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कौन हैं गुजरात की IAS शालिनी अग्रवाल? जिनकी किताब का CM भूपेंद्र पटेल ने किया विमोचन

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Shalini Agrawal
IAS Shalini Agarwal: शालिनी अग्रवाल गुजरात कैडर की 2005 बैच की वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी हैं। मूल रूप से बिहार की रहने वाली शालिनी अग्रवाल ने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और सिविल सेवा में दो दशक पूरे कर लिए हैं। वह वडोदरा की कलेक्टर और नगर आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दे चुकी हैं। वह जनवरी 2026 से 'गुजरात ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड' (GUVNL) की प्रबंध निदेशक (MD) के रूप में कार्यरत हैं। प्रशासन में उन्हें एक कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है।

सूरत नगर आयुक्त के रूप में 'स्वर्ण काल'

उनके करियर की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धि सूरत नगर आयुक्त के रूप में रही है। उनके नेतृत्व में सूरत शहर ने स्वच्छता सर्वेक्षण में अभूतपूर्व प्रगति की और देश में इंदौर के साथ संयुक्त रूप से पहला स्थान प्राप्त किया। सूरत को 'ब्रिज सिटी' के रूप में स्थापित करने और शहर के बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने में उनका बहुत बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने अपने अनुभवों के आधार पर सूरत को एक प्रगतिशील मॉडल के रूप में पेश किया है।

नई पुस्तक : 'शेपिंग टुमॉरोज सिटीज़'

प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने के साथ-साथ शालिनी अग्रवाल ने लेखन के क्षेत्र में भी अपनी प्रतिभा दिखाई है। उन्होंने 'शेपिंग टुमॉरोज सिटीज़' नामक पुस्तक लिखी है, जिसका विमोचन हाल ही में मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल द्वारा गांधीनगर में किया गया। इस पुस्तक में उन्होंने चर्चा की है कि भविष्य के शहर कैसे होने चाहिए, शहरी चुनौतियों को अवसरों में कैसे बदला जाए और सतत विकास (Sustainable Development) कैसे सुनिश्चित किया जाए।

भविष्य के शहरों के लिए 'ग्रीन और ग्लोबल' विजन

अपनी पुस्तक में अग्रवाल ने 2050 तक बढ़ती शहरी आबादी को ध्यान में रखते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'पंचामृत संकल्प' को केंद्र में रखते हुए जलवायु परिवर्तन के खतरों को 'हरित अवसरों' (Green Opportunities) में बदलने पर जोर दिया है। पुस्तक के कवर पेज पर एक पेंटिंग के माध्यम से उन्होंने एक ऐसे विश्व स्तरीय शहर का चित्रण किया है जो पर्यावरण के अनुकूल और अत्याधुनिक तकनीक से लैस हो।

गुजरात के शहरी विकास के लिए मार्गदर्शक पुस्तक

राज्य सरकार जब 2025 को 'शहरी विकास वर्ष' के रूप में मना रही है और नए सैटेलाइट शहरों के विकास पर ध्यान केंद्रित कर रही है, तब यह पुस्तक अत्यंत प्रासंगिक साबित होगी। शालिनी अग्रवाल के अनुसार, शहर अपनी समस्याओं से नहीं बल्कि अपनी 'पसंद' से पहचाने जाने चाहिए। नवाचार, वित्तीय भागीदारी और सुशासन के माध्यम से ही भारतीय शहरों को वैश्विक स्तर का बनाया जा सकता है।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala 

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