Ganesh Chaturthi 2021 : जानिए श्री गणेश माटी स्वरूप में कितनी समृद्धि लाते हैं घर में

Webdunia
भगवान श्रीगणेश की उपासना से विद्या, बुद्धि, विवेक, यश, सिद्धि सहजता से प्राप्त हो जाती हैं। भगवान श्रीगणेश प्रथम पूज्य देवता हैं। किसी भी कार्य को आरंभ करने से पहले श्रीगणेश का स्मरण करने से वह कार्य अवश्य पूर्ण होता है। श्रद्धा और आस्था के साथ श्री गणपति की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
 
माता पार्वती ने पुत्र प्राप्ति के लिए पुण्यक नामक उपवास किया था। इसी उपवास के प्रभाव से श्री गणेश पुत्र रूप में प्राप्त हुए। भगवान श्री गणेश के शरीर का रंग लाल एवं हरा है। लाल रंग शक्ति और हरा रंग समृद्ध‍ि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए जहां श्रीगणेश हैं वहां शक्ति और समृद्ध‍ि दोनों का वास है।
 
भगवान श्रीगणेश को विघ्नहर्ता, मंगलमूर्ति, लंबोदर, व्रकतुंड आदि नामों से पुकारा जाता है। महाभारत में भगवान श्रीगणेश के स्वरूप और उपनिषद में उनकी शक्ति का वर्णन किया गया है। महर्षि व्यास की महाभारत भगवान श्रीगणेश ने ही लिखी।
 
उन्होंने अपना एक दंत तोड़कर महाभारत की रचना की। इस कारण वह एकदंत कहलाए। भगवान श्रीगणेश के कानों में वैदिक ज्ञान, मस्तक में ब्रह्म लोक, आंखों में लक्ष्य, दाएं हाथ में वरदान, बाएं हाथ में अन्न, सूंड में धर्म, पेट में सुख-समृद्धि, नाभि में ब्रह्मांड और चरणों में सप्तलोक का वास माना जाता है।
 
भगवान श्रीगणेश की रिद्धि और सिद्धि नामक दो पत्नियां हैं। शुभ और लाभ उनके दो पुत्र हैं।
 
बड़े ही मनमोहक से दिखने वाले गणेश जी के भव्य और दिव्य स्वरुप, शारीरिक संरचना में भी विशिष्ट व गहरा अर्थ निहित है। शिवमानस पूजा में श्री गणेश को प्रणव यानी ॐ कहा गया है। इस एकाक्षर ब्रह्म में ऊपर वाला भाग गणेश का मस्तक, नीचे का भाग उद ,चंद्रबिंदु लड्डू और मात्रा सूंड है। इनकी चार भुजाएं चारों दिशाओं में सर्वव्यापता की प्रतीक हैं। उनकी छोटी पैनी आँखें सूक्ष्म -तीक्ष्ण दृष्टि की सूचक हैं।
 
श्रीगणेश अपने सम्पूर्ण स्वरूप में हमारे घर में
 
सुख,रिद्धि-सिद्धि,
 
शुभ-लाभ,
 
धर्म,वरदान,
 
यश,सुख,समृद्धि,
 
वैभव, पराक्रम,
 
सफलता,प्रगति,
 
सौभाग्य,ऐश्वर्य,
 
धन, सम्पदा और आरोग्य का आशीष लेकर आते हैं...

ALSO READ: क्या शिवजी को मिले इस श्राप के कारण कटा था गणेशजी का मस्तक?

ALSO READ: श्रीगणेश चतुर्थी 2021 : 10 दिनों में गणेशजी के इन 11 उपायों में से कोई भी 1 करें

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

हिन्दू नववर्ष को किस राज्य में क्या कहते हैं, जानिए इसे मनाने के भिन्न भिन्न तरीके

कब मनेगी ईद 31 मार्च या 1 अप्रैल, जानिए सही तारीख

नवरात्रि की प्रथम देवी मां शैलपुत्री की कथा

चैत्र नवरात्रि 2025 पर अपनों को शेयर करें ये विशेस और कोट्स, मां दुर्गा के आशीर्वाद से जीवन होगा मंगलमय

गुड़ी पड़वा विशेष: गुड़ी पर क्यों चढ़ाते हैं गाठी/पतासे का हार, जानिए इसका धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

सभी देखें

धर्म संसार

सूर्य ग्रहण के दौरान क्या करें क्या नहीं? | Do n Donts of Surya grahan

साल 2025 का पहला सूर्य ग्रहण, भारत में क्या होगा असर

57 वर्षों के बाद 29 मार्च को 10 दुर्लभ योग, 5 राशियों के लोग रहें सावधान

ईद उल-फ़ित्र पर क्या-क्या बनाएं, जानें ईद उल फितर के पकवानों की सूची

इस्लाम में अलविदा जुमे की अहमियत

अगला लेख