लू उन लोगों को भी अधिक लगती है जिन्हें अक्सर त्वचा के रोग होते हैं और जो मधुमेह जैसे रोग से पीड़ित हैं।
शराब पीने वाले भी लू की चपेट में जल्दी आते हैं। क्योंकि शराब लिवर के साथ-साथ ह्रदय को भी जलाती है। जब तापमान बढ़ता है तो शराबी अपनी कमजोर प्रतिरोधक क्षमता के कारण मुकाबला नहीं कर पाता और बीमार हो जाता है।
बेहद कमजोर, बुजुर्ग और मोटे लोगों को भी लू लगने का खतरा अधिक होता है।
अगले पेज पर जानिए क्या हैं लू के लक्षण
अचानक शरीर का तापमान बढ़ जाना
सिर में तेज दर्द का होना
लू लगने से किडनी, दिमाग और दिल की कार्य-क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
नाड़ी तथा सांस की गति तेज हो जाती है।
डिहाइड्रेशन के लक्षण नजर आते हैं-चक्कर आना,दस्त लगना,मिचली होना।
त्वचा पर लाल दाने हो जाना
बार-बार पेशाब आना
शरीर में जकड़न होना।
अगले पेज पर जानिए कैसे बचें लू से-
खुले शरीर धूप में न निकलें।
अचानक ठंडी जगह से एकदम गर्म जगह ना जाएं। खासकर एसी में बैठे रहने के बाद तुरंत धूप में ना निकलें।
धूप में निकलने पर सिर अवश्य ढकें। आंखों पर सनग्लासेस लगाएं।
गर्मी में सफेद या हल्के रंग के कॉटन कपड़े पहनें।
कच्चा प्याज रोज खाएं। धूप में निकलने पर अपने पॉकेट में छोटा सा प्याज रखें यह लू शरीर को लगने नहीं देता और सारी गर्मी खुद सोख लेता है।
ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं। जिससे पसीना आकर शरीर का तापमान नियमित निर्धारित हो सके तथा शरीर में जल की कमी न हो सके।
अधिक गर्मी में मौसमी फल, फल का रस, दही, मठ्ठा, जीरा छाछ, जलजीरा, लस्सी, आम का पना पिएं या आम की चटनी खाएं।
अगले पेज पर : लू लगने पर क्या करें
* लू लगने पर तत्काल योग्य डॉक्टर को दिखाना चाहिए। डॉक्टर को दिखाने के पूर्व कुछ प्राथमिक उपचार करने पर भी लू के रोगी को राहत महसूस होने लगती है।
* बुखार तेज होने पर रोगी को ठंडी खुली हवा में आराम करवाना चाहिए।
* 104 डिग्री से अधिक बुखार होने पर बर्फ की पट्टी सिर पर रखना चाहिए।
* रोगी को तुरंत प्याज का रस शहद में मिलाकर देना चाहिए।
* प्यास बुझाने के लिए नींबू के रस में मिट्टी के घड़े अथवा सुराही के पानी का सेवन करवाना चाहिए। बर्फ का पानी नहीं पिलाना चाहिए क्योंकि इससे लाभ के बजाए हानि हो सकती है।
* रोगी के शरीर को दिन में चार-पांच बार गीले तौलिए से पोंछना चाहिए।
* चाय-कॉफी आदि गर्म पेय का सेवन अत्यंत कम कर देना चाहिए।
* कैरी का पना विशेष लाभदायक होता है। कच्चे आम को गरम राख पर मंद आंच वाले अंगारे में भुनें। ठंडा होने पर उसका गूदा (पल्प) निकालकर उसमें पानी मिलाकर मसलना चाहिए। इसमें जीरा, धनिया, शकर, नमक, कालीमिर्च डालकर पना बनाना चाहिए। पने को लू के रोगी को थोड़ी-थोड़ी देर में दिया जाना चाहिए।
* जौ का आटा व पिसा प्याज मिलाकर शरीर पर लेप करें तो लू से तुरंत राहत मिलती है।
* जब रोगी को बाहर ले जाए तो उसके कानों में गुलाब जल मिला कर रूई के फाहे लगाएं।
* रोगी की नाभि पर खड़ा नमक रखकर उस पर धार बांध कर पानी गिराए। सारी गर्मी झड़ जाएगी।
* मरीज के तलवे पर कच्ची लौकी घिसें इससे सारी गर्मी लौकी खिंच लेगी और तुरंत राहत मिलेगी। लौकी कुम्हला जाए तो समझें कि लू की गर्मी उतर रही है। यह क्रिया बार-बार दोहराए।