Hanuman Chalisa

कविता : बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ

राकेशधर द्विवेदी
तुम नारी हो, तुम दुर्गा हो
नारी तुम सरस्वती
नारी तुम हो लक्ष्मी
नारी तुम भागीरथी।
 
तुम हो गंगा, तुम हो यमुना
तुम नदिया की धारा
तुम बिन न हो पाए
इस दुनिया में उजियारा।
 
इस सृष्टि की तुम हो जननी
त्याग की तुम परिभाषा
अपना सर्वस्व त्याग किया तुमने
कभी न की कोई अभिलाषा।
 
देती आई अग्निपरीक्षा
वर्षों से तुम सीता बनकर
विष का प्याला तुमने पिया
कृष्ण की प्यारी मीरा बनकर।
 
तुम कष्टों की धारणी बनकर
जीवन है हमको दे जाती
खुद कांटों का जीवन जीकर
गुलाब बन परिवार को महकाती।
 
पर यह पुरुष-प्रधान समाज
अभी तक तुमको न समझ पाया
कभी निर्भया, कभी शाहबानो बना
हमेशा है तुमको तड़पाया।
 
भ्रूण हत्या कर तुम्हारी
सृष्टि विनाश का निर्मम खेल रचा
बेटियों को करके अपमानित
अंधकार का पथ प्रशस्त किया।
 
तो हे मानव, यदि अंधकार से उजाले में आना है
तो बेटियों को पढ़ाना है, बेटियों को बचाना है
महिलाओं का सशक्तीकरण कर
सृ‍ष्टि के सुंदरतम निर्माण का
एक नया अध्याय लिख जाना है। 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

Cashew health effects: प्रतिदिन 5 काजू खाने से क्या होगा सेहत पर असर

लौट आई बहार भोजशाला में, मंदिर था, मंदिर रहेगा

भीषण गर्मी में हीट स्ट्रोक से बचने के 5 तरीके, जानिए लक्षण और प्रभाव

शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग 'थाइमस', जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, यह क्यों खास है हमारी सेहत के लिए

भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी

अगला लेख