Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

क्या ईरान के विद्रोह के पीछे है अली दश्ती की विचारधारा जिम्मेदार?

Advertiesment
हमें फॉलो करें Iran ali dashti protests 2026

WD Feature Desk

, सोमवार, 12 जनवरी 2026 (13:21 IST)
Iran ali dashti protests 2026
iran protests 2026: जब से विज्ञान ने तरक्की की है उसने धर्म के लिए चुनौती पैदा कर दी है। चाहे बिग बैंग का सिद्धांत हो, रिलेटिविटी थ्योरी हो या इवोल्यूशन थ्‍योरी। इससे धर्म के सारे मूल्यों और सिद्धांतों को ध्वस्त कर दिया है। सोशल मीडिया के दौर में अब लोग धर्म की सचाई को जानने लगे हैं। लोग अब सोचने एवं समझने लगे हैं। लोग अब कट्टरपंथी सोच को चुनौती देने लगे हैं। नास्तिकता दुनियाभर में बढ़ रही है। दुनियाभर में ये हो रहा है तो फिर ईरान क्यों अछूता रहे।
 
इस्लामिक क्रांति के पहले का ईरान: 
1. ईरान में 1979 में हुई रक्तरंजित इस्लामी क्रांति के पहले ईरान एक खुले विचारों और आधुनिक सभ्यता को मानने वाला देश था। 
2. उस समय ईरान में पहलवी राजवंश का शासन था और मोहम्मद रजा शाह पहलवी वहां के राजा (शाह) थे। 
3. उस दौर को अक्सर "पश्चिमीकरण" और "आधुनिकीकरण" के युग के रूप में याद किया जाता है। तेहरान जैसे शहरों को "मध्य पूर्व का पेरिस" कहा जाता था।
4. महिलाएं बिना हिजाब के घूम सकती थीं। वे पश्चिमी पहनावे (जैसे मिनी स्कर्ट, जींस) पहनती थीं। शाह ने 1963 में महिलाओं को मताधिकार (Right to Vote) भी दिया था।
5. शिक्षा प्रणाली आधुनिक थी और धर्म से अलग यानी आधुनिक साइंस पर आधारित थी। 
6. सिनेमा, संगीत और कला के क्षेत्र में ईरान काफी उन्नत था और वहां के क्लबों और होटलों में आधुनिक जीवनशैली देखने को मिलती थी।
7. शाह ने 1963 में 'व्हाइट रिवॉल्यूशन' शुरू किया था, जिसका उद्देश्य भूमि सुधार, साक्षरता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करना था।
8. 1970 के दशक में तेल की बढ़ती कीमतों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था बहुत तेजी से बढ़ी। बुनियादी ढांचे (सड़कें, अस्पताल, उद्योग) का विकास हुआ।
 
क्यों हुई इस्लामिक क्रांति?
1. शाह के शासन में जीने की आजादी थी लेकिन शाह के खिलाफ बोलने की आजादी नहीं थी। 
2. शाह की एक खुफिया पुलिस 'सावाक' थी, जो विरोधियों का बेरहमी से दमन करने के लिए बदनाम थी।
3. राजनीतिक कैदियों को जेल में डाला जाता था और प्रताड़ित किया जाता था।
4. ईरान अमेरिका का सबसे करीबी सहयोगी था, जिसे धार्मिक कट्टरपंथी "इस्लाम विरोधी" मानते थे।
5. शाह के परिवार और करीबियों पर भ्रष्टाचार के आरोप थे।
6. कट्टरपंथी और मौलवी शाह के पश्चिमीकरण को इस्लाम के खिलाफ मानते थे।
7. लोग राजनीतिक आजादी चाहते थे, जो शाह के शासन में मुमकिन नहीं थी।
8. 1951 में लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्दिक को शाह ने अमेरिका की सहायता से हटा दिया था।
 
इस्लामिक क्रांति के बाद क्या हुआ? 
1. 1979 की क्रांति के बाद से ही ईरान में सामाजिक मुद्दों से निपटने के लिए 'मोरैलिटी पुलिस' का गठन किया गया। 
2. इसके बाद 'गश्त-ए-इरशाद' का गठन साल 2006 में हुआ था।
3. ये संगठन 'इस्लामी आचार संहिता के उल्लंघन' पर किसी को फटकार लगा सकता है, सार्वजनिक तौर पर किसी को गिरफ़्तार कर सकता है। 
4. दोनों ही संगठनों की जिम्मेदारी रही है कि वे इस्लामिक कानून और नियमों का सख्‍ती से पालन कराए और जो इसका उल्लंघन करता है उसे इस्लामिक कानून के तहत सजा दें।
5. ईरान में 1979 में हुई रक्तरंजित इस्लामी क्रांति के नेता रहे अयातोल्ला ख़ोमैनी को ऐसा परमज्ञानी धर्माधिकारी माना जाता है जो किसी भी तरह के फैसले ले सकता है। 
6. उनके वर्तमान उत्तराधिकारी अयातोल्ला ख़मेनेई को भी यही सम्मान दिया जाता है। 
7. इस्लामिक क्रांति के बाद लोगों को राजनीतिक आजादी तो मिली लेकिन वे अपनी निजी स्वतंत्रता खो बैठे। इस्लाम के नाम पर सत्ताधारियों ने उन पर कई तरह की पाबंदियां लगाना प्रारंभ कर दी।
8. ईरान में 'मोरैलिटी पुलिस' कई स्वरूपों में मौजूद रही है। इनके अधिकार क्षेत्र में महिलाओं के हिजाब से लेकर पुरुषों और औरतों के आपस में घुलने-मिलने का मुद्दा भी शामिल रहा है। 'गश्त-ए-इरशाद' का गठन साल 2006 में हुआ था। ये न्यायपालिका और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स से जुड़े पैरामिलिट्री फोर्स 'बासिज' के साथ मिलकर काम करता है।
9. खास बात ये भी है कि ईरान में हिजाब को बढ़ावा देने के लिए केवल 'गश्त-ए-इरशाद' ही काम नहीं कर रहा है, बल्कि सरकार के 26 अन्य विभाग भी इसे लागू करने के लिए ज़िम्मेदार हैं।
 
क्यों हो रहा है ईरान में कट्टरंपथी इस्लामिक शासन का विरोध?
1. इस्लामिक कट्टरपंथ जब ज्यादा बढ़ने लगा और 'मोरैलिटी पुलिस' झूठे आरोप लगाकर लोगों को प्रताड़ित करने लगी तो लोगों ने इसके खिलाफ आवाज उठान प्रारंभ कर दी। खासरक महिलाओं के हिजाब को लेकर गुस्सा चरम पर था। 
2. इस्लामिक कट्‍टरपंथ और शरिया कानून से त्रस्त लोगों ने नए विकल्प पर सोचना प्रारंभ किया।
3. महिलाओं ने हिजाब के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया। 
4. 22 वर्षीया कुर्त लड़की महसा आमिनी और 15 साल की एक शिया लड़की अतेफेह रजाबी दरअसल आतेफा साहलेह की मौत ने ईरान में आग लगा दी। 
5. तेहरान की मोरलिटी पुलिस का कहना है कि ईरान में 'सार्वजनिक जगहों पर बाल ढँकने और ढीले कपड़े पहनने' के नियम को सख़्ती से लागू करने के सिलसिले में कुछ महिलाएँ हिरासत में ली गई थीं। महसा भी उनमें थीं।
6. कई कट्टरपंथी लोगों का मानना यह भी है कि ईरान में जो विद्रोह हो रहा है उसमें अमेरिका के साथ ही अली दश्ती की विचारधारा भी जिम्मेदार है।
7. कई लोग ईरान में फिर से शाह राजवंश के शासन का समर्थन करने लगे हैं।
 
कौन है अली दश्ती (1894–1982)?
1. 70 के दशक के अंत में ईरान में इस्लामिक क्रांति के बाद, अयातुल्ला खोमैनी की सरकार ने कई बुद्धिजीवियों, वामपंथियों और धर्मनिरपेक्ष विचारकों को निशाना बनाया था।
2. इस्लामिक क्रांति के दौरान में अली दश्ती (Ali Dashti) एक ईरानी लेखक, राजनीतिज्ञ और पत्रकार थे। वे पहले एक धार्मिक विद्वान थे, लेकिन बाद में वे तर्कसंगत और आलोचनात्मक विचारक बन गए।
3. उन्होंने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'बिस्ट ओ सेह साल' यानी '23 इयर्स' (23 Years) लिखी थी। माना जा रहा है कि पिछले कुछ वर्षो में उनकी पुस्तक को पढ़ने वालों की संख्या बढ़ी है। 
4. इस पुस्तक में उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के जीवन और इस्लाम के इतिहास का बहुत ही आलोचनात्मक और तर्कसंगत विश्लेषण किया था, जिसे कट्टरपंथी विचारधारा के लोग 'नास्तिकता' और 'ईशनिंदा' (Blasphemy) मानते थे।
5. 1975 में, उन्होंने अपनी पुस्तक 'बिस्ट ओ सेह साल' (तेईस वर्ष) के दस्तावेज़ फ़ारसी और अरबी के प्रोफ़ेसर फ्रैंक आर.सी. बैगली को सौंपे और उनसे इसका अनुवाद करने का अनुरोध किया, लेकिन यह भी कहा कि इसे उनकी मृत्यु के बाद ही प्रकाशित किया जाए। उन्होंने 1977 और 1978 में भी यही अनुरोध दोहराया। 
6. फ्रैंक आर.सी. बैगली ने अपना वादा निभाया और अली दश्ती के दस्तावेज़ों का अनुवाद और उन्हें प्रकाशन योग्य प्रारूप में व्यवस्थित करने के बाद, पुस्तक 1985 में प्रकाशित हुई। एक ईरानी समाचार पत्र ने अली दश्ती की मृत्यु की सूचना ईरानी वर्ष 1360 के देय महीने में दी, यानी 22 दिसंबर 1981 और 20 जनवरी 1982 के बीच दी।
7. 1979 की इस्लामिक क्रांति के तुरंत बाद, खोमैनी की सरकार ने उन्हें उनकी इसी पुस्तक और उनके विचारों के लिए गिरफ्तार कर लिया।
8. गिरफ्तारी के समय उनकी उम्र लगभग 80 वर्ष से अधिक थी। जेल में उन्हें प्रताड़ित किया गया और उनकी वृद्धावस्था को देखते हुए अंततः उन्हें नजरबंद (House Arrest) कर दिया गया था। जेल की प्रताड़ना और खराब स्वास्थ्य के कारण 1982 में उनकी मृत्यु हो गई।
 
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

चीन में घटती बिक्री के बीच जर्मन कार कंपनियां भारत के भरोसे