rashifal-2026

हिन्दी कविता : मौत पर दुःख की अभिव्यक्ति

आत्माराम यादव 'पीव'
बधाई हो, तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है,
यह सुनकर हरेक पिता के पोर-पोर में
एक अनचाही खुशी की उमंग दौड़ पड़ती है
और वह जीवन में पहली बार
पति से पिता बन जाता है।
तब उसके हृदय में 
फूट पड़ता है गीतों का झरना
और आंखों में तैरती है
वात्सल्य, स्नेह की सरिता
जो शिशु को अधीरता के साथ देखने
और प्रेमांकन करने को आकुल होता है।
उसके कान लगे होते है
शिशु की मधुर किलकारियां सुनने को
पिता का अनुराग उमड़ पड़ता है शिशु पर
इस तरह दुनिया में चल पड़ता है
एक अनिर्वचनीय प्रेम गान
गाना, गुनगुनाना, रोना और नाचना।
न जाने कितने आयाम लिए
सांझ-संकारे शुरू हो जाती है 
जीवन की बलखाती ये प्रेमभरी अंगड़ाईयां।
पति खो जाता है पत्नी में,
पत्नी खो जाती है पति के प्रेम में
कई भीनी-सुहानी मधुर रातों-बरसातों 
और बदलते मौसमों के बाद 
जब सुनने को मिलती है यह खबर
बधाई हो, तुम्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई है।
पल-पल उम्र के साथ बडे़ होते शिशु पर
फिर बेशुमार सुखों की फुहारे
स्नेहमयी वात्सल्य चान्दनी
और लोरियों के साथ सुलाती है मां
अपने गीले आंचल में समेट कर
एक आशा संजोए सूखे में सुलाती है। 
बच्चे की किलकारियां
फूलों की मादकता लिए 
सारे परिवार की अंजलि में समेट ली जाती है।
कई दिन-रात, दिन-महिने और बरस के बाद
अपार तकलीफे-उपचार, निदान के पश्चात
मधुर भीनी सी खुशबू
शिशु से तरूण के रूप में 
माता-पिता और परिवार को मिलती है।
न जाने कितने दौर
बहन-भाई, बेटा बेटी
मां-बाप, गुरु-मित्र के रिश्ते 
और आसपास के पड़ोसियों का संसार
चारों और धाराप्रवाह मौजूद होता है
और जीवन कभी निरीह, असहाय
बाधाओं का जंजाल लिए
प्रार्थनाओं या आवश्यकता सा
विकृत, कामुक और कुण्ठित सा
यहां-वहां बिखरा होता है।
अकस्मात अपने युवा पुत्र की 
दुर्घटना से दर्दनाक मृत्यु की खबर
जब घर पहुंचती है 
तो कितना आत्मघाती होता है वह पल
जिसे सुनकर पिता खुद बन जाता है एक जिंदा ताबूत
परिवार में पसर जाता है, मौत सा सन्नाटा।
जब पिता को यह खबर मिले,
कि उसका बेटा नहीं रहा
आहिस्ता-आहिस्ता बेटे के लिए 
पल पल मरता उसका पिता
और पूरा परिवार मानो मर ही जाता है 
स्याह काली रात में बेटे का शव 
घर पहुंचते ही कोहराम मच जाता है 
आंखें भूल जाती है रोना?
दिल चीत्कार उठता है
भावनाएं तिक्त हो जाती है
और दुखों से लिप्त उस परिवार के प्रति
मैं एक पड़ौसी की शकल में
रात की खामोशी तोड़ती 
परिजनों की दुखभरी चीत्कारों से टूट जाता हूं।।
मेरा दिल और जेहन,
मुझे झकझोर कर रख देता है
खामोशी मृत्युपाश में बंधी 
मेरे मन की दीवारों को हिलाती है
और मैं मौत की अभिव्यक्ति के लिए 
तलाशता हूं कोई शब्द या उपमा
जो मैं अपने पड़ौसी की मृत्यु पर समर्पित कर सकूं। 
गमगीन रूदन कोलाहल के बीच
दिल रोने को करता है
किन्तु ये कमबख्त आंखें
आंसू टपकाने से बचती है
जिसमें मेरे पड़ौसी भले मुझे पत्थरदिल समझे
ऐसे में मेरा अंतरमन खो जाता है
गमों में अपने आंसू तलाश करने
तब समझता हूं रो देना कितना दुविधाभरा है
पर 'पीव' रो न सकना मन की बेबसी है। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

सर्दियों में सेहत और स्वाद का खजाना है मक्के की राब, पीने से मिलते हैं ये फायदे, जानें रेसिपी

सर्दियों में रोजाना पिएं ये इम्यूनिटी बूस्टर चाय, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

रूम हीटर के साथ कमरे में पानी की बाल्टी रखना क्यों है जरूरी? जानें क्या है इसके पीछे का साइंस

Winter Superfood: सर्दी का सुपरफूड: सरसों का साग और मक्के की रोटी, जानें 7 सेहत के फायदे

Kids Winter Care: सर्दी में कैसे रखें छोटे बच्चों का खयाल, जानें विंटर हेल्थ टिप्स

सभी देखें

नवीनतम

Paramahansa Yogananda: परमहंस योगानंद कौन थे?

Cold weather Tips: ठंड में रखें सेहत का ध्यान, आजमाएं ये 5 नुस्‍खे

Louis Braille Jayanti: लुई ब्रेल दिवस क्यों मनाया जाता है?

पहचान से उत्तरदायित्व तक : हिन्दू समाज और भारत का भविष्य- मोहन भागवत

गंदा पानी कैसे साफ करें, जानिए 7 तरीके

अगला लेख