suvichar

नवगीत: सुलग रहा है मन के भीतर

सुशील कुमार शर्मा
शुक्रवार, 20 फ़रवरी 2026 (16:00 IST)
सुलग रहा है मन के भीतर
घाव पुराना
किसे दिखाएं।
 
होंठों पर 
आकर बैठी है
गुमसुम तन्हाई।
विस्मित सा मन
रिश्ते सूखे ।
लुक्का छिप्पी 
खेल रही है
ग़म की परछाई
कौन सम्हाले
सब हैं भूखे।
 
बिखरा जीवन टूटा सा मन
हाल ठिकाना
कहां बनाएं।
 
बीत गए 
दिन वो सुख वाले
हँसते गाते रहते थे हम 
स्वप्न लोक से
सुंदर थे वो।
आश-दीप
अब लगा है बुझने
छाया घोर अंधेरा हरदम
टूटे सपने
अंदर थे जो।
 
सदियों जैसा अब दिन लगता
मन वीराना
किसे जगाएं।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

चेहरा पड़ गया है काला और बेजान? सर्दियों में त्वचा को मखमल जैसा कोमल बनाएंगे ये 6 जादुई टिप्स

महंगे सप्लीमेंट्स छोड़ें! किचन में छिपे हैं ये 5 'सुपरफूड्स', जो शरीर को बनाएंगे लोहे जैसा मजबूत

सर्दियों में इन 5 बीमारियों में बहुत फायदेमंद है संतरे का जूस, जानिए क्या है सेवन का सही तरीका

Hair loss: बालों का झड़ना: कारण, डाइट चार्ट और असरदार घरेलू नुस्खे

सर्दियों में रोजाना पिएं ये इम्यूनिटी बूस्टर चाय, फायदे जानकर रह जाएंगे दंग

सभी देखें

नवीनतम

बहुत ज्यादा सोचते हैं (Overthinking)? दिमाग को शांत और खुश रखने के लिए रोज करें ये 7 आसान योगासन

Pandit Lekh Ram: 'आर्य मुसाफिर' के नाम से प्रसिद्ध पंडित लेखराम कौन थे, जानें उनके रोचक संस्मरण

यूरोप-अमेरिका के बीच बढ़ रही है अविश्वास की खाई

Guru Golwalkar Jayanti: गुरु गोलवलकर कौन थे? जानें 7 अनसुने तथ्य

जयंती विशेष: छत्रपति शिवाजी: धर्म, संस्कृति और राजनीति के अद्वितीय साम्राज्य निर्माता Chhatrapati Shivaji Maharaj

अगला लेख