गणेश चतुर्थी 2025: घर पर ऐसे बनाएं इको-फ्रेंडली गणपति, जानें सजावट और पूजा की टिप्स

WD Feature Desk
मंगलवार, 26 अगस्त 2025 (10:58 IST)
eco friendly ganesh ji: भारत में गणेश चतुर्थी सिर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि पूरे समाज को जोड़ने वाला उत्सव है। भगवान गणेश को ‘विघ्नहर्ता’ और ‘सुखकर्ता’ माना जाता है, इसलिए हर साल इस दिन भक्त पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ घर और पंडालों में गणपति की स्थापना करते हैं। ढोल-नगाड़ों की गूंज, मिठाइयों की खुशबू और भक्ति गीतों का माहौल इस पर्व को और खास बना देता है। लेकिन बदलते समय के साथ हमें यह भी समझना जरूरी है कि उत्सव मनाते हुए पर्यावरण का भी ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है।
 
आज के समय में जब नदी-तालाबों का प्रदूषण, प्लास्टिक कचरे की समस्या और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव बढ़ रहा है, तब इको-फ्रेंडली गणपति की परंपरा अपनाना सबसे बड़ा कदम साबित हो सकता है। अगर आप गणेश चतुर्थी 2025 को यादगार और पर्यावरण के अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो अभी से तैयारी शुरू करें।
 
क्यों जरूरी है इको-फ्रेंडली गणपति?
गणपति उत्सव में बड़ी संख्या में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) की मूर्तियां बनाई जाती हैं। ये देखने में आकर्षक तो होती हैं, लेकिन पानी में घुलती नहीं और प्रदूषण का कारण बनती हैं। विसर्जन के बाद ये मूर्तियां नदी और झीलों के तल में जमा होकर जलीय जीवन को नुकसान पहुंचाती हैं। इसके अलावा केमिकल वाले रंग पानी की गुणवत्ता को भी खराब कर देते हैं। ऐसे में इको-फ्रेंडली गणपति एक बेहतर विकल्प है, जो मिट्टी, शंख, नारियल की छाल, पेपर मेशी और अन्य प्राकृतिक चीजों से बनाए जाते हैं और आसानी से पानी में घुलकर मिट्टी में मिल जाते हैं।
 
घर पर बनाएं इको-फ्रेंडली गणपति
अगर आप सच में इस बार का गणेश उत्सव खास और जिम्मेदार बनाना चाहते हैं, तो घर पर खुद ही इको-फ्रेंडली गणपति बनाने की कोशिश करें। इसके लिए आपको ज्यादा महंगे सामान की जरूरत नहीं है।
 
शुद्ध मिट्टी का उपयोग करें: बाजार में आसानी से उपलब्ध साधारण मिट्टी से आप खुद ही गणपति की मूर्ति गढ़ सकते हैं। इसमें न तो किसी केमिकल की जरूरत है और न ही किसी भारी सजावट की।
 
पेपर मेशी गणपति: पुराने अखबार, गोंद और हल्के रंगों से बनी मूर्तियां न केवल हल्की होती हैं बल्कि विसर्जन में आसानी से घुल जाती हैं।
 
बीज गणपति: यह एक नया और अनोखा विकल्प है। मिट्टी में बीज डालकर मूर्ति बनाई जाती है, और विसर्जन के बाद जब इसे गमले या बगीचे में रखा जाता है, तो मूर्ति घुलकर पौधा बन जाती है।
 
मिनिमल सजावट: मूर्ति को सजाने के लिए प्लास्टिक या थर्माकोल का उपयोग न करें। इसके बजाय फूल, पत्ते, और प्राकृतिक चीजों से सजावट करें।
 
सजावट और पूजा का इको-फ्रेंडली तरीका
गणपति की पूजा और सजावट का मजा तभी पूरा होता है, जब उसमें प्रकृति का स्पर्श हो। इसलिए इस बार घर पर सजावट करते समय ध्यान रखें कि ज्यादा से ज्यादा नेचुरल डेकोरेशन का इस्तेमाल करें।
विसर्जन का नया तरीका
इको-फ्रेंडली गणपति का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसे घर पर ही छोटे गमले, टब या किसी बड़े बर्तन में विसर्जित कर सकते हैं। इससे नदियों और झीलों को प्रदूषित करने की जरूरत नहीं पड़ती। खासकर अगर आपने बीज गणपति बनाए हैं, तो विसर्जन के बाद कुछ ही दिनों में पौधे निकल आते हैं। यह एक खूबसूरत संदेश है कि भगवान गणेश हमें न केवल जीवन में खुशियां देते हैं, बल्कि प्रकृति को भी जीवन देते हैं।
 

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