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संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु को हुई थी आज के दिन फांसी, फांसी से पहले गाया था गाना

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साल 2001 की सुबह सब कुछ सामान्य था। मंत्रीगण संसद भवन में पहुंच रहे थे। तभी फर्जी कार ने संसद भवन में जैसे-तैसे करके प्रवेश कर लिया। इसके बाद मौका देखते ही आतंकवादियों ने फायरिंग शुरू कर दी थी। 13 दिसंबर 2001 में हुए आतंकी हमले में 9 लोग शहीद हुए थे। करीब 45 मिनट तक चली मुठभेड़ से पूरा देश घबरा गया था। लोकतंत्र पर हमला होना बहुत बड़ी बात थी। हमले के दो दिन बाद इस हमले का मास्टरमाइंड अफजल गुरु पकड़ा गया। साल 2013 में 9 फरवरी की सुबह में उसे फांसी दी गई।
 
- अफजल गुरु को तिहाड़ जेल के 3 नंबर में रखा था। सुबह उठने के बाद अफजल गुरु ने सबसे पहले नमाज अदा की। इसके बाद उन्‍हें करीब 7:30 बजे फांसी के लिए ले जाया गया। परीक्षण के बाद उन्‍हें 8 बजे फांसी दी गई थी।
 
- लॉ ऑफिसर सुनील गुप्ता ने अपनी किताब 'ब्लैक वॉरेंट : कन्फेशन ऑफ ए तिहाड़ जेल' में लिखा कि अफजल गुरु ने कहा था कि वे सिर्फ भ्रष्ट नेताओं की जान लेना चाहते हैं। इसके बाद उन्‍होंने फिल्म बादल का 'अपने जिए तो क्‍या जिए, तू जी ऐ दिल जमाने के लिए।
 
 
- उन्‍होंने अपनी किताब में आगे लिखा कि, फांसी वाले दिन अफजल गुरु ने आखिरी बार चाय पीने की इच्छा जताई थी। लेकिन चाय बनाने वाला चला गया था। जिससे वह चाय नहीं पी सकता था।
 
- गौरतलब है कि अफजल गुरु ने दिल्‍ली यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया था। वह बच्चों को ट्यूशन पढ़ा कर अपना खर्चा निकलता था। इसके बाद कुछ वक्त तक बैंक ऑफ अमेरिका में नौकरी भी की थी।
 
 
- कहा जाता है कि अफजल गुरु होनहार बच्चे थे। उन्‍हें सांस्कृतिक कार्यक्रमों में काफी रुचि होती थी। 1986 में अफजल मैट्रिक करने के बाद जम्मू-कश्मीर के सोपोर स्थित मुस्लिम एजुकेशन ट्रस्ट में एडमिशन ले लिया। इसके बाद से वे आपराधिक गतिविधियों शामिल हो गया था।
 
- दिल्‍ली में करीब 7 साल तक रहने के बाद अफजल 1998 में कश्‍मीर लौट गया था। अफजल की शादी भी हो गई थी। उसे एक बच्चा भी था। अफजल की पत्नी ने मीडिया को बताया था कि अफजल को संगीत में गहरी रुचि थी। वह गालिब के सबसे दीवाने थे कि उन्‍होंने अपने बेटे का नाम ही गालिब रख दिया था। संगीत में गहरी रुचि होने के साथ ही वे माइकल जैक्‍सन के गाने भी खूब सुनते थे।

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