Hanuman Chalisa

हिन्दी कविता : आश्चर्य के बुरे दिन

राजकुमार कुम्भज
रोशनी थी 
कि रोशनी के बुरे दिन थे 
रोशनी के दिन 
रोशनी के इतने बुरे दिन थे 
कि रोशनी देख पाना तक 

मुश्किल ही नहीं, नामुमकिन था 
फिर, मैं उन आंखों में उतरा 
किसी आश्चर्य की तरह 
वहां इतना घना अंधेरा था 
कि आश्चर्य था 
आश्चर्य के बुरे दिन थे 
और आश्चर्य था 

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

पोहा, समोसा खाकर हो गए हैं बोर तो नाश्ते में खाएं स्प्राउट्स चाट, 5 फायदे: Healthy Breakfast Ideas

ताड़ासन शरीर को फौलादी और सुडौल बनाने वाला योगासन, इसके हैं 5 फायदे

सनातन परंपरा का यह एक नियम, जिसे अब मान रही है मॉडर्न साइंस; रोज सुबह करने से बीमारियां रहेंगी कोसों दूर

पैरों की पिंडलियों को सुडौल और पतला करने हेतु आजमाएं ये 6 असरदार उपाय

सिर्फ एक अंडा! वैज्ञानिकों ने बताया दिमाग तेज करने का 'सीक्रेट फॉर्मूला'

सभी देखें

नवीनतम

Lucky Plants: घर की बालकनी में लगाएं ये 5 पौधे, खुल जाएंगे तरक्की के बंद दरवाजे

Yoga Day Essay: योग अपनाएं, स्वस्थ जीवन पाएं: अंतरराष्ट्रीय योग दिवस विशेष निबंध

Kids Shorts: इस तरह सीखा हनुमानजी ने आकाश में उड़ना

अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष

Maharana Pratap: महाराणा प्रताप के जन्म के 5 रोचक किस्से

अगला लेख