लिम भेदभाव ख़त्म होगा और भारत 2024 तक विश्व गुरु बन जाएगा।'
 
सभी विशेषज्ञ ये मानते हैं कि राम मंदिर मुद्दे ने भारत की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया है। उनके अनुसार ये मुद्दा न केवल भारतीय जनता पार्टी के उदय का कारण बना बल्कि कांग्रेस के पतन की वजह भी।
Show comments

PM मोदी को पसंद आया खुद का डांस, एक्स पर किया कमेंट

राहुल गांधी ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को लिखा खुला पत्र, पढ़िए क्या सलाह दी

PM मोदी ने संविधान को बदलने और खत्म करने का मन बना लिया : राहुल गांधी

LG ने अरविंद केजरीवाल के खिलाफ की NIA जांच की सिफारिश, खालिस्तानी संगठन से पैसा लेने का आरोप

Lok Sabha Elections 2024: क्या वाकई 2 चरणों में कम हुई वोटिंग, SBI की Research रिपोर्ट में सामने आया सच

Realme के 2 सस्ते स्मार्टफोन, मचाने आए तहलका

AI स्मार्टफोन हुआ लॉन्च, इलेक्ट्रिक कार को कर सकेंगे कंट्रोल, जानिए क्या हैं फीचर्स

Infinix Note 40 Pro 5G : मैग्नेटिक चार्जिंग सपोर्ट वाला इंफीनिक्स का पहला Android फोन, जानिए कितनी है कीमत

27999 की कीमत में कितना फायदेमंद Motorola Edge 20 Pro 5G

Realme 12X 5G : अब तक का सबसे सस्ता 5G स्मार्टफोन भारत में हुआ लॉन्च

अगला लेख