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पुस्तक-परिचर्चा : पतनशील पत्नियों के नोट्स​

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हिन्दी की अग्रणी प्रकाशन संस्था वाणी प्रकाशन और राजधानी के अत्यन्त समृद्ध पुस्तक-केन्द्र ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर के संयुक्त तत्त्वावधान के तहत एक विशेष परिचर्चा का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम बुधवार, दिनांक 4 जनवरी 2017 को शाम 6:00 बजे ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर, एन-81, कनॉट प्लेस, नई दिल्ली में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में वाणी प्रकाशन की सद्यः प्रकाशित पुस्तक ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’ पर परिचर्चा की जाएगी। युवा लेखिका नीलिमा चौहान की किताब पर होने वाली परिचर्चा में हिस्सा ले रहे हैं चर्चित लेखिका अनुराधा मारवाह और लोकप्रिय इलस्ट्रेटर आपराजिता शर्मा।

नीलिमा चौहान की नवीनतम कृति ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’  दरअसल सियाह में सुफेद और सुफेद में सियाह की शिनाख़्त करने वालियों की चुटीली-चटकीली बकबक है। यह किताब नहीं है, आतिश है, जलजला है। इसमें भाषा की खूबियां हैं - ऐसी भाषा जो पाठक को रोमांचित ही नहीं करती बल्कि करारा व्यंग्य भी करती है। इसमें कथात्मकता की खूबियां भी हैं। कुछ ऐसे किस्से हैं जिन्हें आप बकबास समझ इगनोर कर देते हैं, लेकिन ये पत्नियां उनमें भी कुछ मजेदार कि‍स्से निकाल कर आपको दिखाएंगी।
 
खुद की खामियों पर फिरकी लेने वालियां, अपने राजों को छिपाने का राज उगल देने वालियां, आपके दिल की खिड़कियों को खोल पाने वालियां, आपको आपसे ही मिलवाने का फन रखने वालियां, सारे बासी तमगों को तज देने वालियां, अपनी चाहतों और सपनों को बेहिजाब कर डालने वालियां, आफतों पर रोने की बजाए हंस सकने वालियां और आपको भी हंसाकर अपनी तकलीफों के शिकंजे में फां स लेने वालियां! यही हैं पतनशील पत्नियां! पतनशीलता तेजी से फैलने वाला सुहाना ऐब है। ऐब क्या है मजशर है जिसकी कोई दवा नहीं​​।
 
पतनशील पत्नियों के नोट्स  की लेखिका नीलिमा चौहान पेशे से शिक्षिका हैं और दिल्ली विश्वविद्यालय के ज़ाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सान्ध्य) में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे एक मां, बेटी, पत्नी, दोस्त और लेखिका जैसी बेहद व्यवस्थित भूमिकाओं में भी हैं। शब्द और चुप्पी की स्त्री-भाषा में जो कुछ अनकहा रह जाता है उसे ताड़ना और कह देना अपना असली काम समझती हैं। हिंदी ब्लॉगोस्फीयर के इतिहास में और नए सोशल मीडिया में अपने लेखन से एक ख़ास जगह और मुकाम हासिल किया है। सीएसडीएस सराय के तहत 2007 में हिंदी ब्लॉगिंग पर रिसर्च फैलोशिप पर रही हैं और हिंदी के वर्चुअल जगत में घुसपैठ कर पहचान बनाने वाली चंद शुरुआती लेखिकाओं में आपका नाम शुमार है। आज के दौर का शायद यह अकेला लेखन है जिसे स्त्री गद्य का नाम दिया जाना अतिशयोक्ति नहीं होगी। किसी परंपरागत शैली का पहचाना हुआ रास्ता न पकड़ कर नई राहों की खोज करती कलम की फनकार। मुख्तलिफ ई रिसालों में, नेशनल डेलीज में लेखन का सिलसिला लगातार जारी है, अपने तंज के हुनर से, चुटीलेपन से वे एक खुशअंदाज कलम वाली लेखकीय पहचान बना चुकी हैं।
 
पुस्तक-परिचर्चा में अनुराधा मारवाह मुख्य अथिति के रूप में शामिल होंगी। अनुराधा मारवाह ने अब तक तीन उपन्यास लिखे हैं: ‘द हायर एजुकेशन ऑफ गीतिका मेंहदीरत्ता’, ‘आइडल लव’ और ‘डर्टी पिक्चर’. इन्होंने कुछ नाटक भी लिखे हैं जिनमें ‘अ पाइप ड्रीम इन डेल्ही’, ‘सरकारी फेमिनिज्म’ और ‘इस्मत की प्रेम कहानियां’ मुख्य हैं। इन्होंने लघुकथाएं और अकादमिक एवं लोकप्रिय लेख भी लिखे हैं। कई भारतीय और अमेरिकन विश्वविद्यालयों में स्त्री-विमर्श और उत्तर-औपनिवेशिक कथा से संबंधि‍त पाठ्यक्रमों में भी उनके उपन्यासों को शामिल किया गया है। भारत और स्वीडेन में उनके नाटकों का मंचन हो चुका है। ‘इस्मत की प्रेम कहानियां’ को हिन्दू प्लेराइट अवार्ड (2016) के लिए नामित किया गया। अनुराधा मारवाह दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज के अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे राजस्थान के ग्रामीण इलाकों में गैर स्कूली किशोरों के साथ विकास कार्यकर्ता के रूप में भी काम करती हैं।
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परिचर्चा में अपराजिता शर्मा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगी। तकनीक की दुनिया में हिंदी की एक बड़ी कमी की ओर हमारा ध्यान भी शायद तभी गया जब हमारा परिचय 'हिमोजी' यानी हिंदी इमोजी से होता है। देवनागरी हिंदी की पहली चैट स्टिकर एप ‘हिमोजी’ को तैयार किया अपराजिता शर्मा ने, जो अपने लॉन्च के ठीक बाद से ही वर्चुअल दुनिया और लगभग सभी नैशनल न्यूज चैनल्स, समाचार पत्र, रेडियो स्टेशन तथा छोटी-बड़ी साहित्यिक, गैर साहित्यिक पत्रिकाओं पर उल्लेखनीय चर्चा में साल भर से अपनी खास जगह बनाए हुए है। अब तक ‘हिमोजी’ के चालीस हजार से अधिक डाउनलोड हो चुके हैं। इस सबके साथ अपराजिता शर्मा दिल्ली विश्वविद्यालय के विमेन कॉलेज मिरांडा हाउस में हिंदी की प्राध्यापिका भी हैं। साल 2016 में ‘हिमोजी’ के ऑफि‍शियल लॉन्च के साथ ही देश-विदेश के प्रमुख मंचों पर आयोजित चर्चाओं में भाग ले चुकी अपराजिता शर्मा नीलिमा चौहान जी की पुस्तक ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स' के साथ बुक इलस्ट्रेशन और कवर डिज़ाइनिंग की दुनिया में भी अपना पहला क़दम रखने जा रही हैं।
 
वाणी प्रकाशन ने विगत 54 वर्षों से हिन्दी प्रकाशन के क्षेत्र में कई प्रतिमान स्थापित किए हैं। हिन्दी के अलावा भारतीय साहित्य और विश्व साहित्य की श्रेष्ठ रचनाओं का प्रकाशन कर इसने हिन्दी जगत में एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। हाल के वर्षों में वाणी प्रकाशन ने अंग्रेजी में भी महत्त्वपूर्ण शोधपरक पुस्तकों का प्रकाशन किया है। भारतीय परिदृश्य में प्रकाशन जगत की बदलती हुई भूमिका और पाठक वर्ग की बदलती हुई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए वाणी प्रकाशन ने ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर के साथ मिलकर कई महत्त्वपूर्ण कार्यक्रम-शृंखला की शुरुआत की है जिनमें ‘हिन्दी महोत्सव’ उल्लेखनीय है। पुस्तक परिचर्चा का यह कार्यक्रम भी वाणी प्रकाशन और ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर के स्वस्थ संबंधों की दिशा में एक अगला कदम है।
 
उम्मीद है कि ‘पतनशील पत्नियों के नोट्स’ पुस्तक पर आयोजित होने वाले इस परिचर्चा-कार्यक्रम में अधिक से अधिक पाठक और बुद्धिजीवी हिस्सा लेंगे तथा पूरे आयोजन को सफल और यादगार बनाएंगे।
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