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रसोई में मौजूद इन 4 चीजों को खाने से बढ़ता है फैटी लिवर का खतरा

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हमें फॉलो करें Fatty liver

WD Feature Desk

, शुक्रवार, 1 अगस्त 2025 (17:58 IST)
fatty liver food: आजकल की तेज रफ्तार जिंदगी और बदलती खानपान की आदतों ने हमारी सेहत पर गहरा असर डाला है। खासकर लिवर से जुड़ी बीमारियों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है। फैटी लिवर यानी लिवर में चर्बी जमा होना एक ऐसी ही आम लेकिन खतरनाक समस्या है, जो शुरुआती लक्षणों में अक्सर नजर नहीं आती, लेकिन धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकती है। हैरानी की बात ये है कि हमारी अपनी रसोई में ही कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिन्हें हम रोज़ाना खाते हैं और वे फैटी लिवर की वजह बन सकती हैं।
 
आइये जानते हैं रसोई की वो कौन-सी चार आम चीजें हैं, जिनका ज़्यादा सेवन करने से लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ जाता है। अगर आप भी अपनी और अपने परिवार की सेहत को लेकर सजग हैं, तो ये जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
 
1. रिफाइंड तेल
अधिकतर घरों में खाना बनाने के लिए रिफाइंड तेल का इस्तेमाल होता है क्योंकि यह देखने में हल्का और सस्ता होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि रिफाइंड तेल को बहुत ज्यादा प्रोसेस किया जाता है, जिसमें उसके प्राकृतिक पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं? इसके अलावा, इसमें ट्रांस फैट की मात्रा अधिक होती है, जो सीधे तौर पर लिवर में फैट जमा करने के लिए जिम्मेदार मानी जाती है। अगर आप रोज़ इसी तेल में तला-भुना खाना खाते हैं, तो आपका लिवर धीरे-धीरे कमजोर होता जाएगा। बेहतर विकल्प है, सरसों तेल, नारियल तेल या ऑलिव ऑयल जैसी प्राकृतिक और कम प्रोसेस वाली चीजों का इस्तेमाल करना।
 
2. चीनी
चीनी हर भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है, चाय, मिठाई, हलवा, बेकिंग में इसका खूब इस्तेमाल होता है। लेकिन जब आप ज़रूरत से ज़्यादा चीनी खाते हैं, तो शरीर उसे ग्लूकोज में बदलकर लिवर में फैट के रूप में जमा करने लगता है। यही चर्बी आगे चलकर फैटी लिवर की वजह बनती है। खासकर प्रोसेस्ड शुगर यानी सफेद चीनी सबसे हानिकारक होती है। इसके अलावा, पैकेज्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स, बिस्किट और मिठाइयों में भी हाई फ्रक्टोज़ कॉर्न सिरप पाया जाता है, जो लिवर को सबसे तेज़ नुकसान पहुंचाता है। चीनी की जगह गुड़, शहद या स्टीविया जैसे प्राकृतिक विकल्प अपनाएं।
 
3. मैदा और रिफाइंड कार्ब्स 
पास्ता, ब्रेड, समोसे, बर्गर, पिज्जा, केक, ये सब सुनने में भले ही स्वादिष्ट लगते हैं, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाला मैदा आपके लिवर का सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है। मैदा एक रिफाइंड कार्ब है जिसमें फाइबर और पोषण लगभग ना के बराबर होता है। यह शरीर में जाकर जल्दी पच जाता है और शुगर लेवल को तेजी से बढ़ाता है, जिससे लिवर में फैट जमा होने लगता है। रोजाना मैदे से बनी चीजें खाने से शरीर में इंसुलिन रेसिस्टेंस बढ़ती है, जो नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिज़ीज़ का बड़ा कारण है। इसकी जगह आप मल्टीग्रेन आटा, बाजरे की रोटी या ओट्स को अपने आहार में शामिल करें।
 
4. सोडियम यानी नमक 
नमक हर खाने का स्वाद बढ़ाता है, लेकिन जब यह जरूरत से ज्यादा लिया जाए, तो यह शरीर में पानी और चर्बी को रोके रखता है। ज्यादा नमक खाने से शरीर में सूजन बढ़ती है और लिवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। खासकर प्रोसेस्ड फूड्स जैसे अचार, पापड़, इंस्टेंट नूडल्स, चिप्स और सॉस में सोडियम की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। ज्यादा नमक का सेवन लिवर की कार्यक्षमता को धीरे-धीरे कम करता है और फैट जमा होने की प्रक्रिया को तेज करता है। इसलिए बेहतर होगा कि आप सीमित मात्रा में ही नमक का इस्तेमाल करें और प्रोसेस्ड चीजों से दूरी बनाए रखें।
 

अस्वीकरण (Disclaimer) : सेहत, ब्यूटी केयर, आयुर्वेद, योग, धर्म, ज्योतिष, वास्तु, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार जनरुचि को ध्यान में रखते हुए सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं। इससे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। 

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