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COVID-19 कैसे फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है? वायरस माइटोकॉन्ड्रिया पर करता है हमला

Webdunia
सोमवार, 31 अक्टूबर 2022 (17:53 IST)
किंगस्टन (कनाडा)। वायरस और बैक्टीरिया का इतिहास बहुत लंबा है, क्योंकि वायरस को अपनी संख्या बढ़ाने के लिए एक मेजबान की जरूरत होती है, वे लाखों वर्षों से बैक्टीरिया पर हमला कर रहे हैं। उन जीवाणुओं में से कुछ अंतत: माइटोकॉन्ड्रिया बन गए, सहक्रियात्मक रूप से यूकेरियोटिक कोशिकाओं (कोशिकाएं जिनमें गुणसूत्रयुक्त एक नाभिक होता है) के भीतर जीवन के अनुकूल हो गए। अंतत: सभी मानव कोशिकाओं के भीतर माइटोकॉन्ड्रिया पॉवर हाउस बन गए।
 
सार्स-कोव-2 जैसे नॉवल कोरोनावायरस के उदय और कोविड-19 के वैश्विक प्रसार के बाद सार्स-कोव-2 से संक्रमित लगभग 5 प्रतिशत लोग श्वसन तंत्र की विफलता (निम्न रक्त ऑक्सीजन) से पीड़ित होते हैं जिन्हें अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता होती है। कनाडा में करीब 1.1 फीसदी संक्रमित मरीजों (करीब 46,000 लोग) की मौत हो चुकी है।
 
यह कहानी है कि कैसे महामारी के दौरान जमा हुई एक टीम ने उस तंत्र को पहचाना जिसके द्वारा ये वायरस फेफड़ों को चोट पहुंचाकर रोगियों में ऑक्सीजन के स्तर को कम कर रहे थे। यह वायरस और बैक्टीरिया के बीच आदिम युद्ध के लिए एक वापसी है, विशेष रूप से नॉवेल वायरस और बैक्टीरिया की विकासवादी संतान, हमारे माइटोकॉन्ड्रिया के बीच।
 
2003 में सार्स-कोव, 2012 में मर्स-कोव के बाद सार्स-कोव-2 21वीं सदी में मानव प्रकोप का कारण बनने वाला तीसरा नॉवेल कोरोनावायरस है। अगली महामारी की तैयारी के लिए हमें बेहतर ढंग से यह समझने की आवश्यकता है कि कोरोनावायरस फेफड़ों को क्षति पहुंचाने का कारण कैसे बनते हैं?
 
कोविड-19 फेफड़ों को कैसे प्रभावित करता है? : गंभीर कोविड​​​​-19 निमोनिया वाले लोग अक्सर असामान्य रूप से कम ऑक्सीजन के स्तर के साथ अस्पताल पहुंचते हैं। वे अन्य प्रकार के निमोनिया के रोगियों से 2 तरह से अलग होते हैं- पहला, उनके निचले वायुमार्ग (एल्वियोली, जहां ऑक्सीजन को लिया जाता है) में व्यापक क्षति होती है। दूसरा, वे रक्त को फेफड़े के गैरहवादार क्षेत्रों में ले जाते हैं। इसका मतलब है कि रक्त फेफड़ों के उन हिस्सों में जा रहा है, जहां उसे पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी।
 
साथ में ये असामान्यताएं रक्त ऑक्सीजन को कम करती हैं। हालांकि इन असामान्यताओं का कारण अज्ञात था। 2020 में कनाडा के 3 विश्वविद्यालयों के 20 शोधकर्ताओं की हमारी टीम ने इस रहस्य को उजागर करने की तैयारी की। हमने प्रस्तावित किया कि सार्स-कोव-2 ने वायुमार्ग को पंक्तिबद्ध करने वाली कोशिकाओं और फुफ्फुसीय धमनी की पल्मोनरी मांसपेशियों की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया को लक्षित करके कोविड-19 निमोनिया को बदतर बना दिया।
 
हम पहले से ही जानते थे कि माइटोकॉन्ड्रिया न केवल कोशिका का पॉवर हाउस है बल्कि इसके आक्सीजन के मुख्य उपभोक्ता और सेंसर भी हैं। माइटोकॉन्ड्रिया क्रमादेशित कोशिका मृत्यु (एपोप्टोसिस कहा जाता है) की प्रक्रिया को नियंत्रित करते हैं और वे हाइपोक्सिक फुफ्फुसीय वाहिका संकीर्णन नामक तंत्र द्वारा फेफड़ों में रक्त के प्रवाह के वितरण को नियंत्रित करते हैं।
 
इस तंत्र का एक महत्वपूर्ण कार्य है। यह रक्त को निमोनिया के क्षेत्रों से दूर फेफड़ों के बेहतर हवादार लोब में निर्देशित करता है, जो ऑक्सीजन-ग्राहयता को अनुकूलित करता है। फुफ्फुसीय धमनी की चिकनी मांसपेशियों की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाकर वायरस रक्त के प्रवाह को निमोनिया के क्षेत्रों में जाने देता है, जो ऑक्सीजन के स्तर को भी कम करता है।
 
ऐसा संभव लगता कि सास-कोव-2 माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाता है जिसके परिणाम (वायुमार्ग उपकला कोशिकाओं में एपोप्टोसिस में वृद्धि और हाइपोक्सिक फुफ्फुसीय वाहिका संकीर्णन का नुकसान) फेफड़ों को क्षति और हाइपोक्सिमिया (निम्न रक्त ऑक्सीजन) से हालात बदतर हो जाते हैं।
 
'रेडॉक्स बायोलॉजी' में प्रकाशित हमारी खोज बताती है कि कैसे सार्स-कोव-2 कोरोनावायरस, जो कोविड-19 निमोनिया का कारण बनता है, रक्त ऑक्सीजन के स्तर को कम करता है। हमने दिखाया कि सार्स-कोव-2 वायुमार्ग की उपकला कोशिकाओं को उनके माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाकर मारता है। इसके परिणामस्वरूप निचले वायुमार्ग में द्रव का संचय होता है जिससे ऑक्सीजन के अवशोषण में बाधा उत्पन्न होती है।
 
हमने यह भी दिखाया कि सार्स-कोव-2 फुफ्फुसीय धमनी की चिकनी मांसपेशियों की कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया को नुकसान पहुंचाता है, जो हाइपोक्सिक फुफ्फुसीय वाहिका संकीर्णन को रोकता है और ऑक्सीजन के स्तर को कम करता है। भविष्य की महामारियों का मुकाबला करने के लिए हमारी खोज का नई दवाओं में इस्तेमाल होने की उम्मीद है।(भाषा)
 
Edited by: Ravindra Gupta

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