Hanuman Chalisa

अधिक मास की एकादशी आज, श्रीकृष्ण ने अर्जुन को बताया इसका रहस्य

Webdunia
padmini ekadashi katha or rahsya : आज अधिक मास की पद्मिनी एकादशी व्रत रखा जा रहा है। इस बार यह एकादशी अधिक श्रावण मास में पड़ रही है। इस व्रत का रहस्य भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था, उसका वर्णन नीचे दिया जा रहा है। 
 
भगवान श्री कृष्ण के अनुसार अधिक मास  में शुक्ल पक्ष में जो एकादशी आती है वह पद्मिनी/कमला एकादशी कहलाती है। वैसे तो प्रत्येक वर्ष 24 एकादशियां होती हैं। जब अधिक मास  या मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। अधिक मास  या मलमास को जोड़कर वर्ष में 26 एकादशियां होती हैं। अधिक मास  में 2 एकादशियां होती हैं, जो शुक्ल पक्ष में पद्मिनी एकादशी और कृष्ण पक्ष में परमा एकादशी के नाम से जानी जाती हैं। 
 
भगवान कृष्‍ण बोले- मलमास में अनेक पुण्यों को देने वाली एकादशी का नाम पद्मिनी है। इसका व्रत करने पर मनुष्य कीर्ति प्राप्त करके बैकुंठ को जाता है, जो मनुष्‍यों के लिए भी दुर्लभ है। यह एकादशी करने के लिए दशमी के दिन व्रत का आरंभ करके कांसे के पात्र में जौ-चावल आदि का भोजन करें तथा नमक न खाएं। भूमि पर सोएं और ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें। 
 
एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में शौच आदि से निवृत्त होकर दंतधावन करें और जल के 12 कुल्ले करके शुद्ध हो जाएं। सूर्य उदय होने के पूर्व उत्तम तीर्थ में स्नान करने जाएं। इसमें गोबर, मिट्‍टी, तिल तथा कुशा व आंवले के चूर्ण से विधिपूर्वक स्नान करें। श्वेत वस्त्र धारण करके भगवान विष्णु के मंदिर जाकर पूजा-अर्चना करें।
 
अत: इस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को इस व्रत की कथा बताई थी। वह यहां प्रस्तुत है- 
 
पूर्वकाल में त्रेयायुग में हैहय नामक राजा के वंश में कृतवीर्य नाम का राजा महिष्मती पुरी में राज्य करता था। उस राजा की 1,000 परम प्रिय स्त्रियां थीं, परंतु उनमें से किसी को भी पुत्र नहीं था, जो कि उनके राज्यभार को संभाल सके। देव‍ता, पितृ, सिद्ध तथा अनेक चिकि‍त्सकों आदि से राजा ने पुत्र प्राप्ति के लिए काफी प्रयत्न किए, लेकिन सब असफल रहे। 
 
तब राजा ने तपस्या करने का निश्चय किया। महाराज के साथ उनकी परम प्रिय रानी, जो इक्ष्वाकु वंश में उत्पन्न हुए राजा हरिश्चंद्र की पद्मिनी नाम वाली कन्या थीं, राजा के साथ वन में जाने को तैयार हो गई। दोनों अपने मंत्री को राज्यभार सौंपकर राजसी वेष त्यागकर गंधमादन पर्वत पर तपस्या करने चले गए। 
 
राजा ने उस पर्वत पर 10 हजार वर्ष तक तप किया, परंतु फिर भी पुत्र प्राप्ति नहीं हुई। तब पतिव्रता रानी कमलनयनी पद्मिनी से अनुसूया ने कहा- 12 मास से अधिक महत्वपूर्ण मलमास होता है, जो 32 मास पश्चात आता है। उसमें द्वादशीयुक्त पद्मिनी शुक्ल पक्ष की एकादशी का जागरण समेत व्रत करने से तुम्हारी सारी मनोकामना पूर्ण होगी। इस व्रत के करने से भगवान तुम पर प्रसन्न होकर तुम्हें शीघ्र ही पुत्र देंगे।
 
रानी पद्मिनी ने पुत्र प्राप्ति की इच्छा से एकादशी का व्रत किया। वह एकादशी को निराहार रहकर रात्रि जागरण कर‍ती। इस व्रत से प्रसन्न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। इसी के प्रभाव से रानी पद्मिनी के घर कार्तवीर्य उत्पन्न हुए। जो बलवान थे और उनके समान तीनों लोकों में कोई बलवान नहीं था। तीनों लोकों में भगवान के सिवा उनको जीतने का सामर्थ्य किसी में नहीं था। 
 
सो जिन मनुष्यों ने मलमास शुक्ल पक्ष एकादशी का व्रत किया है, जो संपूर्ण कथा को पढ़ते या सुनते हैं, वे भी यश के भागी होकर विष्‍णुलोक को प्राप्त होते हैं। इस प्रकार अधिक मास की पद्मिनी एकादशी की महिमा है, जो मनुष्य को पुत्ररत्न की प्राप्ति करवा कर समस्त सुख देती है और मृत्यु पश्चात मोक्ष प्रदान करती है। 
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इनसे संबंधित किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें।

ALSO READ: पद्मिनी एकादशी का व्रत रखने से मिलता है सभी प्रकार के यज्ञों, व्रतों एवं तपश्चर्या का फल


सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

अधिकमास 2026: क्यों माना जाता है सबसे पवित्र महीना? जानें पूजा विधि, मंत्र और 6 खास बातें

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

सूर्य के वृषभ राशि में प्रवेश से बदलेंगे वैश्विक हालात? जानें भविष्यफल

सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें मेष से मीन तक किसे मिलेगा लाभ, राशिफल

घर में रात में चमगादढ़ घुसने के हैं 6 कारण, भूलकर भी न करें नजरअंदाज, तुरंत बरतें ये सावधानियां

सभी देखें

धर्म संसार

जून 2026 का ज्योतिषीय विश्लेषण: कैसा रहेगा मौसम, राजनीति, राशि और देश-दुनिया का हाल?

ज्येष्ठ मास में 8 बड़े मंगल का अद्भुत संयोग: इस तरह करेंगे हनुमानजी की उपासना तो मिलेंगे अनेक शुभ फल

आल्हा जयंती कैसे और कब मनाई जाती है?

Ganga Dussehra 2026: स्वर्ग से कैसे धरती पर आईं पतित पावनी मां गंगा? भगीरथ के इस कठोर तप की कहानी झकझोर देगी!

Navtapa 2026 dates: कब से कब तक रहेगा नौतपा?

अगला लेख