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Electric scooter खरीदने से पहले जान लें कौन-सी बैटरी है सबसे बेहतर? रेंज, चार्जिंग और लाइफ में कितना फर्क और कैसे करें चेक

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electric scooter battery guide
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जब लोग नया EV खरीदने जाते हैं तो अक्सर उनकी नजर सिर्फ रेंज और कीमत पर होती है, जबकि सबसे अहम हिस्सा उसकी बैटरी होती है। बैटरी ही तय करती है कि स्कूटर कितनी दूर चलेगा, कितनी जल्दी चार्ज होगा और लंबे समय में उसका रखरखाव कितना महंगा पड़ेगा।
अगर आप नया इलेक्ट्रिक स्कूटर खरीदने की सोच रहे हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि बाजार में कौन-कौन सी बैटरियां उपलब्ध हैं और उनके फायदे-नुकसान क्या हैं।
अगर आप रोजाना शहर में सफर करते हैं और लंबी अवधि के लिए बेहतर रेंज, तेज चार्जिंग और कम रखरखाव चाहते हैं, तो लिथियम-आयन बैटरी वाला इलेक्ट्रिक स्कूटर सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। वहीं कम बजट वाले खरीदार लेड-एसिड या जेल सेल बैटरी वाले मॉडल चुन सकते हैं, लेकिन उन्हें वजन, रेंज और मेंटेनेंस से जुड़ी सीमाओं को ध्यान में रखना चाहिए। एक्सपर्ट्‍स के मुताबिक का मानना है कि आने वाले वर्षों में सॉलिड-स्टेट बैटरियां EV बाजार में बड़ा बदलाव ला सकती हैं, लेकिन फिलहाल भारतीय बाजार में लिथियम-आयन तकनीक ही सबसे भरोसेमंद और लोकप्रिय विकल्प बनी हुई है।

बैटरी देखना क्यों है जरूरी 

दो इलेक्ट्रिक स्कूटर देखने में लगभग एक जैसे लग सकते हैं, लेकिन चलाने पर उनका अनुभव बिल्कुल अलग होता है। एक स्कूटर बेहतरीन परफॉर्मेंस देता है, उसकी बैटरी लंबे समय तक चलती है और वह रोज़ाना इस्तेमाल के लिए भरोसेमंद लगता है, जबकि दूसरे को बार-बार चार्ज करना पड़ता है और वह जल्दी ही कमज़ोर पड़ने लगता है। यह अंतर पहली नज़र में शायद ही नज़र आए, लेकिन लंबे समय में मिलने वाली संतुष्टि पर इसका गहरा असर पड़ता है।
बैटरी तकनीक चुपचाप तय करती है कि आप कितनी दूरी तय करेंगे, कितनी बार रिचार्ज करेंगे और समय के साथ हर राइड कितनी भरोसेमंद लगेगी। जब खरीदार विकल्पों की तुलना करते हैं, तो कई लोग पूछते हैं कि बिना किसी अतिरिक्त असुविधा के इलेक्ट्रिक स्कूटर के लिए कौन सी बैटरी सबसे अच्छी है । लिथियम-आयन तकनीक इसका सबसे स्पष्ट जवाब देती है, जो रेंज, दक्षता और टिकाऊपन का प्रभावी संतुलन प्रदान करती है।

1. लिथियम-आयन बैटरी 

आज अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रिक स्कूटर लिथियम-आयन बैटरी के साथ आते हैं। यह बैटरी हल्की होती है, तेजी से चार्ज होती है और एक बार चार्ज करने पर ज्यादा रेंज देती है।

फायदे- 

  • ज्यादा रेंज
  • फास्ट चार्जिंग
  • कम वजन
  • कम रखरखाव
  • बेहतर परफॉर्मेंस
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यही वजह है कि भारत में बिकने वाले ज्यादातर प्रीमियम EV स्कूटर इसी तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।
 

2. लेड-एसिड बैटरी : सस्ती लेकिन भारी

लेड-एसिड बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों की सबसे पुरानी तकनीकों में से एक है। इसकी कीमत कम होती है, लेकिन यह वजन में भारी होती है और इसकी लाइफ भी अपेक्षाकृत कम होती है।
 

फायदे

  • कम कीमत
  • आसानी से उपलब्ध

कमियां

  • ज्यादा वजन
  • कम रेंज
  • अधिक रखरखाव
  • धीमी चार्जिंग
  • 3. निकेल मेटल हाइड्राइड (NiMH) बैटरी
 
यह बैटरी लेड-एसिड की तुलना में ज्यादा सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल मानी जाती है। हालांकि इलेक्ट्रिक स्कूटरों में इसका इस्तेमाल सीमित है।
 

फायदे

  • लंबी लाइफ
  • बेहतर सुरक्षा
  • पर्यावरण के लिए बेहतर
 

कमियां 

लिथियम-आयन जितनी दक्ष नहीं
कम लोकप्रिय
 

4. सॉलिड-स्टेट बैटरी: भविष्य की तकनीक

सॉलिड-स्टेट बैटरियों को EV इंडस्ट्री का भविष्य माना जा रहा है। इनमें पारंपरिक तरल इलेक्ट्रोलाइट की जगह ठोस सामग्री का उपयोग किया जाता है।
 

फायदे

  • ज्यादा सुरक्षा
  • लंबी रेंज
  • तेज चार्जिंग
  • बेहतर ऊर्जा क्षमता

कमियां

  • अभी बाजार में सीमित उपलब्धता
  • अपेक्षाकृत महंगी तकनीक
  • 5. जेल सेल बैटरी: कम रखरखाव वाला विकल्प
 
जेल सेल बैटरी लेड-एसिड तकनीक का उन्नत संस्करण है। इसमें इलेक्ट्रोलाइट जेल के रूप में होता है, जिससे रखरखाव की जरूरत कम हो जाती है।

फायदे

  • कम मेंटेनेंस
  • बेहतर स्थिरता

कमियां

  • वजन अधिक
  • रेंज सीमित
  • आखिर किस बैटरी वाला EV खरीदना चाहिए?

 EV स्कूटर/बाइक की बैटरी चेक कैसे करें?

  • वाहन के मोबाइल ऐप में Battery Health या Battery Status देखें।
  • फुल चार्ज पर मिलने वाली रेंज को नोट करें।
  • यदि पहले 100 किमी रेंज मिलती थी और अब 70-80 किमी ही मिल रही है, तो बैटरी डिग्रेड हो सकती है।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर में Battery Diagnostic Test करवाएं।

घर में कैसे करें चेक 

  •  चार्ज जल्दी खत्म होना
  • चार्जिंग में असामान्य समय लगना
  • अचानक रेंज कम होना
  • बैटरी ओवरहीट होना
  • डैशबोर्ड पर बैटरी चेतावनी आना

सेकेंड-हैंड EV खरीदते समय क्या चेक करें?

  • Battery SOH 85% से अधिक हो तो अच्छा माना जाता है।
  • बैटरी वारंटी कितनी बची है, यह देखें।
  • DC Fast Charging का अत्यधिक उपयोग हुआ है या नहीं, पूछें।
  • अधिकृत सर्विस सेंटर से बैटरी हेल्थ रिपोर्ट लें।
  • टेस्ट ड्राइव में वास्तविक रेंज जांचें  Edited by : Sudhir Sharma

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