Hanuman Chalisa

कैसा रहा यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार का एक महीना?

Webdunia
शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017 (10:29 IST)
- अंबिकानंद सहाय (वरिष्ठ पत्रकार)
 
यूपी में योगी आदित्यनाथ को गद्दीनशीं हुए अभी एक महीना ही हुआ है। इस एक महीने में तमीज़ और तहज़ीब के शहर लखनऊ के बदले माहौल का आंखों देखा हाल सुनिए-
 
परिदृश्य एक-
पुराने लखनऊ का अति व्यस्त और संकरा इलाका नादान महल रोड। मौका एक कपड़े के शो रूम के उद्घाटन का है। राज्य के क़ानून मंत्री ब्रजेश पाठक रेड रिबन काट रहे हैं। तालियां बजती हैं और मंत्री जी का शो रूम में पदार्पण होता है।
 
मंत्री जी बटुआ निकालते हैं और अपने बेटे के लिए दो टी शर्ट खरीदते हैं। दुकानदार मिन्नतें करता है कि मंत्री जी दुकान आपकी है पैसा क्यों दे रहे हैं। वहां मौजूद सैकड़ों लोग स्तब्ध हैं और हैरान हो भी क्यों ना। ये वही लखनऊ है जहां इससे पहले एक अदना सा थानेदार भी अपने इलाकों की दुकानों को अपनी जागीर समझता रहा है।
 
अब एक दूसरे मंत्री का हाव भाव देखें। कार्यभार संभालने दफ्तर पहुंचे मंत्री उपेन्द्र तिवारी, साफ सफाई के लिए ख़ुद ही झाड़ू उठाकर शुरू हो जाते हैं। आसपास खड़े अधिकारी अटेंशन मुद्रा में तिरछी आंखों से एक दूसरे को देख रहे हैं।
 
परिदृश्य दो-
हज़रतगंज के आख़िरी छोर से सटा चाइना बाज़ार गेट और इंदिरापुरम का भूतनाथ इलाका। इन इलाकों में कभी चमकदार रंग बिरंगी बाइक सवारों का हुजूम नज़र आता था। अब वो लगभग गायब हैं। इन दो इलाकों के साथ ही पत्रकार पुरम इलाके की शराब की दुकानों के इर्दगिर्द भी भीड़ नहीं दिखती।
 
ये भीड़ कभी आम लोगों की आवाजाही और रास्ते से गुजरती लड़कियां-महिलाओं के लिए परेशानी का सबब बना करती थी। लेकिन लोगों को अब राहत है क्योंकि योगी राज में पुलिस भी एक्टिव हो चली है। नवाबों के शहर लखनऊ के लिए बदनुमा दाग बन चुका 'कार-ओ-बार' कल्चर भी बीते दिनों की बात हो गई है।
 
शराब की दुकानों के आसपास प्लास्टिक के गिलास, ठंडा मिनरल वाटर और आइस क्यूब बेचने वाले का धंधा ठप हो गया है। क्योंकि बीच सड़क कार में पीने पिलाने की सांस योगी राज में उखड़ चुकी है।
 
परिदृश्य तीन-
राजधानी का सचिवालय। सेक्रेटेरिएट की गलियारों की दीवारें साफ सुथरी नज़र आने लगी है। दरअसल सचिवालय एनेक्सी में दीवारों पर पान, गुटखों की पीकों से नाराज़ योगी ने अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई।
 
नतीजा अब सचिवालय पान गुटखा और तंबाकू के बदरंग धब्बों से आज़ाद नज़र आने लगा है। सीएम योगी ने सचिवालय सहित सभी सरकारी दफ्तरों, अस्पतालों और स्कूल कॉलेजों में पान गुटखा खाने पर पाबंदी लगा दी है।
 
परिदृश्य चार-
बीजेपी के एक वरिष्ठ सांसद और दो विधायक सीएम योगी से मिलने पहुंचते हैं। वो अपने अपने इलाके में पसंदीदा अफसरों की तैनाती की वकालत करते हैं। योगी दो टूक उनसे कहते हैं- आप इन मसलों में ना पड़े। और इन मुद्दों पर चर्चा करना बंद कर दें। लगे हाथ योगी ये संदेश भी दोहरा देते हैं कि बीजेपी नेता और कार्यकर्ता सरकारी ठेकेदारी से बचें।
 
इन सबके साथ योगी आदित्यनाथ ने बूचड़ख़ानों पर पाबंदी और एंटी-रोमियो स्कॉएड के गठन जैसे फ़ैसले भी लिए हैं जिनकी काफ़ी आलोचना हो रही है। लेकिन इन फ़ैसलों के समर्थक भी कम नहीं हैं। बूचड़ख़ानों पर पाबंदी को एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल) के फ़ैसलों से जोड़कर भी कुछ लोग देख रहे हैं। वहीं एंटी-रोमियो स्कॉएड के गठन से महिलाओं के साथ छेड़ख़ानी की घटनाएं भी काफ़ी कम हो गईं हैं।
 
अब चलते हैं विरोधी खेमे की ओर यहाँ का नज़ारा अजीबो गरीब है। यूपी की सत्ता का दशकों तक केन्द्र रहा विक्रमादित्य मार्ग आज सुनसान है। इस रोड पर मुलायम-अखिलेश के आवास के अलावा समाजवादी पार्टी का दफ्तर और लोहिया संस्थान भी है। खादी-खाकी के जमावड़े के बीच सुरक्षा जांच पड़ताल और सियासी भागदौड़ अब बीते दिनों की बात हो गई है। इस मार्ग पर अब ना सियासी शोर है और ना ही रैलियों का रेला। लिहाज़ा इलाके में रहने वाले रेलवे के बड़े अधिकारी सहित उनके परिजन राहत महसूस कर रहे हैं। ऐसी ही ख़ामोशी माल एवेन्यू स्थित कांग्रेस कार्यालय और बीएसपी प्रमुख मायावती के आवास पर भी चस्पी है।
 
कालिदास मार्ग का नज़ारा अलग है। मुख्यमंत्री निवास होने की वजह से ये पहले भी गुलज़ार था और आज भी है। फर्क सिर्फ यहां आंगतुकों में दिखता है। अब यहां साधु संतों और भगवाधारी बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ अच्छी खासी तादाद में बुर्कानशीं मुस्लिम महिलाएं नज़र आती हैं। जो अपनी-अपनी फरियाद लेकर सीएम योगी के दरबार में पहुंचती हैं।
 
अब सवाल है कि योगी राज में दिख रहा ये बदलाव महज़ सतही है? क्योंकि लखनऊ के सियासी तौर तरीकों को नज़दीक से देखने समझने वाले भौंचक हैं। वर्ना यहां तो सत्तारुढ़ दल के छुटभैया नेता से लेकर आम कार्यकर्ता तक पर सत्ता का रुआब सिर चढ़कर बोलता रहा है। रातों रात इनकी रंगत बदलती देखी गई है। महंगे कपड़े, चमकदार गाड़ियों के साथ इन्हें मलाईदार सरकारी ठेकों का सरताज बनते देखा गया है। लेकिन, फिलहाल ऐसा नहीं दिखता।
 
योगी की कथनी और करनी को समझने वाले तो ये कहकर चुटकी ले रहे हैं कि, योगी राज में बीजेपी के कार्यकर्ता ही कहीं कुपोषण के शिकार ना हो जाएं। योगी राज में बदलाव की बयार हर ओर महसूस की जा रही है। मंत्री संतरी से लेकर आम सरोकारों से जुड़े मुद्दों पर भी सकारात्मक बदलाव हावी दिख रहा है। चाहे वो प्राइवेट स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर लगाम की हो। या फिर, अपनी लेट लतीफी के लिए कुख्यात सरकारी कर्मचारियों को समय पाबंद बनाने की शुरु हुई कवायद।
 
लगता है 'पूरे राज्य को बदल डालूंगा' की मुहिम में योगी सरकार जुटी है। महापुरुषों की जयंती और पुण्यतिथि पर स्कूल-कॉलेजों में होनेवाली छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं। हालांकि योगी सरकार के लोक लुभावन बदलाव के बीच कई और सवाल मौजूं हैं। मसलन क्या लखनऊ की बदलती तस्वीर 2019 आम चुनाव के पोट्रेट का हिस्सा है?
Show comments

जरूर पढ़ें

तीसरा विश्व युद्ध कराने को आमादा हैं ट्रंप, इन देशों को दी धमकी

साइबर ठगों के खिलाफ योगी सरकार ने बनाया स्पेशल प्लान, डिजिटल अरेस्ट की जागरूकता के लिए लघुफिल्म

सोमनाथ मंदिर के आयोजन में राजेंद्र प्रसाद को जाने से रोकना चाहते थे नेहरू, PM मोदी ने ब्लॉग में क्या लिखा

भागीरथपुरा त्रासदी एक तंत्र निर्मित आपदा, वेबदुनिया से बोले जलपुरुष राजेंद्र सिंह, भूजल दूषित होने से बढ़ी चुनौतियां

योगी सरकार का बड़ा फैसला, पुलिस भर्ती में आयु सीमा पर 3 साल की छूट

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

Year End Sale : Motorola G05 पर बड़ी छूट, 7,299 में दमदार फीचर्स वाला स्मार्टफोन

iPhone 18 Pro में दिखेंगे बड़े बदलाव, नया डिजाइन, दमदार A20 Pro चिप, कैमरा और बैटरी में अपग्रेड

जनवरी 2026 में स्मार्टफोन लॉन्च की भरमार, भारतीय बाजार में आएंगे कई दमदार 5G फोन

Best Budget Smartphones 2025: 15000 से कम में Poco से Lava तक दमदार स्मार्टफोन, जिन्होंने मचाया धमाल

Motorola Edge 70 Launch : पेंसिल से भी पतला 50MP सेल्फी कैमरे वाला नया स्मार्टफोन, 1000 कैशबैक का ऑफर भी

अगला लेख