Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

अचला (अपरा) एकादशी की पौराणिक व्रत कथा,वामन ऋषि की करें पूजा

हमें फॉलो करें webdunia
Apara Ekadashi 2022: वर्ष 2022 में 26 मई, दिन गुरुवार को अपरा या अचला एकादशी मनाई जाएगी। अपरा एकादशी को जलक्रीड़ा एकादशी, भद्रकाली तथा अचला एकादशी के नाम से भी जाना जाता है।यह एकादशी हर तरह के पापों को मिटाने में सक्षम मानी गई है। प्रतिवर्ष अपरा/ अचला एकादशी ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु और उनके पांचवें अवतार वामन ऋषि की पूजा की जाती है। 
 
अपरा एकादशी की कथा- 
अपरा/अचला एकादशी की प्रचलित कथा के अनुसार प्राचीन काल में महीध्वज नामक एक धर्मात्मा राजा था। उसका छोटा भाई वज्रध्वज बड़ा ही क्रूर, अधर्मी तथा अन्यायी था। वह अपने बड़े भाई से द्वेष रखता था। उस पापी ने एक दिन रात्रि में अपने बड़े भाई की हत्या करके उसकी देह को एक जंगली पीपल के नीचे गाड़ दिया। 
 
इस अकाल मृत्यु से राजा प्रेतात्मा के रूप में उसी पीपल पर रहने लगा और अनेक उत्पात करने लगा। एक दिन अचानक धौम्य नामक ऋषि उधर से गुजरे। उन्होंने प्रेत को देखा और तपोबल से उसके अतीत को जान लिया। अपने तपोबल से प्रेत उत्पात का कारण समझा। ऋषि ने प्रसन्न होकर उस प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारा तथा परलोक विद्या का उपदेश दिया। 
 
दयालु ऋषि ने राजा की प्रेत योनि से मुक्ति के लिए स्वयं ही अपरा (अचला) एकादशी का व्रत किया और उसे अगति से छुड़ाने को उसका पुण्य प्रेत को अर्पित कर दिया। इस पुण्य के प्रभाव से राजा की प्रेत योनि से मुक्ति हो गई। 
 
वह ॠषि को धन्यवाद देता हुआ दिव्य देह धारण कर पुष्पक विमान में बैठकर स्वर्ग को चला गया। अत: अपरा एकादशी की कथा पढ़ने अथवा सुनने से मनुष्य सब पापों से छूट जाता है। अपरा एकादशी व्रत से मनुष्य को अपार खुशियों की प्राप्ति होती है तथा समस्त पापों से मुक्ति मिलती है तथा धन संपत्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
webdunia

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Vat Savitri Vrat: 30 मई 2022 को वट सावित्री अमावस्या पर कैसे करें पूजन, पढ़ें आसान विधि