ऊपर से नीचे बहता है जब विकास के लिए आबंटित धन। प्रशासकीय चैनलों में हो जाते हैं हजार रिसन। अफसर/कर्मचारियों के जब फूटते हैं नासूर से पाप। छापों में निकलता है रिश्वती धन अनाप-शनाप। रोज-रोज अखबारों में पढ़-पढ़कर ये खबरें, ...बहुत दुख होता है।।1।। बैंकों के बकाया से माल्याओं...