khatu shyam baba

हिन्दी कविता : प्रेम

संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'
छुई-मुई सी होती हैं पत्तियां 
कभी छू के देखी नहीं
डर था कहीं प्रेम की प्रीत 
बंद न हो जाए पत्तियों सी। 
घर-आंगन में बिखेरे दानों को 
चुगती हैं चिड़ियाएं 
चाहता हूं आहट न हो जाए 
खनक चूड़ियों की 
कर देती उनको फुर्र।
 
प्रेम की तहों में
ढूंढता हूं यादों की कशिश 
डर है मुझे किताब में 
रखे गुलाब की सूखी पंखुड़ियों का 
कहीं टूट कर बिखर न जाए। 

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Gas-free vegetarian dishes: LPG गैस के बिना बनने वाले 20 शाकाहारी व्यंजन

गैस सिलेंडर खत्म होने का डर छू मंतर! बिना LPG गैस के भी पक सकता है खाना, ये 7 तरीके हैं सबसे बेस्ट

घर में यदि गैस और इंडक्शन दोनों नहीं है, तो इन 5 आसान तरीकों से फटाफट पकेगा खाना

यदि खत्म हो गई है गैस तो परेशान न हो, बिना LPG के जल्दी से बनाएं ये 5 आसान डिश

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

सभी देखें

नवीनतम

राम- राष्ट्र की जीवनधारा और शाश्वत चेतना का प्रवाह

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध या यह केवल तूफान से पहले की शांति है?

रामनवमी 2026: प्रभु श्रीराम को लगाएं ये 5 खास भोग, तुरंत प्रसन्न होकर देंगे आशीर्वाद

महायुद्ध पर कविता: सुलग रहा संसार है

Benefits of desi ghee: देसी घी खाने के 10 अद्भुत फायदे, आप शायद ही जानते होंगे

अगला लेख