Dharma Sangrah

हिन्दी कविता : सीख ले मनवा

Webdunia
ममता भारद्वाज 
 
मनवा तू क्यूं हो जाता विभोर।
क्यूं नही समझता जगत की डोर ।
यूं अकेले तन्हा रहना छोड़ दे मनवा ।
हर पल खुश रहना सीख ले मनवा।

कांटों पे चलना है जीवन अपना 
बिना थके तुझको है चलना
तू इतना सोच विचार क्यूं करता मनवा ।
जग की रीत समझ ले मनवा ।
इस जग में भला कौन है अपना 
सबका कर्म लेख है अपना 
मनवा क्यूं  हो जाता विभोर 
अब तो समझ ले जगत की डोर।
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

अंधेरे में जलती एक अटूट लौ: माता गांधारी देवी का जीवन दर्शन

सुर्ख़ फूल पलाश के...

गांधी महज सिद्धांत नहीं, सरल व्यवहार है

Vastu Remedies: वास्तु दोष निवारण के सबसे असरदार 5 उपाय

क्या डायबिटीज रोगी कीवी खा सकते हैं?, जानें 4 फायदे

सभी देखें

नवीनतम

Health tips: स्वस्थ जीवन के लिए 10 सरल और असरदार उपाय

Work From Home: घर में इस दिशा में बैठकर करेंगे काम, तो करियर में मिलेगी दोगुनी तरक्की

Mahatma Gandhi : महात्मा गांधी की जीवनी और विचार, जो आज भी बदल सकते हैं आपकी जिंदगी

Mahatma Gandhi Essay: सत्य और अहिंसा के पुजारी, महात्मा गांधी पर छोटा सरल निबंध

Vastu tips: ऐसा रखें घर का वास्तु, जानें 5 टिप्स, मिलेंगे बेहतरीन लाभ