Hanuman Chalisa

हिन्दी कविता : पहाड़ के नाम

सुबोध श्रीवास्तव
तुमने
प्रकृति का वरदहस्त पाकर
पाया अपना अस्तित्व
पहाड़ के रूप में
और/ प्रस्तुत किया खुद को
अपने स्वभाव की तरह।
 
लेकिन क्या मालूम है
तुम्हें कि
विशाल काया के अलावा
कुछ भी न हो सका
तुम्हारा,
न किसी का अपनापन
न जीवन का एहसास
और न ही
अपने बने रहने की
जरूरत ही
किसी को समझा पाए। 
 
तुम,
क्योंकि
पाषाण होने के कारण
तुम में/ आदम जाति की मानिंद
विकसित नहीं हो सका
हृदय सागर
जो दूर कर पाता
तुम में समाया
सिर्फ अपना ही अस्तित्व
सर्वशक्तिमान होने का
अहंभाव।
 
शायद यही वजह है कि
अपने आसपास
समूची दुनिया बसने के बावजूद
नहीं महसूस कर सके
तुम/ कभी भी
पंछियों की चहचहाहट
और
सूर्य के शैशवकाल से
प्रौढ़ होने तक के अंतराल में
समाहित/ जीवन के
अलौकिक परम आनंद
और/ शाश्वत सत्य का आत्मबोध|
 
यह सब
किसी विडंबना का
परिचायक नहीं है
बल्कि/ यह खुद तुम्हारे ही
स्थापित किए
आदर्शों और उसूलों का प्रतिफल है
जो, अब
तुम्हारी नियति बन चुके हैं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

Rani Durgavati: रानी दुर्गावती का बलिदान दिवस: इतिहास की वीर नायिका को नमन

डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी पुण्यतिथि, जानें 5 अनसुने तथ्य

रानी दुर्गावती के बलिदान की कहानी की 3 खास बातें

Sanjay Gandhi: पुण्यतिथि विशेष: संजय गांधी कौन थे, जानें राजनीति में उनका योगदान

'अष्टांग योग गीत'

अगला लेख