Biodata Maker

कविता : फिर बाद बरस के

Webdunia
स्वाति गौतम
फिर इस साल बाद बरस के
कुछ दीप मैंने जलाए हैं 
अपने मन के कुछ उजियारे
फिर तुझ तक पहुंचाए हैं
 
कुछ खील, बताशे, मिठाई से
रिद्धि-सिद्धि की तैयारी है 
तेरे स्वागत में गली, मोहल्ले, नुक्कड़ तक 
ज्योति की लड़ी लगाई है
 
जो घुला-मिला सा रूप जिसे
आधुनिक सभ्यता कहते हैं
वहां कुछ लोग सड़कों पर गोबर, कपास, सींक
तलाशते पाए हैं 
फिर इस साल एक टीके से
कानून-व्यवस्था हारी है
 
फिर इस साल छोटे मन के कोनों में
मैंने आस्था का अंकुर उगाया है
राम-रावण के भेद को 
कंधे पर बिठा दिखाया है 
मर्यादा, शील, क्षमा, दया
तेरे रुद्ररूप का दर्शन उनको करवाया है
 
क्यों मर्यादापुरुषोत्तम है ?
क्यों गोवर्धन गिरधारी है ?
तेरी हर छवि क्यों जग से निराली है ?
 
जो बढ़कर जब परिपक्व बने
हर कदम उसे ये भान रहे
जब पहुंचे चांद पे वो
कहे गर्व से हर जन से
जाने कितने किस्से मेरी मां ने
चंदा मामा के सुनाए हैं

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या डायबिटीज रोगी कीवी खा सकते हैं?, जानें 4 फायदे

winter drinks: सर्दी जुकाम से बचने के लिए पिएं 3 में से एक पेय

बसंत पंचमी और सरस्वती प्रकटोत्सव पर रोचक निबंध Basant Panchami Essay

Cold weather Tips: ठंड में रखें सेहत का ध्यान, आजमाएं ये 5 नुस्‍खे

Republic Day Essay 2026: गणतंत्र दिवस 2026: पढ़ें राष्ट्रीय पर्व पर बेहतरीन निबंध

सभी देखें

नवीनतम

सुर्ख़ फूल पलाश के...

Republic Day Speech 2026: बच्चों के लिए 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का सबसे शानदार भाषण

PM Modi Favourite Fruit: पीएम मोदी ने की सीबकथोर्न फल की तारीफ, आखिर क्या है इसे खाने के फायदे?

Basant Panchami 2026 Special: इस बसंत पंचमी घर पर बनाएं ये 5 पीले पकवान, मां सरस्वती होंगी प्रसन्न!

गांधी महज सिद्धांत नहीं, सरल व्यवहार है

अगला लेख