Hanuman Chalisa

पुस्तक समीक्षा : उड़ता परिंदा

Webdunia
जफर इमाम
कवि की कल्पनाओं का कोई अंत नहीं होता है। कहा भी गया है "जहां ना पहुंचे रवि, वहां पहुंचे कवि"! उड़ता परिंदा भी कवि की कल्पना मात्र ही है। उड़ता परिंदा के माध्यम से कवि ने आज इस युग के प्रेम और वियोग जैसी भावनाओं को अपने ही शब्दों में एक परिंदा पक्षी के माध्यम से प्रकट किया है। जिस प्रकार एक पक्षी रात और दिन एक वृक्ष की डाली के सहारे ही अपना जीवन व्यतीत करता है और समय के बीतते पलो में ही उस वृक्ष की डाली से एक प्रेम बंध सा जाता है।  
 
वक्त का तो काम ही परिवर्तित होना है। समय बीतता है और एक दिन वह डाली सूखकर टूट जाती है और जमीन पर गिर जाती है। वह परिंदा, जिसको उस डाली से प्रेम हो चुका था, अब वह अपने दुख को कैसे प्रकट करे? वह परिंदा उसी दुख में काफी वक्त गुजार देता है और फिर एक दिन वह परिंदा उड़ चलता है किसी दुसरे वृक्ष की ओर। फिर अचानक एक वृक्ष की डाली में अपना बसेरा डाल देता है..। 
 
यही स्थिति आज के युवक युवतियों की है, जो वक्त आने पर अपना बसेरा खुद ही परिवर्तित कर लेते हैं। उड़ता परिंदा वह स्वच्छंद परिंदा है, जो आज इस डाल पर तो कल उस डाल अपना बसेरा बना ही लेता है। कवि ने कहा भी है "मैं तो उड़ता परिंदा हूं, जहां मिलेगी शाख वही होगा मेरा बसेरा..!!"
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मियों में धूप में निकलने से पहले बैग में रखें ये चीजें, लू और सन टेन से होगा बचाव

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

LPG गैस के बिना शाकाहारी व्यंजन: 10 स्वादिष्ट और सेहतमंद चाट रेसिपी

घर में यदि गैस और इंडक्शन दोनों नहीं है, तो इन 5 आसान तरीकों से फटाफट पकेगा खाना

सभी देखें

नवीनतम

मोदी-ट्रंप की 'हॉटलाइन' पर मस्क के 'लॉग-इन' पर सवाल, कूटनीति या बिजनेस डील?

Benefits of desi ghee: देसी घी खाने के 10 अद्भुत फायदे, आप शायद ही जानते होंगे

नर्मदा के निमाड़ी अंचल में बसा 'विमलेश्वर तीर्थ'

Morning Routine: सुबह उठते ही सबसे पहले करें ये 1 काम, दिनभर रहेंगे ऊर्जा से भरपूर

राम- राष्ट्र की जीवनधारा और शाश्वत चेतना का प्रवाह

अगला लेख