Hanuman Chalisa

कितने हफ्तों में लगे Covishield वैक्सीन की दूसरी डोज, विशेषज्ञों ने दिया यह जवाब

Webdunia
मंगलवार, 18 मई 2021 (20:45 IST)
नई दिल्ली। भारत में कोविशील्ड की 2 खुराकों के बीच पहले 4 से 6 हफ्तों का अंतर, फिर इसे 6 से 8 या 12 हफ्ते किया गया जबकि ब्रिटेन में इस अंतराल को कम किया गया है। ऐसे में आम आदमी का भ्रमित होना लाजमी है। लेकिन कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि चिंता की कोई खास जरूरत नहीं है और पहली खुराक के 6 महीने के भीतर दूसरी खुराक प्रभावी रूप से फायदेमंद है।

ALSO READ: दिल्ली में कोरोना से जान गंवाने वाले परिवार को मिलेगा 50-50 हजार रुपए का मुआवजा, CM केजरीवाल ने किए 4 बड़े ऐलान
 
टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी परामर्श समूह (एनटीएजीआई) की अनुशंसा पर सरकार ने पिछले हफ्ते कोविड-19 रोधी टीके कोविशील्ड की 2 खुराकों के बीच अंतराल को 8 हफ्ते की पिछली सीमा से बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते कर दिया। इसके एक दिन बाद ब्रिटेन ने अपने यहां भारतीय मूल के बी.1.617 स्वरूप के प्रसार के मद्देनजर अपने यहां इस अंतराल को 12 हफ्तों से घटाकर 8 हफ्ते कर दिया था।
 
भारत में टीकों की आपूर्ति कम होने और कई राज्यों द्वारा इनकी गंभीर कमी होने की बात कहने के कारण दोनों खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाए जाने की चिंता का जवाब देते हुए प्रतिरक्षा विज्ञानी सत्यजीत रथ ने कहा कि टीके का लगाया जाना काफी लचीला है। पहली खुराक के बाद 1 बार 4 हफ्ते की अवधि पूरी होने पर 6 महीनों तक अगली खुराक कभी भी दी जा सकती है।

ALSO READ: 300 से अधिक लोगों का अंतिम संस्कार करने वाला व्यक्ति कोरोना से जंग हारा
 
वैज्ञानिकों के मुताबिक टीके की खुराक सुरक्षित हैं और इससे फर्क नहीं पड़ता कि वे कब दी गईं? अलबत्ता उनका तब ज्यादा असर नहीं होगा, अगर वे पहली खुराक लेने के 1 महीने के अंदर दी जाती हैं। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई) के रथ ने बताया कि इसलिए टीके की खुराक कोविड-19 से उबरने या पहली खुराक लेने के कम से कम 1 महीने बाद कभी भी ली जा सकती है।

ALSO READ: पीएम मोदी बोले, कोरोना से जंग में वैक्सीनेशन सशक्त माध्यम
 
उन्होंने बताया कि दूसरे टीके की खुराक पहली खुराक लेने के 6 महीने के अंदर किसी भी समय दिए जाने पर अच्छा प्रभाव देते हैं। इसलिए दूसरी खुराक या कोविड-19 से उबरने के बाद पहली खुराक 4 हफ्ते से पहले नहीं ली जानी चाहिए। रथ ने कहा कि एनटीएजीआई ये अनुशंसाएं साक्ष्यों के आधार पर कर रहा है और व्यावहारिक कदमों में मदद देने की कोशिश कर रहा है।
 
भारत द्वारा कोविशील्ड की खुराक के बीच अंतर बढ़ाए जाने के समय ही ब्रिटेन द्वारा इस अंतराल को घटाए जाने पर प्रतिरक्षा विज्ञानी विनीता बल ने कहा कि ये फैसले जमीनी हकीकत के आधार पर लिए गए हैं और इसका हां या न में कोई जवाब नहीं होता कि इससे नए स्वरूप को बेहतर तरीके से संभालने पर कोई असर होगा या नहीं? 
 
एक देश में टीके की खुराक के बीच अंतर बढ़ने से ज्यादा लोगों को टीका लग सकेगा जबकि दूसरे देश में अंतराल कम होने से टीकाकरण की गति बढ़ेगी। पुणे के भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान में अतिथि शिक्षक बल ने बताया कि यदि पर्याप्त खुराक उपलब्ध हैं तो दूसरी खुराक उपयुक्त समय पर दी जानी चाहिए, क्योंकि यह मौजूदा परिस्थितियों में सर्वोत्तम संभव प्रतिरक्षा प्रदान करेगी। 
 
उन्होंने कहा कि एक टीके से मिलने वाली प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया समय के साथ घटना शुरू हो जाएगी। हालांकि 12 से 16 हफ्तों में इसके पूरी तरह निम्नतम स्तर पर पहुंचने की संभावना नहीं है। बल ने कहा कि इसलिए दूसरी खुराक अब भी 12 से 16 हफ्तों के अंतराल पर प्राप्त की जा सकती है। (भाषा)

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

जब तक जवाबदेही तय नहीं होगी, असल समस्या हल नहीं होगी, NEET paper leak पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटी की कीमत कैसे तय होती है, खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान? कीमत के अलावा ये फैक्टर्स भी हैं बेहद जरूरी

रूस-तालिबान डिफेंस डील से उड़े पाकिस्तान के होश, भारत के लिए क्या हैं इसके कूटनीतिक मायने?

ईरान का दावा- 'बुशहर में गिराया अमेरिकी विमान', भड़का अमेरिका; क्या खटाई में पड़ेगा 60 दिनों का युद्धविराम?

राहुल गांधी ने बिछाई 2029 की बिसात: क्‍या कांग्रेस अब ‘हाईकमान मॉडल’ छोड़ क्षेत्रीय चेहरों पर लगाएगी दांव?

सभी देखें

नवीनतम

पुलिसकर्मियों के लिए गुजरात सरकार का बड़ा तोहफा: बच्चों की पढ़ाई के लिए 15 लाख का लोन, 2 से अधिक बच्चों वाले परिवारों को भी राहत!

डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकराया ईरान से शांति समझौता! सिचुएशन रूम में 2 घंटे चली बैठक बेनतीजा

45°C तापमान होगा न्यू नॉर्मल? UN की रिपोर्ट ने क्यों बढ़ाई दुनिया, खासकर भारत की टेंशन

मुंबई वालों को महंगाई का डबल झटका: 2 रुपए महंगी हुई CNG, बढ़े PNG के दाम

पेट के लिए मौसम की मार सहने पर मजबूर भारत के 'गिग वर्कर्स'

अगला लेख