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कैसे हुई सांता क्लॉज की प्रसिद्धि...

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सांता क्लॉज को भले ही आधुनिक बाजारवाद का प्रतीक माना जाए लेकिन इस किंवदंती की उत्पत्ति सदियों पुरानी है।

माना जाता है कि तीसरी सदी में तुर्की में जन्मे संत निकोलस का ही आधुनिक रूप है सांता क्लॉज। अपने धर्मालु और दयालु स्वभाव के कारण वे जबर्दस्त लोकप्रिय थे। उन्होंने अपनी तमाम पुश्तैनी धन-दौलत दान कर दी थी और दूर-दूर तक सफर करके वे गरीबों की मदद किया करते थे। उनकी प्रसिद्धि के साथ-साथ उनसे जुड़ी किंवदंतियां भी फैलती गईं।

बच्चों के प्रति उनके स्नेह की कथाएं विशेष रूप से प्रचलित हुईं। 6 दिसंबर को उनकी पुण्यतिथि बड़े पैमाने पर मनाई जाने लगी। माना जाता है कि सेंट (संत) निकोलस का नाम ही बिगड़कर पहले 'सिंतर क्लॉस' और फिर 'सांता क्लॉज' हो गया।

 
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योरप में खूब फैलने के बाद सांता क्लॉज की प्रसिद्धि 18वीं सदी में अमेरिका पहुंची। 1773-74 में न्यूयॉर्क में बसे हॉलैंड मूल के परिवारों ने सामूहिक रूप से सिंतर क्लॉस की पुण्यतिथि मनाई। फिर 1804 में न्यूयॉर्क हिस्टॉरिकल सोसायटी की वार्षिक सभा में उसके एक सदस्य जॉन पिंटर्ड ने संत निकोलस के लकड़ी के कटआउट बंटवाए।

इनमें संत की छवि काफी कुछ वैसी ही थी जैसी आज सांता की छवि हमारे सामने है। तब तक संत निकोलस/ सिंतर क्लॉस/ सांता क्लॉज का क्रिसमस के साथ कोई सीधा संबंध नहीं था। फिर 1822 में क्लेमेंट क्लार्क मूर ने अपनी तीन बेटियों के लिए एक लंबी कविता लिखी 'एन अकाउंट ऑफ ए विजिट फ्रॉम सेंट निकोलस।'

इसमें सेंट निकोलस को एक गोलमटोल, हंसमुख बुजुर्ग बताया गया, जो क्रिसमस की पूर्व रात्रि में रेनडियर वाली गाड़ी में उड़ते हुए आते हैं और चिमनी केरास्ते घरों में प्रवेश कर घर में टंगी जुराबों में बच्चों के लिए उपहार छोड़ जाते हैं।

यह कविता जब प्रकाशित हुई तो अमेरिका भर में सेंट निकोलस/ सांता क्लॉज लोकप्रिय हो गए। जर्मन मूल के अमेरिकी कार्टूनिस्ट थॉमस नेस्ट 1863 से प्रति वर्ष सांता की नई छवि गढ़ने लगे। 1880 के दशक तक सांता की छवि वह रूप ले चुकी थी, जिससे आज हम सब परिचित हैं।

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