दहशत भरी है दिलों में,मोहल्लों में मातमी साये हैं लोग हैं हारे टूटे ,कोविड सितम, कमर तोड़ गया है, ढा रहा है कहर औ ज़िन्दगियों को झिंझोड़ गया है! हैरां है हर आदमी,ग़मगीन चेहरे पे मुर्दनी पसरी हुई, जाने कौन ये ठीकरा,सबके सर पर फोड़ गया है! बिछड़े जो...