Publish Date: Sat, 29 Jan 2022 (11:42 IST)
Updated Date: Sat, 29 Jan 2022 (11:52 IST)
दुनियाभर में कोरोनावायरस का कहर कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच चीनी वैज्ञानिकों के NeoCoV को लेकर किए गए दावों से हड़कंप मच गया।
चीनी वैज्ञानिकों द्वारा जारी इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि एक नए वायरस- नियोकोव को दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में फैला पाया गया है। यह वायरस इतना खतरनाक है कि इससे संक्रमित होने वाले हर तीन लोगों में से एक की मौत हो सकती है।
क्या है NeoCoV वायरस का सच? : कुछ समय पहले दक्षिण अफ्रीका में चमगादड़ों में नियोकोव वायरस को पाया गया था। दावा किया जा रहा है कि इसकी बनावट उस कोरोनावायरस जैसी है, जिसने 2012 में दक्षिण एशिया में फैलने वाले संक्रमण 'मिडिल-ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम' (MERS) को जन्म दिया था।
अपनी रिसर्च में चीनी वैज्ञानिकों ने पाया कि चमगादड़ों को संक्रमित करने के लिए नियोकोव वायरस ने जिन रिसेप्टर्स (अनुग्राही कोशिकाओं) का इस्तेमाल किया, वे इंसान की उन कोशिकाओं से काफी मिलती-जुलती हैं, जिनकी मदद से सार्स-सीओवी-2 इंसानों के शरीर में फैलता है।
महाराष्ट्र के कोरोनावायरस टास्क फोर्स के सदस्य और अंतरराष्ट्रीय डायबिटीज फेडरेशन के अध्यक्ष डॉक्टर शशांक जोशी ने अपने ट्वीट के जरिए नियोकोव को लेकर फैले भ्रम को दूर करने की कोशिश की है।
उन्होंने कहा कि नियोकोव एक पुराना वायरस है, जो कि MERS की तरह ही डीपीपी4 रिसेप्टर्स के जरिए कोशिकाओं तक पहुंचता है।
इस वायरस में नया ये है कि यह चमगादड़ों के एसीई2 रिसेप्टर्स को प्रभावित कर सकता है, लेकिन जब तक इसमें नया म्यूटेशन नहीं होता, यह इंसानों के एसीई2 रिसेप्टर्स का इस्तेमाल नहीं कर सकता। बाकी सब सिर्फ बढ़ा-चढ़ाकर की गई बातें हैं।